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​पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी ने दूरदृष्टि से धर्मांतरण की साजिश को पहचाना:- रामगोपाल

मोगा धर्म जागरण मंच के प्रांत संयोजक रामगोपाल ने कहा कि पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी दूरदृष्टि रखने वाले महान समाज सुधारक थे। उन्होंने पंजाब में धर्मांतरण की संभावित साजिश को समय रहते पहचान लिया था और सनातन धर्मावलंबियों के बीच धार्मिक एवं सामाजिक जागरूकता पैदा करने के लिए व्यापक प्रयास किए।

​पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी ने दूरदृष्टि से धर्मांतरण की साजिश को पहचाना:- रामगोपाल

शहीदी स्मारक, मोगा में पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी की जयंती के अवसर पर आयोजित मासिक गोष्ठी को संबोधित करते हुए रामगोपाल ने कहा कि पंडित श्रद्धाराम ने लोगों को रामायण, महाभारत सहित भारतीय धर्मग्रंथों के प्रति जागरूक किया। उनका मानना था कि अपनी धार्मिक परंपराओं, संस्कारों और मूल सिद्धांतों की जानकारी समाज को वैचारिक रूप से मजबूत बनाती है। उन्होंने समाज को समझाया कि मंदिर पुजारी के लिए नहीं बनते हैं आपके परिवार के लोग मंदिरों में जाते हैं कुछ देर बैठते हैं वहां उन्हें संस्कार मिलते हैं, परंपराओं से आत्मसात होने का मौका मिलता है मंदिरों में जाने वाले परिवार सकारात्मक ऊर्जा से भर जाते हैं जिन परिवारों की महिलाएं नियमित रूप से मंदिर जाती हैं उस परिवार में धर्मांतरण की संभावना लगभग खत्म हो जाती है।

उन्होंने कहा कि पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी ने महिलाओं को भी धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने महिलाओं को मंदिरों से जोड़कर धार्मिक परंपराओं को समझने और अगली पीढ़ी तक संस्कार पहुंचाने के लिए प्रेरित किया। मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि समाज को संस्कार, सेवा, एकता और धर्म के सिद्धांतों से जोड़ने वाले केंद्र हैं—इस विचार को उन्होंने जनजन तक पहुंचाने का प्रयास किया।

रामगोपाल ने कहा कि श्रद्धाराम फिल्लौरी के प्रयासों से पंजाब के मालवा क्षेत्र में लोगों के बीच धार्मिक जागरूकता का ऐसा वातावरण तैयार हुआ, जिससे मिशनरियों द्वारा कथित धर्मांतरण के प्रयासों को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। उन्होंने दावा किया कि धर्मांतरण का पहला मामला माझा क्षेत्र में सामने आया, जबकि मालवा में ऐसी कोशिशों का व्यापक स्तर पर विरोध हुआ।

उन्होंने कहा कि आज भी पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी के विचार समाज के लिए प्रासंगिक हैं। युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति, धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं से जोड़ना तथा महिलाओं की सामाजिक एवं धार्मिक भागीदारी बढ़ाना उनके विचारों को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम हो सकता है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पावरकॉम से सेवानिवृत्त एक्सईएन जयंत सूद तथा तहसीलदार गुरमीत सिंह भी उपस्थित रहे। इस दौरान वक्ताओं ने पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी के जीवन, उनके सामाजिक योगदान और धार्मिक जागरूकता के लिए किए गए कार्यों को याद करते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित किया। उन्होंने समस्त हिन्दू समाज से अपील की कि 30 सितंबर को अपने मुहल्ले के मंदिर में पण्डित श्रद्धा राम श्रद्धाराम जी का चित्र लगाकर पुष्प अर्पण कर उनके जीवन पर चर्चा करके उनका जन्मदिन मनाये तथा अपने परिवार को ग्रन्थ से जोड़े व सप्ताह में एक दिन परिवार सहित मन्दिर में आकर सत्संग करें।

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