Satya Report: भारतीय रेलवे में यात्रा करने वाले करोड़ों लोगों के लिए टिकट कन्फर्म होना सबसे बड़ी चिंता होती है। खासकर त्योहारों और छुट्टियों के मौसम में वेटिंग लिस्ट तेजी से बढ़ जाती है और यात्रियों को समझ नहीं आता कि उनका टिकट कन्फर्म होगा या नहीं। कई बार लोग बिना जानकारी के टिकट बुक कर लेते हैं और बाद में निराशा हाथ लगती है। लेकिन अगर आपको वेटिंग लिस्ट के अलगअलग प्रकारों और उनकी प्राथमिकता के बारे में सही जानकारी हो, तो आप स्मार्ट तरीके से टिकट बुकिंग कर सकते हैं और कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ा सकते हैं। रेलवे ने वेटिंग टिकट को अलगअलग कैटेगरी में बांटा है, जैसे GNWL, RLWL, PQWL, RAC और TQWL। इन सभी की कन्फर्म होने की संभावना अलगअलग होती है। आइए जानते हैं कि इनमें से कौन सा टिकट सबसे पहले कन्फर्म होता है और किसमें सबसे ज्यादा जोखिम होता है।

- GNWL: जनरल वेटिंग लिस्ट को सबसे ज्यादा प्रायोरिटी दी जाती है। यह उन यात्रियों के लिए होता है जो ट्रेन के शुरुआती स्टेशन से अंतिम स्टेशन तक यात्रा करते हैं। ऐसे टिकट के कन्फर्म होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है, जो करीब 8090% तक मानी जाती है।
- RLWL: रिमोट लोकेशन वेटिंग लिस्ट उन यात्रियों के लिए होती है जो बीच के स्टेशनों से सफर करते हैं। इसमें कन्फर्म होने की संभावना GNWL से कम होती है, लेकिन फिर भी 4060% तक उम्मीद रहती है।
- PQWL: पूल कोटा वेटिंग लिस्ट आमतौर पर छोटी दूरी के यात्रियों के लिए होती है। इसमें टिकट कन्फर्म होने की संभावना काफी कम रहती है, जो करीब 2030% के आसपास होती है।
- RSWL: साइड वेटिंग लिस्ट उन स्टेशनों के लिए होती है जो ट्रेन के शुरुआती स्टेशन के पास होते हैं। इसमें कन्फर्म होने की संभावना बहुत कम यानी 1020% तक ही रहती है।
- TQWL: तत्काल वेटिंग लिस्ट में टिकट कन्फर्म होना लगभग नामुमकिन होता है। इसकी संभावना 010% के बीच होती है, क्योंकि यह आखिरी समय पर बुक किए गए टिकट होते हैं।
- RAC: इस टिकट में आपको पूरी सीट नहीं मिलती, लेकिन यात्रा करने का मौका जरूर मिलता है। इसमें साइड लोअर सीट शेयर करनी पड़ती है और बाद में फुल सीट मिलने की संभावना भी रहती है।
कैसे करें सही प्लानिंग?
अगर आप चाहते हैं कि आपका टिकट जल्दी कन्फर्म हो, तो कोशिश करें कि GNWL कैटेगरी में टिकट बुक करें। साथ ही, यात्रा की तारीख से पहले ही टिकट बुक करना बेहतर होता है।



