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​दिल्ली मेट्रो के अर्पण केंद्रों में जमा हुए 41 टन से अधिक पुराने कपड़े, दस केंद्र और खुलेंगे

नई दिल्ली  दिल्ली में पुराने कपड़ों को रखने या उन्हें उचित तरीके से निपटाने की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए दिल्ली मेट्रो के अर्पण केंद्र उपयोगी विकल्प बनकर सामने आए हैं। दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों पर बनाए गए इन केंद्रों पर लोग अपने पुराने और उपयोग में नहीं आने वाले कपड़े जमा करा सकते हैं। इन कपड़ों को दोबारा उपयोग, अपसाइक्लिंग और रीसाइक्लिंग की प्रक्रिया से उपयोगी सामग्री में बदला जा रहा है। मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली मेट्रो रेल निगम के अर्पण केंद्र पुराने कपड़ों के उचित निपटान की समस्या का व्यावहारिक समाधान तो दे ही रहे हैं, साथ ही उन्हें पुनः उपयोग और रीसाइक्लिंग के माध्यम से उपयोगी उत्पादों में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

​दिल्ली मेट्रो के अर्पण केंद्रों में जमा हुए 41 टन से अधिक पुराने कपड़े, दस केंद्र और खुलेंगे

10 अर्पण केंद्रों पर 41 टन से अधिक कपड़े जमा

31 अगस्त तक 10 अर्पण केंद्रों पर कुल 3,940 लोगों ने 41,181.59 किलोग्राम कपड़े जमा कराए। इनमें डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल केंद्र पर सबसे अधिक 9,861.40 किलोग्राम, जबकि शालीमार बाग केंद्र पर 9,761.03 किलोग्राम कपड़े जमा हुए। पंजाबी बाग पश्चिम में 6,534.98 किलोग्राम और शाहदरा में 6,386.08 किलोग्राम कपड़ों का संग्रह हुआ। इसके अलावा मयूर विहार1 में 5,189.40 किलोग्राम, हौज खास में 1,680.70 किलोग्राम, द्वारकाककरोला में 689.40 किलोग्राम, मालवीय नगर में 467.40 किलोग्राम, लाजपत नगर में 395.70 किलोग्राम और मोहन एस्टेट में 215.50 किलोग्राम कपड़े जमा हुए। पांच केंद्र 3 अगस्त को शुरू किए गए थे, जबकि अन्य केंद्र 12 और 17 अगस्त को चालू हुए।

पुराने कपड़ों से बन रहे रग, बैग और अन्य उपयोगी सामान

अर्पण केंद्रों पर जमा कपड़ों को अलगअलग श्रेणियों में बांटकर उनके उपयोग के अनुसार आगे भेजा जा रहा है। प्राप्त सामग्री का एक हिस्सा पुनः उपयोग और अपसाइक्लिंग के लिए अलग किया गया, जबकि बड़ी मात्रा को रीसाइक्लिंग के लिए भेजा गया। लगभग 4,266 किलोग्राम सामग्री को पुनः उपयोग/अपसाइक्लिंग और 29,424 किलोग्राम को रीसाइक्लिंग के लिए अलग किए जाने की जानकारी दी गई है। इन कपड़ों से स्वयं सहायता समूहों द्वारा रग, फोल्डर, कीरिंग, पाउच, बैग और तोरण जैसे उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। अर्पण केंद्रों पर इन उत्पादों को प्रदर्शित भी किया गया है। इस तरह लोगों द्वारा दिए गए पुराने कपड़े सीधे बेकार सामग्री बनने के बजाय नए उपयोगी उत्पादों का रूप ले रहे हैं।

तैयार कपड़ा उत्पादों की बिक्री भी, दस केंद्र और खुलेंगे

पुराने कपड़ों से तैयार उत्पादों की बिक्री भी इन केंद्रों पर की जा रही है। दस अर्पण केंद्रों से कुल 27,036 रुपये की बिक्री दर्ज की गई है। इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पुराने कपड़ों को केवल संग्रहित नहीं किया जा रहा, बल्कि उन्हें उपयोगी उत्पादों में बदलकर उनकी बिक्री भी की जा रही है। इससे पुराने कपड़ों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक व्यावहारिक व्यवस्था तैयार होती दिखाई देती है। अर्पण केंद्रों की पहुंच बढ़ाने के लिए अब 10 और केंद्र खोलने का प्रस्ताव है। ये केंद्र जनवरी 2027 में प्रस्तावित हैं। इनमें मॉडल टाउन, आईएनए, आईपी एक्सटेंशन, पश्चिम विहार पश्चिम, राजेंद्र प्लेस, जनकपुरी पश्चिम, राजौरी गार्डन, ग्रेटर कैलाश, द्वारका सेक्टर10 और छतरपुर मेट्रो स्टेशन शामिल हैं।

दिल्ली मेट्रो की प्रभावी पहल: सीएम रेखा गुप्ता

मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने कहा कि अर्पण केंद्र पुराने कपड़ों के उचित निपटान की समस्या का व्यावहारिक समाधान देने के साथसाथ उन्हें पुनः उपयोग और रीसाइक्लिंग के माध्यम से उपयोगी उत्पादों में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। दिल्लीवासियों की भागीदारी से इस व्यवस्था को और व्यापक बनाया जा सकता है। हमारा प्रयास है कि लोगों के लिए पुराने कपड़े देने की सुविधा सहज और सुलभ हो तथा इनका अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करते हुए दिल्ली को स्वच्छ, सुंदर और हरित बनाने के प्रयासों को और मजबूती मिले।

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