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​वडनगर से वाराणसी तक… संकल्प सेवा की अनोखी मुहिम, बाइकर्स की 20 टीम करेगी 35 हजार km का सफर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन और सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर शुरू की गई सेवा संकल्प यात्रा में 500 से ज्यादा युवा वॉलंटियर हिस्सा ले रहे हैं. 17 सितंबर से शुरू हुई यह यात्रा 7 अक्टूबर तक चलेगी. मोटरसाइकिल पर निकले ये युवा वॉलंटियर वडनगर से वाराणसी तक करीब 35,500 किलोमीटर का सफर तय करेंगे. ये एक ऐसी यात्रा पर निकले हैं, जो मोटरसाइकिल यात्रा से कहीं ज्यादा है.

​वडनगर से वाराणसी तक… संकल्प सेवा की अनोखी मुहिम, बाइकर्स की 20 टीम करेगी 35 हजार km का सफर

20 टीमों में बंटे 500 से अधिक युवा रास्ते में पड़ने वाले गांवों, कस्बों और शहरों में सेवा गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं. स्कूलों, अस्पतालों, अनाथालयों और वृद्धाश्रमों में पहुंचकर वॉलंटियर सफाई अभियान चला रहे हैं और जरूरतमंद लोगों की मदद कर रहे हैं.

इस का उद्देश्य सेवा की भावना को जमीनी स्तर तक पहुंचाना और लोगों से सीधे संवाद करना है. वॉलंटियर गांवगांव जाकर सफाई अभियान, गौ सेवा, बुजुर्गों की देखभाल और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता जैसे कार्यक्रम कर रहे हैं.

स्कूल, अस्पताल और वृद्धाश्रम में सेवा

यात्रा के दौरान तालाबों, मंदिरों, स्कूलों, पार्कों, अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर सफाई अभियान चलाए जा रहे हैं. इसके अलावा लाभार्थियों से संवाद, युवा संवाद, ग्राम सभा बातचीत और महिला संवाद के जरिए स्थानीय लोगों की जरूरतों और अपेक्षाओं को समझने का प्रयास किया जा रहा है.

PM SHRI स्कूलों में वॉलंटियर कैंपस की सफाई के साथ छात्रों से संवाद कर रहे हैं. इस दौरान किताबें और स्टेशनरी भी वितरित की जा रही हैं. अस्पतालों, अनाथालयों और वृद्धाश्रमों में पहुंचकर जरूरतमंद लोगों की मदद की जा रही है. वहीं, विधवाओं को किट वितरित करने और ASHA वर्कर्स को सम्मानित करने जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं.

यात्रा के दौरान ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण भी किया जा रहा है. इसके साथ ही युवाओं को अंगदान की शपथ दिलाई जा रही है. शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देकर लोगों को देश के इतिहास और उसके नायकों से जोड़ने की कोशिश भी की जा रही है.

गांवगांव पहुंचकर लोगों से सीधा संवाद

यह यात्रा केवल एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने का अभियान नहीं है, बल्कि सेवा, संवाद, युवा भागीदारी, सामाजिक कल्याण और सामुदायिक सहभागिता को जोड़ने की कोशिश है. वॉलंटियर रास्ते में सिर्फ गुजर नहीं रहे हैं, बल्कि स्थानीय लोगों के बीच रुककर उनकी जरूरतों को समझ रहे हैं और उसी के अनुसार सेवा गतिविधियां कर रहे हैं.

यह यात्रा केवल दो स्थानों के बीच की दूरी तय करने का माध्यम नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के जन्मस्थान वडनगर को उनकी कर्मभूमि काशी से जोड़ने वाली सामाजिक और आध्यात्मिक यात्रा है.

यात्रा का उद्देश्य लोगों की भावनाओं को जोड़ना, सेवा गतिविधियों के जरिए अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों की सेवा को सामने रखना है.

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