Satya Report: Astrology Tips: अगर आपको भाग्य का साथ नहीं मिल रहा। बनतेबनते भी आपकी बात बिगड़ जाती है तो इसका कारण भाग्य के स्वामी का खराब होना हो सकता है। आपके भाग्य का निर्धारण दो ग्रह करते हैं। अगर आप इन दोनों को ठीक कर दें तो आपको जीवन में सफलता भी मिलती है और आपके भाग्य का सितारा भी चमकता है, आज हम आपको इस बारे में विस्तार से जानकारी देने जा रहे हैं।

भाग्य भाव का स्वामी
कुंडली के नवम भाव को भाग्य का भाव कहा जाता है। इसके बारे में आप आसानी से पता कर सकते हैं। अपनी कुंडली देखें और उसमें नवम भाव को पहचानें। नीचे दी गई तस्वीर में नवम भाव को बताया गया है। इस भाव में भले ही कोई भी संख्या लिखी हो नवम भाव यही होगा। इस भाव में जो नंबर लिखा है उस राशि और उसके स्वामी का पता आप आसानी से कर सकते हैं। उदाहरण के लिए अगर नवम भाव में 1 लिखा है तो राशि होगी मेष और उसका स्वामी मंगल। यानि भाग्य भाव को मजबूत करने के लिए आपको मंगल के उपाय करने हैं। इसी तरह भाग्य भाव में कोई भी नंबर हो सकता है 1 से 12 तक। राशि को जानें और उसके स्वामी को जानें और फिर राशि के स्वामी से जुड़े उपाय आपको करने हैं। ऐसा करने से निश्चित ही भाग्य आपका साथ देने लगेगा।
गुरु को करें मजबूत
नवम भाव का कारक ग्रह गुरु को माना जाता है, आपको बता दें कि कारक ग्रह और स्वामी ग्रह दोनों अलग अलग होते हैं। हर व्यक्ति की कुंडली में भाग्य भाव का स्वामी अलगअलग होगा लेकिन कारक ग्रह गुरु ही रहेगा। अगर आप गुरु को मजबूत कर देते हैं तो तब भी भाग्य आपको मदद करने लगता है। आपको कम मेहनत में ही अच्छे परिणाम मिलने लग जाते हैं। गुरु को मजबूत करने के लिए आपको गुरु के उपाय करने चाहिए जिनके बारे में नीचे बताया गया है
- पीले रंग के कपड़े और खाद्य पदार्थ दान करें।
- मातापिता और गुरुजनों का सम्मान करें।
- गुरु ग्रह के मंत्र ‘ॐ बृं बृहस्पतये नमः’ का प्रतिदिन जप करें। कम से कम 11 बार।
- गुरुवार के दिन पीले कपड़े पहनें।
- गुरुवार का व्रत रखें और इस दिन केला खाने से बचें।
- योग और ध्यान का अभ्यास करें।
- धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन करें और साथ ही इनका दान भी करें।
निष्कर्ष
अगर आप नवम भाव के स्वामी को मजबूत करते हैं और साथ ही नवम भाव के कारक ग्रह गुरु को मजबूत करते हैं तो भाग्य आपका साथ देना शुरू कर देता है। ऐसा करने से आपको जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अच्छे परिणाम मिलने शुरू हो जाते हैं। आपको सामाजिक स्तर पर मानसम्मान भी मिलता है और साथ ही आपको धनधान्य की प्राप्ति भी होती है। वहीं अगर आप नवम भाव के स्वामी और गुरु ग्रह के विपरीत काम करते हैं तो आपका भाग्य रूठ सकता है।



