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​Barabanki Flood: सरयू की लहरों में समाई 150 साल पुरानी मस्जिद… अब 1100 साल पुराने मंदिर पर मंडराया खतरा

​Barabanki Flood:  सरयू की लहरों में समाई 150 साल पुरानी मस्जिद… अब 1100 साल पुराने मंदिर पर मंडराया खतरा

बाराबंकी। सरयूघाघरा नदी का जलस्तर और तेज बहाव बाराबंकी के सूरतगंज ब्लॉक क्षेत्र में तबाही मचा रहा है। लगातार बारिश के बीच नदी किनारे की जमीन तेजी से कट रही है। कई परिवार घरों से सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं। इसी कटान की चपेट में आकर करीब डेढ़ सौ साल पुरानी मस्जिद नदी में समा गई। अब लगभग 1100 साल पुराने बाबा नारायण दास मंदिर पर भी खतरा मंडरा रहा है।

ग्रामीणों के मुताबिक, कटान मंदिर के बेहद करीब पहुंच गई है। उनका कहना है कि यदि नदी की रफ्तार इसी तरह बनी रही तो आसपास के बचे हुए घरों के साथ मंदिर को भी नुकसान पहुंच सकता है। स्थानीय मान्यता है कि सरयू का जलस्तर बढ़ने पर भी नदी की लहरें मंदिर को छूकर लौट जाती थीं, लेकिन इस बार हालात चिंताजनक बने हुए हैं।

40 से 50 घर और कई धार्मिक स्थल नदी में समाए

एक स्थानीय बुजुर्ग ने आईएएनएस से बातचीत में आरोप लगाया कि प्रशासन ने पहले बचाव कार्य शुरू कराया था, लेकिन करीब एक सप्ताह तक काम बंद रहा। उनके मुताबिक, यदि उस दौरान काम जारी रहता तो मंदिर पर खतरा कम हो सकता था।

बुजुर्ग ने बताया कि अब तक 40 से 50 घर नदी में समा चुके हैं। उनके अनुसार, एक हनुमान मंदिर, एक शिव मंदिर और एक मस्जिद भी कटान की चपेट में आ चुके हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिला प्रशासन से बाबा नारायण दास मंदिर को बचाने की अपील की।

मस्जिद के बाद मंदिर बचाने की दुआ

ग्रामीणों के मुताबिक, मंदिर और मस्जिद करीब 20 मीटर की दूरी पर स्थित हैं। मस्जिद के नदी में समाने के बाद मुस्लिम समुदाय के लोग अब मंदिर की सलामती की दुआ कर रहे हैं। वहीं, एक हिंदू बुजुर्ग ने मस्जिद के नदी में समा जाने पर दुख जताया।

हाफिज मोहम्मद सादाब ने आईएएनएस से कहा कि मस्जिद और मंदिर दोनों काफी पुराने थे। उन्होंने बताया कि बाढ़ के कारण मस्जिद नदी में समा चुकी है और अब वे दुआ कर रहे हैं कि मंदिर सुरक्षित रहे।

प्रशासन और बाढ़ खंड की टीमें बचाव में जुटीं

कटान प्रभावित क्षेत्र में एसडीएम रामनगर आकांक्षा गुप्ता और तहसीलदार विपुल सिंह कई दिनों से बचाव कार्य करा रहे हैं। प्रशासन की कोशिश है कि नदी की धारा में बचे हुए घरों और महत्वपूर्ण स्थलों को समाने से बचाया जा सके।

महंत अजय दास ने बताया कि यहां कटान करीब 10 से 12 दिन पहले शुरू हुई थी। बीच में नदी का जलस्तर घटा था, लेकिन दोबारा बढ़ने के बाद कटान तेज हो गई। उनके मुताबिक, कई घर और एक मस्जिद नदी में समा चुके हैं तथा नदी का पानी बाबा नारायण दास मंदिर तक पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि प्रशासन की टीम मौके पर काम कर रही है।

बैराजों से छोड़े जा रहे पानी से बढ़ा नदी का जलस्तर

बाराबंकी बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता शशिकांत सिंह ने बताया कि गिरजा बैराज से तीन लाख और शारदा बैराज से 1.57 लाख का डिस्चार्ज पास हो रहा है। उनके मुताबिक, इससे घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ा है और नदी इस समय पूरी गति से बह रही है।

शशिकांत सिंह ने बताया कि वह पिछले एक सप्ताह से कर्मचारियों और अन्य अधिकारियों के साथ मंदिर को कटान से बचाने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास कर रहे हैं। फिलहाल नदी किनारे बचाव कार्य जारी है।

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