अक्टूबर का पहला लॉन्ग वीकेंड और उत्तराखंड के कैंची धाम में श्रद्धालुओं की गिनती 50 हजार के पार पहुंच गई. श्रद्धालुओं की बढ़ती गिनती का असर ये कि अब प्रशासन को दर्शन के लिए रजिस्ट्रेशन, श्रद्धालुओं की संख्या सीमित करने और शटल सेवा जैसे इंतजामों पर विचार कर रहा है. और इससे पता चलता है कि भारत में आस्था सिर्फ मंदिरों तक नहीं पहुंच रही, ये लोगों की यात्रा की दिशा और पूरे टूरिज्म मैप को भी बदल रही है.

अक्टूबर के पहले लॉन्ग वीकेंड लोग शिमला मनाली ही नहीं पहुंचे चारधाम की ओर भी श्रद्धालुओं की गिनती दो अक्टूबर को 39,567 दर्ज की गई. यानी छुट्टी का मतलब अब बस गोवा बीच, मनाली का व्यू और जयपुर की गलियां नहीं रह गया है.
नई ट्रैवल लिस्ट में केदारनाथ, कैंची धाम, काशी, अयोध्या, वृंदावन और उज्जैन भी तेजी से जगह बना रहे हैं. मंदिरों ने भारत का ट्रैवल मैप बदल दिया है.बात प्रभु दर्शन के साथ साथ पहाड़, घाट, लोकल फूड, मार्केट, कल्चर और सोशल मीडिया एक्सपीरियंस की भी है.
हर 100 डोमेस्टिक ओवरनाइट ट्रिप में 48 धार्मिक
जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच हुए डोमेस्टिक टूरिज्म एक्सपेंडिचर सर्वे में धार्मिक और तीर्थ यात्रा घरेलू ओवरनाइट ट्रिप का सबसे बड़ा कारण निकली. हर 100 ओवरनाइट ट्रिप में करीब 48 ट्रिप तीर्थ और धार्मिक वजहों से हुईं. सर्वे 2.46 लाख से ज्यादा हाउसहोल्ड्स पर किया गया था.
दिलचस्प बात ये भी है कि ग्रामीण टूरिस्ट हाउसहोल्ड्स में 100 पर औसतन 127 ओवरनाइट ट्रिप और शहरी हाउसहोल्ड्स में 132 ट्रिप दर्ज हुईं. यानी ट्रैवल बढ़ रहा है और उसमें धार्मिक यात्रा सबसे बड़ा हिस्सा ले रही है.
ट्रैवल मैप में यूपी सबसे आगे
गोवा, केरल और राजस्थान कभी ट्रैवल डेस्टिनेशन लिस्ट में टॉप पर होते थे लेकिन प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं यूपी 15.7 फीसदी विजिटर ट्रिप्स के साथ नंबर1 है. तमिलनाडु 13.4 फीसदी और राजस्थान 8 फीसदी के साथ उसके बाद हैं. इस आंकड़े में राज्य के अंदर और दूसरे राज्यों से आने वाले दोनों विजिटर शामिल हैं.
यूपी के आंकड़े देखें तो बदलाव और साफ दिखता है
उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या में बड़ा उछाल देखने को मिला है. अयोध्या में 2023 में करीब 5.76 करोड़ विजिटर पहुंचे थे, जो 2024 में बढ़कर 16.44 करोड़ हो गए. वहीं वाराणसी में 2023 के करीब 10.18 करोड़ से बढ़कर 2024 में 11 करोड़ विजिटर दर्ज किए गए. मथुरा में भी फुटफॉल 2023 के करीब 7.79 करोड़ से बढ़कर 2024 में करीब 9 करोड़ पहुंच गया. ये आंकड़े उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के 2024 के पर्यटन आंकड़ों के हवाले से सामने आए हैं. केंद्र सरकार के मुताबिक, 2025 की पहली छमाही में ही अयोध्या में 23 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु पहुंच चुके थे.
कैंची धाम की कहानी
उत्तराखंड के कैंची धाम में लोकल एडमिनिस्ट्रेशन के हिसाब से 2026 के पहले छह महीनों में ही करीब 24.34 लाख लोग पहुंचे है. जबकि पिछले पूरे साल में 8 लाख विजिटर आए थे. यानी छह महीने में ही संख्या पिछली सालाना संख्या के करीब तीन गुने तक पहुंच गई.
सोशल मीडिया, सेलिब्रिटी विजिट और अब हनुमान अंश फिल्म ने नीम करोली बाबा और कैंची धाम को नई यंग ऑडियंस तक पहुंचाया है. फिल्म की रिलीज के बाद इस जगह को लेकर दिलचस्पी और बढ़ी.
केदारनाथ अब सिर्फ तीर्थ नहीं, ट्रैवल एक्सपीरियंस भी
केदारनाथ की कहानी भी यही है. यहां दर्शन के साथ ट्रैकिंग, पहाड़ और एडवेंचर का यंग जनरेशन को एक ट्रिप में आस्था, एडवेंचर के साथ सोशल मीडिया कंटेंट भी देता है. इसीलिए केदारनाथ धाम अब सिर्फ धार्मिक यात्रा की कैटेगरी में नहीं दिखते. युवा इन्हें अपने पूरे ट्रैवल प्लान का हिस्सा बना रहे हैं.
काशी में दर्शन के साथ घाट, गली और खाना
काशी इसका सबसे पुराना लेकिन नए अंदाज का उदाहरण है. आप एक रील देख लीजिए काशी की फिर जोरील्स की बाढ़ आएगी उससे ही आपको समझ आ जाएगा केदारनाथ जी के साथ साथ काशी भक्तों और क्रिएटर्स दोनों को प्रिय है. बाबा विश्वनाथ के दर्शन, गंगा के घाट,नाव की सवारी, बनारसी चाट पुरानी संकरी गलियां और बनारसी साड़ी की खोज में लोकल मार्केट. बनारस स्वयं में ही ब्रह्मांड है.
अयोध्या और मथुरावृंदावन में भी यही पैटर्न दिखता है. मंदिर के साथ हेरिटेज, संस्कृति, फूड और नए टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर को जोड़ा जा रहा है. सरकारी आंकड़ों में धार्मिक यात्रा का 48 फीसदी हिस्सा और यूपी का 15.7 फीसदी विजिटर ट्रिप शेयर साफ बताता है कि अब हिल स्टेशन और बीच वेकेशन नहीं भक्ति और आस्था ने जो ट्रेवल मैप बनाया है उसमें दर्शन तीर्थ कर वापस ले जाने को प्रसाद भर नहीं है बांटने को कंटेट का खजाना भी है.



