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Ganga Expressway बनेगा नया मैन्युफैक्चरिंग हब; 12 जिलों में 47,000 करोड़ का निवेश प्लान

Satya Report: उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास को एक साथ जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. गंगा एक्सप्रेसवे को अब एक्सप्रेसवेसहऔद्योगिक गलियारा मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अप्रैल को करेंगे. इस परियोजना के तहत 12 जिलों में औद्योगिक नोड्स विकसित होंगे और करीब 47,000 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा गया है, जिससे प्रदेश में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है.

Ganga Expressway बनेगा नया मैन्युफैक्चरिंग हब; 12 जिलों में 47,000 करोड़ का निवेश प्लान
Ganga Expressway बनेगा नया मैन्युफैक्चरिंग हब; 12 जिलों में 47,000 करोड़ का निवेश प्लान

उत्तर प्रदेश सरकार ने गंगा एक्सप्रेसवे को सिर्फ एक सड़क परियोजना तक सीमित नहीं रखते हुए इसे बड़े औद्योगिक हब में बदलने की रणनीति तैयार की है. सरकार इसे एक्सप्रेसवेसहऔद्योगिक गलियारा के रूप में विकसित कर रही है, जिससे प्रदेश में मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को नई दिशा मिलेगी.

करीब 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के किनारे 12 औद्योगिक नोड्स विकसित किए जाएंगे. उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण की योजना के तहत इसके लिए 6,507 एकड़ भूमि की पहचान की जा चुकी है. यह पूरा प्रोजेक्ट एकीकृत विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स क्लस्टर के रूप में तैयार किया जा रहा है, जिससे उद्योगों को बेहतर कनेक्टिविटी और सप्लाई चेन सपोर्ट मिलेगा.

12 जिले होंगे कवर

सरकार के मुताबिक अब तक इस परियोजना को लेकर 987 निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं, जिनसे लगभग 47,000 करोड़ का निवेश आने की संभावना है. यह औद्योगिक गलियारा मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जैसे 12 जिलों को कवर करेगा.

हर नोड को उसकी भौगोलिक स्थिति और औद्योगिक क्षमता के अनुसार डिजाइन किया गया है, ताकि मैन्युफैक्चरिंग, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स का संतुलित विकास हो सके. इससे न केवल औद्योगिक निवेश बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे. सरकार का मानना है कि यह परियोजना पूरे एक्सप्रेसवे को आर्थिक विकास बेल्ट में बदल देगी. खासतौर पर हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और प्रतापगढ़ जैसे जिलों में तेज औद्योगिक विकास देखने को मिल सकता है. यह पहल क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने और उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति देने में अहम भूमिका निभाएगी.

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