देश में दिवाली से पहले शेयर बाजार ने निवेशकों को जमकर कमाई कराई है. दिवाली से पहले 7 कारोबारी दिनों में सेंसेक्स और निफ्टी में 10 फीसदी से ज्यादा का उछाल देखने को मिला है. जोकि 35 बरस का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में 1992 में ‘मुहूर्त ट्रेडिंग’ सत्र की शुरुआत के बाद से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पहली बार दिवाली से पहले के 7 दिनों में दोनों प्रमुख सूचकांकों में 10 प्रतिशत से अधिक की उछाल देखने को मिली है.

दिवाली से पहले के सात कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स 81,000 के स्तर को पार कर गया, जिसमें 10.6 प्रतिशत की बढ़त देखी गई. वहीं, निफ्टी 25,000 के स्तर को पार करते हुए 10.3 प्रतिशत ऊपर चढ़ गया. शुक्रवार को सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 2 प्रतिशत से अधिक की तेजी आई और ये क्रमशः 81,028 और 25,030 के स्तर पर बंद हुए. इससे पहले, दिवाली से ठीक पहले के सात दिनों में निफ्टी का सबसे अच्छा प्रदर्शन 1993 में दर्ज किया गया था, जब इसमें 7.5 प्रतिशत की तेजी आई थी. इसके बाद 2020 में 6.8 प्रतिशत की बढ़त देखी गई थी.
क्यों आई शेयर बाजार में तेजी?
विश्लेषकों का कहना है कि घरेलू बाजार में यह पॉजिटिविटी कई खबरों से आई है. सरकार फरवरी 2027 में आने वाले बजट में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स पर फिर से विचार कर सकती है. इसके अलावा, अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की शानदार जीत ने पश्चिम एशिया में 2026 की शुरुआत में शुरू हुए संघर्ष के समाधान की उम्मीदें जगा दी हैं.
जिसकी वजह से इस हफ्ते की शुरुआत में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 10 प्रतिशत से अधिक गिरकर 95 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं. साथ ही, मई 2026 में लगभग 5.3 प्रतिशत पर रहने वाली अमेरिकी 10वर्षीय ट्रेजरी यील्ड भी घटकर 4.8 प्रतिशत के स्तर पर आ गई है.
इक्विनोमिक्स रिसर्च के फाउंडर और रिसर्च प्रमुख जी. चोकालिंगम ने बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट में कहा कि घरेलू बाजारों में यह पॉजिटिविटी, खासकर अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डोनाल्ड ट्रंप की हार के बाद, लोकल इंडीकेटर्स के साथसाथ बाजार को ऊपर ले गई है. उन्होंने आगे कहा कि पश्चिम एशिया में शांति आने की संभावना काफी अधिक है, जिससे आगे चलकर ग्लोबल लेवल पर तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आ सकती है.
डोनाल्ड ट्रंप शायद व्यापार के मोर्चे पर, खासकर भारत के खिलाफ, कोई आक्रामक कदम न उठा पाएं. तेल की कीमतें और गिर सकती हैं, जिससे रुपए को मजबूती मिल सकती है. इसके परिणामस्वरूप, अल्पावधि में घरेलू इक्विटी बाजार में FPI का प्रवाह फिर से शुरू हो सकता है. ऐसा लगता है कि बाजार में यह पॉजिटिविटी कम से कम अगले कुछ हफ्तों तक बनी रहेगी.
दीवाली से पहले की सबसे बड़ी 7दिनों की तेजी
| वर्ष | सेंसेक्स | निफ्टी |
| 2026 | 10.6 | 10.3 |
| 2020 | 7.0 | 6.8 |
| 1993 | 6.2 | 7.5 |
| 2004 | 4.2 | 3.1 |
| 2018 | 3.9 | 5.0 |
| 2010 | 3.3 | 3.3 |
| 2022 | 3.0 | 2.6 |
स्रोत: NSE, BSE का ऐतिहासिक डेटा; 6 नवंबर, 2026 तक अपडेट किया गया.
टूटा 35 बरस का रिकॉर्ड
निफ्टी के लिए, इससे पहले का सबसे अच्छा प्रदर्शन 1993 में 7.5 प्रतिशत की बढ़त थी, जिसके बाद 2020 में 6.8 प्रतिशत की तेजी आई थी. इसलिए, यह हालिया तेजी भारतीय इक्विटी बाजारों के इतिहास में एक नया मील का पत्थर है. NSE द्वारा ‘मुहूर्त ट्रेडिंग’ की परंपरा शुरू किए जाने के बाद से, दोनों बेंचमार्क सूचकांकों ने दिवाली से पहले के सात दिनों में अपनी सबसे मजबूत बढ़त दर्ज की है.
आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह कारोबारी दिनों में से पांच दिन FII बाजार में खरीदार रहे और उन्होंने 18,661 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे. अक्टूबर के हाई लेवल से यील्ड में 3540 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आ चुकी है. बर्नस्टीन के विश्लेषकों का मानना है कि अगर अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेट्स का नियंत्रण रहता है और वे सरकारी खर्च पर लगाम लगाते हैं, तो यह भारतीय बाजारों और रुपए के लिए अच्छा संकेत होगा.
अभी चुनौतियां भी हैं
इस पॉजिटिविटी के साथ कुछ शर्तें भी जुड़ी हैं. विश्लेषकों का मानना है कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने की ग्लोबल होड़ पूंजी को अपनी ओर खींचने का एक बड़ा जरिया बनी हुई है. इसके साथ ही, कई उभरते बाजारों ने निवेशकों के लिए कुछ साल पहले की तुलना में अब कहीं बेहतर संभावनाएं पेश की हैं. बर्नस्टीन के मैनेजिंग डायरेक्टर वेणुगोपाल गारे ने 4 नवंबर को निखिल अरेला के साथ मिलकर लिखे एक नोट में कहा कि इससे भारत में आने वाले संभावित निवेश काफी सीमित हो जाते हैं और इनका असर भी कम समय के लिए ही रहता है.
हम निफ्टी के लिए अपना 25,000 का लक्ष्य बरकरार रखते हैं, लेकिन हमारा मानना है कि लंबी अवधि में बाजार की दिशा इस बात से कम तय होगी कि अमेरिकी कांग्रेस पर किस पार्टी का नियंत्रण है, और इस बात से ज्यादा तय होगी कि ऊर्जा की कीमतें, बाहरी संतुलन और भारत के अर्निंग साइकिल की स्थिरता कैसी रहती है, हालांकि बाजार में सुधार व्यापक हो सकता है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा तेजी का नेतृत्व मुख्य रूप से लार्जकैप शेयर करेंगे, जिनमें बड़े पैमाने पर FII निवेश आकर्षित करने की क्षमता है.
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने बीएस की रिपोर्ट में कहा कि यह तेजी मजबूत हो सकती है और बनी रह सकती है, क्योंकि कई लार्जकैप शेयरों में ‘शॉर्ट कवरिंग’ देखने को मिलेगी. प्रमुख फाइनेंशियल स्टॉक्स में अभी और ऊपर जाने की काफी गुंजाइश है.
आगे कैसा रह सकता है बाजार
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंद जेम्स के अनुसार, तकनीकी नजरिए से देखें तो निफ्टी 24,835 के स्तर पर मौजूद इंटरनल ट्रेंडलाइन की ओर बढ़ रहा है. हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर निफ्टी गिरकर 24,07924,130 के दायरे में आता है, तो यह फिर से 23,700 के स्तर तक आ सकता है.
SEBIरजिस्टर्ड ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थटेक फर्म ‘एनरिच मनी’ के CEO पोनमुडी आर. ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि निफ्टी 50 अपने 20दिन, 50दिन, 100दिन और 200दिन के EMA के काफी ऊपर आ गया है. यह इसके तकनीकी ढांचे में बड़े सुधार और तेजी के रुझान के मजबूत होने का संकेत है. उन्होंने बताया कि तत्काल रेजिस्टेंस 24,600 के आसपास है.
उन्होंने आगे कहा कि अगर निफ्टी इस स्तर के ऊपर मजबूती से बना रहता है, तो यह तेजी 24,800 से 25,000 के स्तर तक जा सकती है. “निचले स्तर पर, 24,40024,300 का दायरा तत्काल सपोर्ट ज़ोन बनाता है, और इसके बाद 24,000 पर एक अहम मनोवैज्ञानिक सपोर्ट स्तर है. मौजूदा सकारात्मक गति को बनाए रखने के लिए इन स्तरों से ऊपर टिके रहना जरूरी होगा.



