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​ब्रिक्स सम्मेलन में भारत की कूटनीतिक ताकत का दिखा असर, PM मोदी ने 3 दिन में कीं 15 द्विपक्षीय बैठकें

​ब्रिक्स सम्मेलन में भारत की कूटनीतिक ताकत का दिखा असर, PM मोदी ने 3 दिन में कीं 15 द्विपक्षीय बैठकें

नई दिल्ली। नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का सफल समापन हो गया। सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में संयुक्त बयान को मंजूरी और नई दिल्ली घोषणापत्र को माना जा रहा है। घोषणापत्र में भारत की प्राथमिकताओं और बदलती वैश्विक परिस्थितियों को लेकर स्पष्ट संकेत और संदेश दिखाई दिए। इस दौरान दुनिया ने भारतीय कूटनीति की बढ़ती प्रभावशीलता भी देखी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान तीन दिनों में विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों के साथ करीब 15 औपचारिक द्विपक्षीय बैठकें कीं। इसके अलावा उन्होंने कई वैश्विक नेताओं और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रमुखों के साथ अलग से मुलाकात और अनौपचारिक बातचीत भी की। इस तरह ब्रिक्स सम्मेलन भारत के लिए केवल बहुपक्षीय विचारविमर्श का मंच नहीं रहा, बल्कि कई देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर भी बना।

रूस से ईरान तक, भारत के रणनीतिक हितों पर हुई चर्चा

प्रधानमंत्री मोदी की द्विपक्षीय कूटनीति की शुरुआत 11 सितंबर को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बैठक से हुई। भारत और रूस के बीच लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग और ऊर्जा संबंधों के बीच यह मुलाकात ऐसे समय हुई, जब रूसयूक्रेन संघर्ष के कारण वैश्विक भूराजनीतिक समीकरण लगातार बदल रहे हैं।

इसी दिन प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से भी मुलाकात की। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच भारतईरान संबंधों का महत्व और बढ़ गया है। चाबहार बंदरगाह, मध्य एशिया तक संपर्क, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे भारत के लिए ईरान को महत्वपूर्ण साझेदार बनाते हैं।

प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से भी मुलाकात की। वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करना, बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार और संयुक्त राष्ट्र सुधार भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के प्रमुख एजेंडे में शामिल रहे।

12 सितंबर को कई देशों के नेताओं से मुलाकात

12 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी की द्विपक्षीय बैठकों का सिलसिला और तेज हुआ। उन्होंने इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग के साथ अलगअलग बैठकें कीं। इन मुलाकातों में रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग, ऊर्जा, निवेश, व्यापार, दुर्लभ खनिज, अंतरिक्ष और संपर्क समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

यूएई के नेतृत्व के साथ प्रधानमंत्री मोदी की बातचीत भी महत्वपूर्ण रही। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ईरान के साथ अपने पारंपरिक संबंधों के अलावा यूएई और अन्य अरब खाड़ी देशों के साथ अपनी रणनीतिक एवं आर्थिक साझेदारी को भी मजबूत बनाए रखना चाहता है।

मोदीशी मुलाकात पर टिकी रहीं निगाहें

12 सितंबर की सबसे चर्चित बैठकों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात रही। गलवान संघर्ष के बाद भारतचीन संबंधों में आए तनाव के बीच दोनों देशों ने हाल के समय में संबंधों को स्थिर करने की दिशा में कदम उठाए हैं। ऐसे में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान हुई मोदीशी बैठक को दोनों देशों के बीच संवाद प्रक्रिया के लिहाज से अहम माना गया।

चीन ब्रिक्स का प्रमुख सदस्य होने के साथ भारत का महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार भी है। हालांकि सीमा, व्यापार और रणनीतिक मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी कायम हैं, लेकिन उच्चस्तरीय संवाद संबंधों को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

राष्ट्रपति मुर्मु ने भी ईरानी राष्ट्रपति से की मुलाकात

इस बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से मुलाकात की। प्रधानमंत्री मोदी के साथ पेजेशकियान की बैठक के एक दिन बाद हुई इस मुलाकात को भारत और ईरान के बीच उच्चस्तरीय संपर्क की निरंतरता के तौर पर देखा गया।

13 सितंबर को अफ्रीका और मध्य एशिया पर फोकस

13 सितंबर को भी प्रधानमंत्री मोदी की द्विपक्षीय कूटनीति जारी रही। इस दिन उन्होंने कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कसीमजोमार्ट टोकायेव, फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अलसिसी और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा के साथ बैठकें कीं। इसके बाद प्रधानमंत्री ने बुरुंडी के राष्ट्रपति एवरेस्ट नदाइशिमिये, नाइजीरिया के उपराष्ट्रपति काशिम शेट्टीमा और युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलुपो के साथ भी द्विपक्षीय वार्ता की।

15 द्विपक्षीय बैठकों से मजबूत हुआ भारत का कूटनीतिक संदेश

तीन दिनों में प्रधानमंत्री मोदी की 15 औपचारिक द्विपक्षीय बैठकें भारत की सक्रिय कूटनीतिक भूमिका को रेखांकित करती हैं। हालांकि प्रधानमंत्री की गतिविधियां केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं रहीं। ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान उन्होंने कई अन्य राष्ट्राध्यक्षों, शासनाध्यक्षों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के नेताओं के साथ ‘पुलअसाइड’ बैठकें भी कीं।

ब्रिक्स सम्मेलन में भारत ने बहुपक्षीय सहयोग, वैश्विक दक्षिण की आवाज, संयुक्त राष्ट्र सुधार और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी। वहीं प्रधानमंत्री मोदी की लगातार द्विपक्षीय बैठकों ने भारत को अलगअलग देशों के साथ उनके विशिष्ट हितों पर सीधे बातचीत का अवसर दिया।

रूस, ईरान और चीन के साथ हुई बैठकों ने जहां बदलते भूराजनीतिक समीकरणों के बीच भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और संतुलन की नीति को सामने रखा, वहीं अफ्रीका, दक्षिणपूर्व एशिया, मध्य एशिया और खाड़ी देशों के नेताओं के साथ बातचीत ने भारत की व्यापक वैश्विक साझेदारी को रेखांकित किया।

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