Satya Report: उत्तर प्रदेश के अमरोहा और प्रतापगढ़ अपने खास फलों के लिए देशभर में मशहूर हैं. अमरोहा के रसीले आम और प्रतापगढ़ के औषधीय गुणों से भरपूर आंवले की अलग पहचान है. अब Ganga Expressway बनने से इन दोनों जिलों के किसानों और कारोबारियों को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है.

अमरोहा के आम की मिठास देशभर में मशहूर
अमरोहा के हसनपुर, गजरौला, नौगांवा सादात और मंडी धनौरा जैसे इलाके आम की खेती के बड़े केंद्र हैं. यहां दशहरी, चौसा, लंगड़ा, सफेदा और फजली जैसी किस्में बड़े पैमाने पर उगाई जाती हैं. गजरौला और हसनपुर की मंडियों से हर साल हजारों टन आम दिल्लीएनसीआर, मेरठ, जयपुर और लखनऊ तक भेजे जाते हैं.
स्थानीय कारोबारियों का मानना है कि एक्सप्रेसवे बनने से ट्रांसपोर्ट का समय कम होगा और जल्दी खराब होने वाले आम भी ताजा हालत में बड़े बाजारों तक पहुंच सकेंगे. इससे किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना है.
प्रतापगढ़ का आंवला: औषधीय गुणों से भरपूर
दूसरी ओर, प्रतापगढ़ का आंवला अपनी क्वालिटी और औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है. लालगंज, कुंडा, बाबागंज और सांगीपुर जैसे क्षेत्र इसके प्रमुख उत्पादन केंद्र हैं. यहां उगने वाला आंवला GI टैग प्राप्त कर चुका है और देशभर में इसकी मांग बनी रहती है. एनए7, एनए6, बनारसी और चकिया जैसी किस्में यहां बड़े पैमाने पर उगाई जाती हैं, जिनसे मुरब्बा, कैंडी, जूस, अचार और च्यवनप्राश जैसे उत्पाद तैयार होते हैं.
छोटे कारोबारियों को मिलेगा बड़ा फायदा
गंगा एक्सप्रेसवे बनने के बाद प्रतापगढ़ से लखनऊ, प्रयागराज और दिल्ली तक माल पहुंचाना आसान हो जाएगा. इससे छोटे और मध्यम स्तर के कारोबारियों को नए बाजार मिलेंगे और सप्लाई चेन मजबूत होगी.
कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों के मुताबिक बेहतर सड़क नेटवर्क से कोल्ड स्टोरेज, पैकेजिंग और फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को भी बढ़ावा मिलेगा. अमरोहा के आम और प्रतापगढ़ के आंवले अब बड़े रिटेल स्टोर्स और ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म तक तेजी से पहुंच सकेंगे. कुल मिलाकर, गंगा एक्सप्रेसवे इन दोनों जिलों के किसानों के लिए नई संभावनाओं के दरवाजे खोल सकता है और उनकी आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है.



