
बाराबंकी, अमृत विचार। दिगंबर जैन मंदिर बाराबंकी में जैन धर्म के सबसे बड़े पर्व दशलक्षण पर्व के पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म मनाया गया। प्रातः पांच बजे मुनि श्री सौम्य सागर जी के सान्निध्य में ध्यान शिविर का आयोजन हुआ। इसमें योग के महत्व के बारे में बताया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।
इसके बाद मुनि श्री के सान्निध्य में भगवान पार्श्वनाथ का अभिषेक, पूजन एवं शांतिधारा कार्यक्रम संपन्न हुआ। पूजा में सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य दीप चंद्र सुभाष गंगवाल परिवार को मिला, जबकि महाअर्घ चढ़ाने का सौभाग्य चंद्रप्रभु महिला मंडल को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर मुनि श्री ने प्रवचन में कहा कि उत्तम सत्य धर्म का अर्थ वचन और विचार में सत्यता रखना है।
शाम को संगीतमयी आरती और भावनृत्य
मिथ्याभाषण, छलकपट और असत्य से दूर रहना ही उत्तम सत्य धर्म है। यह धर्म व्यक्ति को सही मार्ग पर चलने तथा जीवन में विश्वास और सदाचार स्थापित करने की प्रेरणा देता है। सत्य बोलना, सत्य सोचना और सत्य आचरण ही धर्म है।
सांयकालीन सभा में संगीतमयी आरती के साथ भावनृत्य प्रस्तुत किया गया, जिसे प्रतिष्ठा जैन और वान्या जैन ने प्रस्तुत किया। वहीं, मुनि श्री को आहार कराने का सौभाग्य सुनील कुमार अदित्य गंगवाल परिवार को प्राप्त हुआ।



