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पेट​​​ की गैस और ब्लोटिंग से परेशान हैं? ये 4 ड्रिंक्स पाचन को दे सकते हैं सहारा, जानिए आंतों के अच्छे बैक्टीरिया के लिए इनके फायदे

पेट​​​ की गैस और ब्लोटिंग से परेशान हैं? ये 4 ड्रिंक्स पाचन को दे सकते हैं सहारा, जानिए आंतों के अच्छे बैक्टीरिया के लिए इनके फायदे

पेट में गैस, ब्लोटिंग, भारीपन और कब्ज जैसी समस्याएं आजकल आम हो गई हैं। गलत खानपान, शारीरिक गतिविधि की कमी, तनाव और अनियमित दिनचर्या का असर पाचन तंत्र पर पड़ सकता है। ज्यादा तली-भुनी और मसालेदार चीजें खाना, भोजन को ठीक से न चबाना और खाने के तुरंत बाद लेट जाना भी कुछ लोगों में पाचन संबंधी परेशानी बढ़ा सकता है।

कई बार सामान्य भोजन करने के बाद भी पेट फूला हुआ महसूस होता है। ऐसे में लोग अक्सर पाचन संबंधी दवाओं का सहारा लेते हैं। हालांकि, खानपान में कुछ बदलाव करके भी पाचन को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

कैलिफोर्निया के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी ने आंतों की सेहत और पाचन को सपोर्ट करने वाले चार पेय पदार्थों के बारे में जानकारी साझा की है। इनमें केफिर, अदरक की चाय, पेपरमिंट टी और नारियल पानी शामिल हैं। आइए जानते हैं कि ये पेय किस तरह मदद कर सकते हैं और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

1. केफिर आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को दे सकता है सहारा

<escape>केफिर (Kefir)</escape> दूध से तैयार किया जाने वाला एक फर्मेंटेड पेय है। इसे विशेष बैक्टीरिया और यीस्ट कल्चर की मदद से बनाया जाता है। इसमें जीवित सूक्ष्मजीव मौजूद हो सकते हैं, जो आंतों के माइक्रोबायोम के संतुलन में भूमिका निभाते हैं।

केफिर में मौजूद कुछ प्रोबायोटिक बैक्टीरिया पाचन तंत्र के लिए उपयोगी हो सकते हैं। फर्मेंटेशन की प्रक्रिया के दौरान दूध में मौजूद लैक्टोज की मात्रा भी कम हो सकती है, इसलिए कुछ लोगों को इसे सामान्य दूध की तुलना में पचाना आसान लगता है।

हालांकि, केफिर में दही से तीन गुना अधिक प्रोबायोटिक्स होने का दावा हर उत्पाद पर लागू नहीं होता। इसकी वास्तविक मात्रा इस्तेमाल किए गए कल्चर और तैयार करने की प्रक्रिया पर निर्भर करती है।

ध्यान रखें: जिन्हें दूध से एलर्जी है, वे केफिर का सेवन न करें। लैक्टोज इनटॉलरेंस वाले लोग भी इसे कम मात्रा में आजमाने से पहले अपनी सहनशीलता का ध्यान रखें।

2. अदरक की चाय गैस और पेट के भारीपन में दे सकती है राहत

अदरक का इस्तेमाल लंबे समय से पाचन संबंधी परेशानियों में किया जाता रहा है। इसमें जिंजरोल जैसे प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं, जिन पर पाचन और मतली से जुड़े प्रभावों को लेकर शोध हुआ है।

अदरक कुछ लोगों में पेट खाली होने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने और मतली कम करने में मदद कर सकता है। भोजन के बाद पेट भारी रहने या हल्की मितली महसूस होने पर अदरक की हल्की चाय उपयोगी विकल्प हो सकती है।

कैसे बनाएं: एक कप पानी में अदरक के कुछ छोटे टुकड़े डालकर कुछ मिनट उबालें। इसके बाद छानकर हल्का गर्म सेवन करें। इसमें बहुत अधिक चीनी मिलाने से बचें।

हालांकि, अदरक की चाय गैस या ब्लोटिंग का निश्चित इलाज नहीं है। कुछ लोगों को अधिक अदरक लेने से सीने में जलन या पेट में परेशानी भी हो सकती है।

3. पेपरमिंट टी पेट की मांसपेशियों को आराम देने में मददगार

पेपरमिंट यानी पुदीने की पत्तियों से तैयार चाय भी पाचन संबंधी परेशानी में कुछ लोगों को राहत दे सकती है। पुदीने में मेंथॉल नामक प्राकृतिक तत्व होता है, जो पाचन तंत्र की मांसपेशियों को आराम देने से जुड़ा है।

पेपरमिंट ऑयल पर हुए कुछ अध्ययनों में इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) के लक्षणों, जैसे पेट दर्द और ऐंठन में संभावित राहत देखी गई है। हालांकि, पेपरमिंट टी पर उपलब्ध प्रमाण सीमित हैं और इसे IBS या ब्लोटिंग का तत्काल इलाज नहीं माना जा सकता।

कैसे बनाएं: एक कप गर्म पानी में कुछ ताजी पुदीने की पत्तियां डालें। पांच से सात मिनट तक ढककर रखें और फिर छानकर पी लें।

सावधानी: जिन लोगों को एसिड रिफ्लक्स या सीने में जलन की समस्या रहती है, उनमें पुदीना कुछ मामलों में परेशानी बढ़ा सकता है। ऐसे लोगों को इसका सेवन सावधानी से करना चाहिए।

4. नारियल पानी शरीर में तरल पदार्थों की कमी पूरी करने में मददगार

नारियल पानी में पोटैशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स पाए जाते हैं। यह शरीर को हाइड्रेट रखने का एक अच्छा विकल्प हो सकता है, खासकर गर्मी या शारीरिक गतिविधि के बाद।

दस्त या उल्टी के कारण शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी होने पर केवल नारियल पानी पर निर्भर रहना सही नहीं है। ऐसी स्थिति में जरूरत के अनुसार ओआरएस का इस्तेमाल और चिकित्सकीय सलाह जरूरी हो सकती है।

नारियल पानी को एसिडिटी का इलाज या शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने वाला पेय नहीं समझना चाहिए। इसमें प्राकृतिक शुगर और पोटैशियम भी होता है, इसलिए डायबिटीज या किडनी की बीमारी वाले लोगों को इसकी मात्रा को लेकर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

डॉक्टर की सलाह: इन आदतों से भी सुधर सकता है पाचन

केवल पाचन के लिए विशेष पेय पदार्थ पीना ही काफी नहीं है। रोजमर्रा की कुछ आदतें भी पेट की सेहत को प्रभावित करती हैं।

  • भोजन को अच्छी तरह चबाकर और धीरे-धीरे खाएं।
  • एक बार में बहुत ज्यादा खाना खाने से बचें।
  • भोजन करने के तुरंत बाद लेटने के बजाय कुछ समय सीधे बैठें या हल्की सैर करें।
  • रोजाना पर्याप्त पानी पिएं।
  • डाइट में फल, सब्जियां और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें।
  • नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि करें।
  • तनाव कम करने और पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें।

अगर गैस और ब्लोटिंग लगातार बनी रहती है, बार-बार पेट दर्द होता है या इसके साथ वजन कम होना, मल में खून आना अथवा उल्टी जैसी परेशानी दिखाई देती है, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

क्या इन चारों ड्रिंक्स को रोज पीना जरूरी है?

नहीं। हर व्यक्ति का पाचन तंत्र अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है। किसी को केफिर से फायदा महसूस हो सकता है, जबकि किसी को डेयरी उत्पादों से गैस या ब्लोटिंग बढ़ सकती है। इसी तरह पुदीना कुछ लोगों में राहत देने के बजाय एसिडिटी बढ़ा सकता है।

इसलिए किसी भी पेय को अपनी जरूरत और सहनशीलता के अनुसार चुनें। संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी, नियमित गतिविधि और अच्छी दिनचर्या को प्राथमिकता देना ज्यादा जरूरी है।

Satya Report Disclaimer: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। बताए गए पेय पदार्थ पाचन को सहारा दे सकते हैं, लेकिन गैस, ब्लोटिंग या आंतों की किसी बीमारी का निश्चित इलाज नहीं हैं। लगातार या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर से परामर्श लें।

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