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बृजभूषण शरण सिंह बरी, सियासी राह खुली, अब राजनीति में वापसी का क्या है विकल्प?

महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से बरी होने के बाद भाजपा नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में वह फिर सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं. संगठन में बड़ी जिम्मेदारी, राज्यसभा या चुनावी राजनीति में वापसी जैसे कई विकल्प उनके सामने हैं.

बृजभूषण शरण सिंह बरी, सियासी राह खुली, अब राजनीति में वापसी का क्या है विकल्प?

लंबे समय तक भारतीय कुश्ती महासंघ में अपना दबदबा बनाकर रखने वाले बृजभूषण शरण सिंह को पहलवानों की तरफ से लगाए आरोपों से राहत मिल गई है. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह को बरी कर दिया है. इस मामले में फैसले के वक्त बृजभूषण खुद कोर्ट पहुंचे थे. कोर्ट के फैसले के बाद उन्होंने कहा कि यह फैसला सत्य की जीत है. वहीं अब बरी होने के बाद बृजभूषण शरण सिंह की सक्रिय राजनीति में वापसी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है.

महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न का आरोप

दरअसल, बृजभूषण शरण सिंह पर महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न का आरोप लगने के बाद उनसे भारतीय कुश्ती महासंघ का अध्यक्ष पद छीन लिया गया था. इसके अलावा 2024 के लोकसभा चुनावों में उनके टिकट भी भारतीय जनता पार्टी ने काट दिया था. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके सामने अब कई रास्ते खुले हैं.

विधानसभा चुनाव में निभाएंगे बड़ी भूमिका?

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर तैयारियां तेज हो चुकी हैं. ऐसे में अब माना जा रहा है कि बृजभूषण शरण सिंह इस चुनाव में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं. बता दें कि गोंडा सदर विधानसभा सीट से उनके बेटे प्रतीक भूषण शरण सिंह बीजेपी से विधायक हैं. सियासी गलियारों में चर्चा है कि बृजभूषण कैसरगंज विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतर सकते हैं. फिलहाल इस सीट पर सपा का विधायक है. बीजेपी इस सीट को जीतने के लिए बृजभूषण को उम्मीदवार बना सकती है.

लोकसभा चुनाव लड़ने की संभावना

बता दें कि बृजभूषण छह बार सांसद रह चुके हैं. उन्होंने लंबे समय तक कैसरगंज लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है. इसलिए भविष्य में लोकसभा चुनाव लड़ने की संभावना को भी खारिज नहीं किया जा सकता. हालांकि कैसरगंज सीट पर वर्तमान में उनके बेटे करण भूषण शरण सिंह सांसद हैं. हालांकि बृजभूषण के करीबी लोगों का मानना है कि वो दोबारा कैसरगंज सीट पर चुनाव लड़ने के पक्ष में नहीं हैं, क्योंकि ऐसा करने पर बेटे का सियासी भविष्य प्रभावित हो सकता है.

संगठन में मिल सकती है महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि बृजभूषण के लंबे अनुभव और पूर्वांचल में उनके प्रभाव को देखते हुए उन्हें संगठन में कोई बड़ी जिम्मेदारी भी दे सकती है. हालांकि अंतिम निर्णय तो बीजेपी नेतृत्व की सियासी रणनीति, आगामी चुनावों की जरूरत और संगठनात्मक समीकरणों पर निर्भर करेगा. अगर बीजेपी चाहे तो उन्हें प्रदेश या राष्ट्रीय स्तर पर संगठन में बड़ी भूमिका दे सकती है.

राज्यसभा भेजना भी एक बड़ा विकल्प

संभावना यह भी जताई जा रही है कि अगर बीजेपी उन्हें भविष्य में राज्यसभा भेजने पर भी विचार कर सकती है. हालांकि अभी तक पार्टी की ओर से कोई संकेत नहीं दिया गया है. हालांकि राज्यसभा को लेकर एक दिक्कत यह भी है कि बीजेपी एक ही परिवार में कितने लोगों को पद देगी?

समाजवादी पार्टी में जाने की भी चर्चा

कई बार बृजभूषण के बयानों को देखते हुए राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें भी लगती हैं कि वह समाजवादी पार्टी में जा सकते हैं. हालांकि न तो कभी बृजभूषण शरण सिंह ने और न ही सपा की तरफ से ऐसी किसी भी संभावना की पुष्टि की गई है.

पूर्वांचल में मजबूत जनाधार

बृजभूषण का प्रभाव आसपास की गोंडा, कैसरगंज, बलरामपुर समेत कम से कम पांच लोकसभा सीटों पर माना जाता है. इसके अलावा बृजभूषण की पत्नी केतकी देवी सिंह भी पंचायत अध्यक्ष रही हैं. केतकी गोंडा सीट से लोकसभा सांसद भी रह चुकी हैं. बृजभूषण के बेटे प्रतीक भूषण सिंह गोंडा सदर विधानसभा सीट से विधायक हैं. वहीं, कैसरगंज सीट से उनके बेटे करण भूषण सिंह सांसद हैं.

माना जाता है कि बृजभूषण का गोंडा, बहराइच, डुमरियागंज, कैसरगंज और श्रावस्ती जिलों में टिकट बंटवारे में दबदबा रहता है. स्थानीय नेता तो यहां तक दावा करते हैं कि उन्हें जीतने के लिए किसी के मदद की जरूरत नहीं, बल्कि हर पार्टी उन्हें खुद ही टिकट देना चाहती है.

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