आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉक्टर जैन ने बताया अगर आपको अक्सर मुंह में छाले रहते हैं तो आप डॉक्टर को दिखाएं। कुछ घरेलू नुस्खे छालों को कंट्रोल करने में मददगार साबित हो सकते हैं।

मुंह के छाले और जीभ पर जमने वाली सफेद परत न केवल खाने-पीने में तकलीफ देती है, बल्कि यह आपके खराब पाचन और खराब ओरल हेल्थ की ओर भी इशारा करती है। मुंह में छाले होने के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं जैसे पेट खराब रहना या पाचन तंत्र में गड़बड़ी होना, शरीर में ज्यादा गर्मी होना या पित्त बढ़ना, विटामिन B12, आयरन या फोलिक एसिड की कमी, ज्यादा मसालेदार, तला-भुना या खट्टा खाना, बार-बार चाय, कॉफी या गर्म चीजों का सेवन, मुंह की साफ-सफाई का ध्यान न रखना, तनाव और नींद की कमी,गलती से गाल या जीभ कट जाना, हार्मोनल बदलाव और कमजोर इम्यूनिटी की वजह से मुंह में छालें हो सकते हैं। अगर छाले बार-बार हों या लंबे समय तक ठीक न हों, तो डॉक्टर से जांच जरूर करानी चाहिए।
आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉक्टर रूपाली जैन ने बताया अगर आपको अक्सर मुंह में छाले रहते हैं तो आप डॉक्टर को दिखाएं। कुछ घरेलू नुस्खे छालों को कंट्रोल करने में मददगार साबित हो सकते हैं। डॉक्टर रूपाली ने बताया आयुर्वेद में बरगद के पेड़ को अक्षयवट कहा गया है, जिसकी पत्तियों में एंटी-बैक्टीरियल और हीलिंग गुण होते हैं जो छालों की जलन और जीभी की सफेद परत को कंट्रोल करते हैं। इन पत्तों को पानी में पकाकर अगर गरारा किया जाए तो छालों को आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है। आइए आयुर्वेदिक डॉक्टर से जानते हैं इन छालों के पीछे की असली वजह और बरगद के पत्तों के इस्तेमाल का सही और सुरक्षित तरीका।
मुंह में छाले होने का कारण
बार-बार मुंह में छाले और सफेद परत जमना, छालों में जलन और रेडनेस कफ और पित्त दोष के बिगड़ने की वजह से होती है। जब शरीर में पित्त बढ़ता है, तो मुंह में जलन, छाले और रेडनेस जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। वहीं कफ बढ़ने पर जीभ पर सफेद परत जमने लगती है। यह स्थिति पाचन की गड़बड़ी और शरीर में टॉक्सिन्स बढ़ने का संकेत भी हो सकती है।
आयुर्वेदिक उपाय कैसे छालों का करते हैं इलाज?
एक्सपर्ट के मुताबिक छालों की समस्या से राहत पाने के लिए बरगद के पत्तों को पानी में पकाकर गरारे करने से आपको फायदा होगा। यह उपाय मुंह के छालों को कम करने में मदद करता है और जीभ पर जमी सफेद परत को साफ करने में भी असरदार माना जाता है। बरगद के पत्तों में मौजूद गुण मुंह की जलन को शांत करने और बैक्टीरिया को कम करने में मददगार होते हैं। आयुर्वेद में बरगद का पेड़ के पत्तों को औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है। इसकी तासीर ठंडी और कसैली होती है, जो मुंह के छालों में राहत देने में मदद करती है।
बरगद का पानी कैसे करें तैयार
लगभग आधा लीटर पानी लें और उसमें 2–3 बरगद के पत्ते डालें। पत्तों को हल्का तोड़कर पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाए, तो इसे छान लें। इस पानी से गरारा करें आपको फायदा होगा।
कितने दिन करें?
बेहतर परिणाम के लिए इस उपाय को कम से कम एक हफ्ते तक नियमित रूप से करना चाहिए।
डिस्क्लेमर
यदि छाले 2 सप्ताह से अधिक समय तक बने रहते हैं, तो बिना देरी किए विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच कराएं, क्योंकि यह ओरल इन्फेक्शन या किसी अन्य गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है। यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।



