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केरलम कांग्रेस में कलह! जानें क्यों पार्टी के फैसले से खफा हैं चेन्निथला

केरलम के नए मुख्यमंत्री वीडी सतीशन होंगे. आलाकमान के इस ऐलान से सतीशन के खेमें मेंं खुशी की लहर है तो वहीं केरल के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और महाराष्ट्र कांग्रेस प्रभारी रमेश चेन्निथला खफा हैं. वोसीएम ना बनाए जाने से खासा नाराज हैं.चेन्निथला के करीबियों के मुताबिक, 2011 में बतौर अध्यक्ष सरकार बनी तो ओमन चांडी को वरिष्ठ बताकर सीएम बनाया गया. तब उन्होंने आलाकमान के फैसले को माना.

केरलम कांग्रेस में कलह! जानें क्यों पार्टी के फैसले से खफा हैं चेन्निथला
केरलम कांग्रेस में कलह! जानें क्यों पार्टी के फैसले से खफा हैं चेन्निथला

चेन्निथला के करीबियों के मुताबिक, अब उनकी वरिष्ठता को उम्रदराज माना गया. आलाकमान के प्रति लॉयल्टी दिखाते हुए उन्होंने अपना समर्थन पत्र तो पर्यवेक्षकों तक पहुंचा दिया लेकिन ना उनसे मिले और ना ही बैठक में गए. रमेश चेन्निथला की नाराजगी से इतर आइए जानते हैं कि कैसे सतीशन ने कम विधायकों के समर्थन के बावजूद पूरी बाजी पलट दी और उन्होंने इस रेस में केसी वेणुगोपाल को भी पछाड़ दिया.

सतीशन की सबसे बड़ी ताकत

दरअसल, सतीशन की सबसे बड़ी ताकत उनकी जमीनी छवि है. पार्टी के भीतर हुए फीडबैक और सर्वे में साफ संकेत मिले कि कार्यकर्ताओं और आम समर्थकों के बीच सतीशन की लोकप्रियता काफी ज्यादा है. हालांकि संख्याबल वेणुगोपाल के पक्ष में दिख रहा था लेकिन सतीशन ने हाईकमान को समझाया कि वेणुगोपाल संगठन महासचिव रहते हुए अपने करीबी नेताओं को टिकट दिलाने और चुनावी मदद पहुंचाने में सफल रहे थे. इसलिए स्वाभाविक था कि जीतकर आए विधायक उन्हीं के साथ खड़े दिखें.

आलाकमान को यह तर्क काफी हद तक सही लगा. इसके साथ ही सतीशन ने शुरुआत से ही साफ कर दिया था कि वो किसी भी हालत में वेणुगोपाल के नेतृत्व में काम नहीं करेंगे. वो मुख्यमंत्री पद से कम पर समझौते को तैयार नहीं थे. यहां तक कि उन्होंने यह संकेत भी दे दिया था अगर वेणुगोपाल का नाम आगे बढ़ाया गया तो वे उनका प्रस्ताव तक नहीं रखेंगे.

कांग्रेस को इस बात का था डर

कांग्रेस नेतृत्व को डर था, अगर सतीशन नाराज हुए तो पार्टी के भीतर गंभीर टूट पैदा हो सकती है. काफी कोशिशों के बावजूद जब सतीशन नहीं माने तब राहुल गांधी को महसूस हुआ कि मामला सिर्फ नेतृत्व का नहीं बल्कि संगठन बचाने का भी है. फिर जब कोई रास्ता निकलता नहीं दिखा तो राहुल ने बुधवार शाम मल्लिकार्जुन खरगे से लंबी चर्चा की और राहुल ने वेणुगोपाल को अपने आवास बुलाया.

यहीं उनकी सबसे बड़ी ताकत उलटी पड़ गई. राहुल ने उनसे कहा कि संगठन महासचिव के तौर पर उनकी भूमिका पार्टी के लिए ज्यादा अहम है. आगे चलकर पार्टी अध्यक्ष पद जैसी बड़ी जिम्मेदारी भी उनके सामने हो सकती है. फिलहाल पार्टी को एकजुट रखने के लिए उन्हें त्याग करना होगा. इसके बाद वेणुगोपाल ने भारी मन से सतीशन के नाम पर सहमति दी.

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