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Somvar Shiv Abhishek: महादेव को प्रसन्न करने के लिए सोमवार को इन चीजों से करें अभिषेक, टल जाएगा हर संकट

Satya Report: Mahadev Ko Kaise Prasann Kare : सोमवार का दिन हिन्दू धर्म में बड़ा पुण्यदायी बताया गया है। यह शुभ दिन देवाधिदेवशिव पूजा के लिए समर्पित है। हिन्दू धर्म ग्रथों में बताया गया है कि, इस दिन श्रद्धा और विधिविधान से शिव जी को एक लोटा जल मात्र चढ़ाने से भगवान भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते है और अपने भक्तों के सभी कष्ट दूर करते है और सभी मनोकामनाएं भी पूरी करते हैं।

Somvar Shiv Abhishek: महादेव को प्रसन्न करने के लिए सोमवार को इन चीजों से करें अभिषेक, टल जाएगा हर संकट
Somvar Shiv Abhishek: महादेव को प्रसन्न करने के लिए सोमवार को इन चीजों से करें अभिषेक, टल जाएगा हर संकट

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सोमवार का स्वामी चंद्रमा है और चंद्रमा को महादेव ने अपने मस्तक पर धारण किया हुआ है। इसीलिए माना जाता है कि जो भक्त सोमवार के दिन श्रद्धापूर्वक करते हैं, उनके जीवन के मानसिक तनाव, आर्थिक कष्ट और शत्रु बाधाएं दूर हो जाती हैं

महादेव को प्रसन्न करने का क्या है महाउपाय

  • कच्चा दूध अर्पित करें

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, देवाधिदेव को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग पर कच्चा दूध चढ़ाएं। इससे चंद्रमा मजबूत होता है और आरोग्य की प्राप्ति होती है।आप लंबे समय से किसी बीमारी से परेशान हैं या मानसिक शांति चाहते हैं, तो सोमवार को शिवलिंग पर कच्चा दूध चढ़ाएं। इससे चंद्रमा मजबूत होता है और आरोग्य की प्राप्ति होती है।

  • गन्ने का रस चढ़ाए

कहा जाता है कि, आर्थिक तंगी दूर करने के लिए गन्ने के रस से शिवलिंग का अभिषेक करना बहुत लाभकारी माना गया है। इससे लक्ष्मी की प्राप्ति होती है और घर में बरकत आती है।

  • गंगाजल और शहद चढ़ाए

कर्ज से मुक्ति और कारोबार में उन्नति के लिए गंगाजल में थोड़ा शहद मिलाकर महादेव का अभिषेक करें। इस उपाय को करने से सोई हुई किस्मत जाग उठती है।

  • शुद्ध देसी घी चढ़ाए

संतान सुख के लिए शिवलिंग पर शुद्ध देसी घी अर्पित करें। ऐसा करने से संतान से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।

  • चंदन का लेप लगाए

अगर आपका मन अशांत रहता है या बहुत गुस्सा आता है, तो सोमवार को शिवलिंग पर सफेद चंदन का लेप लगाएं। इससे सुखशांति की प्राप्ति होती है।

पूजा मंत्र

1. ॐ नमः शिवाय।।
2. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

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