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CGHS का नया नियम अब माता-पिता या सास-ससुर में से किसी एक को ही मिलेगा मेडिकल लाभ!

CGHS : केंद्रीय कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर एक बेहद जरूरी अपडेट सामने आया है. नौकरीपेशा लोगों के लिए अपने परिवार का मेडिकल खर्च मैनेज करना एक बड़ी जिम्मेदारी होती है. ऐसे में केंद्र सरकार ने 13 मई 2026 को एक नया मेमोरेंडम जारी करके सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम से जुड़े कुछ नियमों की स्थिति बिल्कुल साफ कर दी है. यह नया आदेश मुख्य रूप से इस बात पर लागू होता है कि कर्मचारी अपने मेडिकल लाभ के लिए मातापिता या सासससुर में से किसे आश्रित मान सकते हैं.

CGHS का नया नियम अब माता-पिता या सास-ससुर में से किसी एक को ही मिलेगा मेडिकल लाभ!
CGHS का नया नियम अब माता-पिता या सास-ससुर में से किसी एक को ही मिलेगा मेडिकल लाभ!

फैसले का मिलेगा सिर्फ एक मौका

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक, पात्र कर्मचारी अब CGHS और CS नियमों के तहत अपने मातापिता या सासससुर को आश्रित परिवार के सदस्य के रूप में चुन सकते हैं. हालांकि, सरकार ने एक सख्त शर्त भी लगा दी है. पुरुष कर्मचारियों को यह विकल्प केवल एक बार चुनने की छूट मिलेगी.

इसका मतलब है कि अगर किसी कर्मचारी ने एक बार अपने मातापिता को आश्रित के रूप में चुन लिया, तो वह भविष्य में इसे बदलकर सासससुर के नाम पर नहीं कर सकता. यहां तक कि मातापिता के निधन जैसी दुखद परिस्थिति में भी इस फैसले को पलटा नहीं जा सकेगा. ठीक इसी तरह, सासससुर का चुनाव करने के बाद उसे वापस मातापिता के पक्ष में नहीं बदला जा सकता. यह व्यवस्था जुलाई 2023 के उस आदेश का विस्तार है, जिसमें महिला और पुरुष दोनों कर्मचारियों को यह विकल्प दिया गया था.

सैलरी के हिसाब से कटता है प्रीमियम

इस योजना का बेहतरीन लाभ उठाने के लिए कर्मचारियों के वेतन से हर महीने एक तय राशि काटी जाती है. यह मासिक कटौती सातवें वेतन आयोग के पेमैट्रिक्स लेवल पर निर्भर करती है.

  1. लेवल 1 से 5 तक के कर्मचारियों को हर महीने 250 रुपये का योगदान देना होता है.
  2. लेवल 6 वालों के लिए यह राशि 450 रुपये तय की गई है.
  3. लेवल 7 से 11 के बीच आने वाले कर्मचारियों की सैलरी से 650 रुपये काटे जाते हैं.
  4. लेवल 12 या उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए यह रकम 1,000 रुपये प्रति माह है.

परिवार की परिभाषा में कौन शामिल?

नियमों के तहत ‘परिवार’ की परिभाषा को भी पूरी तरह स्पष्ट किया गया है. इसमें पति या पत्नी के अलावा वे सदस्य आते हैं जो पूरी तरह से कर्मचारी पर निर्भर हैं. अमूमन इनका कर्मचारी के साथ ही रहना जरूरी है. इनमें मातापिता या सासससुर, बहनें, विधवा बहनें, विधवा बेटियां, नाबालिग भाईबहन और बच्चे शामिल हैं. बेटे को 25 वर्ष की आयु या उसकी शादी तक आश्रित माना जाता है. बेटी के मामले में शादी होने तक यह सुविधा मिलती है. आश्रित तलाकशुदा या अलग रहने वाली बेटियों के साथसाथ उनके नाबालिग बच्चों को भी योजना का हिस्सा माना गया है.

पेंशनर्स के पास मौजूद शानदार विकल्प

सरकार ने रिटायर हो चुके कर्मचारियों की जरूरतों को भी ध्यान में रखा है. CGHS कवरेज वाले इलाकों में रहने वाले पेंशनर अपना रजिस्ट्रेशन कराकर OPD और अस्पताल में भर्ती होने दोनों तरह की सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं. ऐसे पेंशनर्स को फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस नहीं मिलता.

जो पेंशनर गैरCGHS क्षेत्रों में रहते हैं, उनके पास कई विकल्प मौजूद हैं. वे चाहें तो हर महीने फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस ले सकते हैं. दूसरा विकल्प यह है कि वे पास के किसी CGHS शहर में रजिस्ट्रेशन कराकर इलाज की सुविधा ले लें, लेकिन तब उन्हें FMA छोड़ना होगा. इसके अलावा, एक बीच का रास्ता भी है. पेंशनर अपनी नियमित जांच के लिए FMA का चुनाव कर सकते हैं और अस्पताल में भर्ती होने के बड़े खर्चों के लिए CGHS सुविधा का लाभ ले सकते हैं.

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