
रामसनेहीघाट/रामनगर/बाराबंकी, अमृत विचार। सरयू नदी ने एक बार फिर करवट ली और लाल निशान के करीब पहुंच गई है। जलस्तर एक सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा। उधर रामसनेहीघाट क्षेत्र में बाढ़ के पानी ने गुनौली गांव को घेर लिया। कई घरों में पानी भर गया और गांव में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। प्रशासन ने राहत सामग्री पहुंचाने का दावा किया है।
मंगलवार की शाम पांच बजे सरयू नदी का जलस्तर 106.020 दर्ज किया गया जो लाल निशान से महज पांच इंच दूरी पर है। जल आयोग के अनुसार नदी एक सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही है। उधर विकास खंड बनीकोडर क्षेत्र के गुनौली गांव में बाढ़ के हालात हैं। गांव के संपर्क मार्ग जलमग्न होने से आवागमन प्रभावित है। कई परिवार सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को विवश हैं।
पीड़ित नंदलाल निषाद, शालिग्राम निषाद, तुलसीराम निषाद, राम सजीवन गौतम, शीतला प्रसाद गौतम आदि ने बताया कि बाढ़ का पानी घरों में घुस गया है। चारों और पानी से मकान घिर गए हैं। रास्तों पर निकलना मुश्किल है और हर तरफ पानी फैला होने से जहरीले जंतुओं का खतरा तो है ही साथ ही घरों में चूल्हे नहीं जल पा रहे। ग्रामीणों का गांव से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। आवश्यक कार्यों के लिए प्रशासन की नाव ही एकमात्र सहारा है।
स्थिति को देखते हुए एसडीएम बृजेन्द्र उपाध्याय और तहसीलदार शशांक नाथ उपाध्याय के निर्देशन में राजस्व विभाग की टीमें क्षेत्र में सक्रिय हो गईं। दावा है कि प्रभावित परिवारों में राहत सामग्री वितरित की जा रही। क्षेत्र में नावों की व्यवस्था कर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। बताया गया कि जलस्तर पर नजर बनी है। दोबारा पानी बढ़ता है तो अतिरिक्त राहत एवं बचाव संसाधन तत्काल उपलब्ध कराए जाएंगे।
घंटों बरसे बदरा, आमजन को राहत, किसान निहाल
मंगलवार की भोर से दोपहर तक हुई बारिश ने एक ओर मौसम सुहाना कर दिया तो दूसरी ओर किसानों के मायूस चेहरों पर मुस्कान ला दी। लगातार बारिश से शहरवासी कीचड़, जलभराव आदि दुश्वारियों से जूझे तो बारिश के बीच खेतों तक पहुंचे किसान आगे की तैयारी में जुट गए। हालांकि दोपहर बाद खिला धूप से उमस फिर हावी होती दिखी। एक सप्ताह से भी अधिक समय से आसमान पर उमड़ घुमड़ रहे बादल बिन बरसे निकलते रहे।
बारिश न होने से एक ओर उमस के कहर से आमजन परेशान रहे और निराशा का माहौल रहा तो दूसरी तरफ अन्नदाता खासा बेहाल रहा। खेत में धान की फसल पर सूखे का असर पड़ता देख किसान चिंतित हो उठा। शहर से लेकर गांव तक बारिश की जोरदार जरूरत महसूस की गई लेकिन बादल केवल आस बंधाते सफर करते रहे। मामूली बारिश किसी काम नहीं आई। हालांकि मंगलवार सुबह लोगों की आंख खुली तो नजारा बदला हुआ था। आसमान पर छाए बादल भाेर से ही बरसना शुरु हाे गए।
तेज धीमी बारिश ने एकबारगी उमस को पछाड़ दिया और माहाैल खुशनुमा कर दिया। कई घंटे की बारिश के बाद भले ही शहर के कई इलाके व मुख्य मार्ग जलमग्न हुए, नाले नालियां उफना गईं और सड़कों पर कीचड़ के बीच लोगों को गुजरना पड़ा, इसके बावजूद बारिश आमजन के चेहरे खिला गई। सबसे बड़ी राहत किसानों को मिली। बारिश के बाद खेत भरने से धान को आगे बढ़ने में काफी मदद मिली है। खासकर बारिश के सहारे रहे किसान की मुराद पूरी हो गई।



