Stock Market Crash: हफ्ते के पहले कारोबारी दिन दलाल स्ट्रीट पर निवेशकों को तगड़ा झटका लगा है. पिछले हफ्ते बाजार में जो रौनक लौटी थी, वो सोमवार को काफी हद तक गायब हो गई. बिकवाली का दबाव इतना तेज था कि कुछ ही घंटों में निवेशकों के करीब 2.34 लाख करोड़ रुपये डूब गए. इस बड़ी गिरावट के बाद बीएसई पर लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर 470 लाख करोड़ रुपये पर आ गया है.

दोपहर 1 बजकर 50 मिनट पर सेंसेक्स 1,000 अंक से ज्यादा टूटकर 73,729 के स्तर पर कारोबार कर रहा था. वहीं निफ्टी 50 भी 250 अंकों से ज्यादा का गोता लगाकर 22,900 के अहम स्तर के नीचे फिसल गया. बाजार में डर का माहौल इस बात से समझा जा सकता है कि उतारचढ़ाव मापने वाला इंडिया विक्स 3 फीसदी से ज्यादा उछलकर 14 के पार चला गया. एनएसई पर कुल 2,474 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि सिर्फ 894 शेयर ही हरे निशान में टिक पाए. 94 शेयरों के भाव में कोई बदलाव नहीं हुआ.
छोटे व मझोले शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली. निफ्टी मिडकैप 100 तथा स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0.7 फीसदी तक लुढ़क गए. सेक्टर्स की बात करें तो निफ्टी प्राइवेट बैंक करीब 2 फीसदी टूटा, जबकि एफएमसीजी और फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स 1 फीसदी से ज्यादा गिरे. हालांकि इस चौतरफा बिकवाली के बीच सरकारी बैंकों ने मजबूती दिखाई और निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स करीब 2 फीसदी उछल गया. शेयरों में अडानी पोर्ट्स और मारुति सुजुकी ने बाजार के रुख के उलट 2 फीसदी तक की बढ़त बनाई, जबकि इंफोसिस, ट्रेंट, एचयूएल, बजाज फिनसर्व, एनटीपीसी और बजाज फाइनेंस 2 फीसदी तक टूट गए. हालांकि बाजार बंद होते समय बाजार में थोड़ी रिकवरी जरूर आई.
अच्छे तिमाही नतीजों के बाद भी क्यों टूटे बड़े बैंकों के शेयर
सोमवार को बाजार गिराने में सबसे बड़ा हाथ दिग्गज प्राइवेट बैंकों का रहा. एक्सिस बैंक और एचडीएफसी बैंक के दूसरी तिमाही के नतीजे बाजार के अनुमान के मुताबिक नहीं रहे, जिसके बाद इनमें जमकर बिकवाली हुई. एक्सिस बैंक का स्टैंडअलोन शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 38 फीसदी बढ़कर 7,003 करोड़ रुपये रहा. मुनाफा बढ़ने के बावजूद ये बाजार के जानकारों के अनुमान से कम निकला. नतीजा ये हुआ कि एक्सिस बैंक का शेयर 5 फीसदी से ज्यादा टूट गया और सेंसेक्स का टॉप लूजर बन गया.
इसी तरह देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक एचडीएफसी बैंक का शुद्ध मुनाफा दूसरी तिमाही में 4.6 फीसदी बढ़कर 19,510 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल इसी तिमाही में 18,641 करोड़ रुपये था. लेकिन बाजार को इससे बेहतर आंकड़ों की उम्मीद थी, इसलिए एचडीएफसी बैंक का शेयर भी 2 फीसदी से ज्यादा लुढ़क गया. इसके अलावा आईसीआईसीआई बैंक और यस बैंक के शेयरों में भी 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई.
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई टेंशन
बाजार की दूसरी सबसे बड़ी सिरदर्दी कच्चा तेल है. डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के ऊर्जा सेक्टर समेत उस पर लगे कड़े प्रतिबंधों में छूट देने का फैसला किया है. इसके बाद सोमवार को ब्रेंट क्रूड वायदा में 2 फीसदी से ज्यादा की नरमी तो आई, लेकिन ये पिछले हफ्ते के मुकाबले अब भी काफी ऊपर यानी 107 डॉलर प्रति बैरल के पार बना हुआ है. वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा है.
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ किया है कि ट्रंप इस छूट के आर्थिक असर का आकलन करने के लिए 60 दिनों तक का समय लेंगे. पिछले हफ्ते ही मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और समुद्री जहाजों की सुरक्षा को लेकर उठे सवालों के कारण ब्रेंट क्रूड ने 110 डॉलर प्रति बैरल का स्तर छू लिया था. मई के बाद ये पहला मौका था जब तेल इस स्तर तक पहुंचा.
विदेशी निवेशकों की बिकवाली हावी
दलाल स्ट्रीट की गिरावट के पीछे कमजोर वैश्विक संकेत भी जिम्मेदार हैं. शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में भारी बिकवाली हुई थी, जहां नैस्डैक 2 फीसदी से ज्यादा और एसएंडपी 500 इंडेक्स 1 फीसदी से अधिक टूटा था. सोमवार को एशियाई बाजारों में भी कमजोरी रही. जापान का निक्केई 0.64 फीसदी गिरा, जबकि इंडोनेशिया का जकार्ता कंपोजिट 5 फीसदी से ज्यादा क्रैश हो गया. वहीं दक्षिण कोरिया के कोस्पी में करीब 2 फीसदी की तेजी रही, क्योंकि वहां निवेशकों ने निचले स्तरों पर एआई शेयरों में खरीदारी की. भारतीय शेयरों को ग्लोबल मार्केट में ‘एंटीएआई’ विकल्प के तौर पर देखा जाता है. इसलिए जब भी विदेशी बाजारों में एआई शेयरों में तेजी आती है, तो भारतीय बाजार में दबाव देखने को मिलता है.
इसके अलावा मुनाफावसूली और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी बाजार का मूड बिगाड़ा. गुरुवार और शुक्रवार के दो सत्रों में निफ्टी 2 फीसदी से ज्यादा चढ़ा था. मंगलवार को बाजार में छुट्टी है और सोमवार को निफ्टी की वीकली एक्सपायरी भी पड़ी, जिससे निवेशकों ने मुनाफा वसूलना शुरू कर दिया. वहीं विदेशी निवेशकों ने शुक्रवार को भले ही 1,166 करोड़ रुपये की खरीदारी की हो, लेकिन अक्टूबर के अब तक के 11 कारोबारी सत्रों में से 9 में उन्होंने भारी बिकवाली ही की है.
आगे कैसी रहेगी बाजार की चाल
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार का कहना है कि पिछले हफ्ते निफ्टी में आई 2.8 फीसदी की तेजी और आईटी के बाद बैंकिंग दिग्गजों के अच्छे नतीजों में बाजार को संभालने की ताकत है. लेकिन होर्मुज में बढ़ता तनाव और ब्रेंट क्रूड का 109 डॉलर के आसपास रहना बाजार के लिए बड़ी रुकावट बनेगा. उनके मुताबिक लार्जकैप शेयरों के आकर्षक वैल्यूएशन और रुपये की मजबूती से विदेशी निवेशकों का रुख थोड़ा सकारात्मक जरूर हुआ था, पर महंगे क्रूड के चलते ये टिक पाना मुश्किल है. ऐसे माहौल में मिडकैप और स्मॉलकैप के मुकाबले लार्जकैप शेयर बेहतर प्रदर्शन करते रहेंगे और इस हफ्ते दूसरी तिमाही के नतीजों के आधार पर शेयरों में एक्शन दिखेगा.
वहीं एक्सिस डायरेक्ट के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट हेमांग गोर का मानना है कि सोमवार की वीकली एक्सपायरी सेटलमेंट की वजह से बाजार में दिनभर उतारचढ़ाव बना रह सकता है. तकनीकी तौर पर निफ्टी के लिए 23,000 का स्तर बचाना बेहद जरूरी है. आज के कारोबार में निफ्टी के लिए 22,950 पर अहम सपोर्ट है, जबकि ऊपर की तरफ 23,300 के स्तर पर तगड़ी रुकावट यानी रेजिस्टेंस मौजूद है.



