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‘जीएसटी काउंसिल की बैठक में कारोबारियों: को मिलेगी राहत: इनपुट टैक्स क्रेडिट और रजिस्ट्रेशन नियमों में होगा बड़ा बदलाव

7 अक्टूबर को होगी जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक, कारोबारियों को मिल सकती है बड़ी राहत।

इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के मौजूदा नियमों में संशोधन पर विशेष रूप से विचार किया जाएगा।

ई-वे बिल और जीएसटी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और आसान बनाया जाएगा।

पिछले साल हुए टैक्स स्लैब बदलावों के असर और उसके फायदों की भी होगी समीक्षा।

करोबारी जगत की नजरें आगामी जीएसटी काउंसिल की बैठक पर टिकी

देशभर के व्यापारियों और कारोबारियों लंबे समय से कर प्रणाली में कुछेक व्यावहारिक सुधारों की मांग कर रहे थे। इसी कड़ी में अब वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी काउंसिल की आगामी बैठक को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। आगामी 7 अक्टूबर को प्रस्तावित इस उच्चस्तरीय बैठक में कई महत्वपूर्ण एजेंडों पर मुहर लग सकती है। हालांकि यह बैठक पहले सितंबर महीने के मध्य में आयोजित होनी थी, लेकिन वैश्विक सम्मेलनों और प्रशासनिक व्यस्तताओं के चलते इसकी तारीखों में बदलाव करना पड़ा था। अब वित्त मंत्रालय और काउंसिल के शीर्ष अधिकारियों के बीच बैठकों का दौर शुरू हो चुका है, जिसमें मुख्य फोकस व्यापारिक सुगमता को बढ़ावा देने पर है।

पिछले वर्ष सितंबर माह के दौरान कर दरों में बड़े स्तर पर फेरबदल किए गए थे, जिससे आम उपभोक्ताओं को महंगाई के मोर्चे पर काफी राहत मिली थी। उस समय सरकार ने कई जरूरी उपभोग की वस्तुओं पर कर का बोझ कम किया था। अब जबकि आम जनता को कुछ हद तक राहत मिल चुकी है, तो पूरा ध्यान व्यापारिक समुदाय की उन दिक्कतों को दूर करने पर है जो रोजाना के कारोबार में बाधा बनती हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि काउंसिल इन प्रस्तावों को हरी झंडी दिखाती है, तो देश के लघु और मध्यम उद्योगों को सबसे बड़ा फायदा पहुंचेगा।

इनपुट टैक्स क्रेडिट के नियमों में हो सकता है बड़ा संशोधन

जीएसटी व्यवस्था के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी आईटीसी से जुड़े प्रावधान हमेशा से ही व्यापारियों के लिए चर्चा का केंद्र रहे हैं। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, यदि कोई खरीदार व्यापारी अपने स्तर पर समय से टैक्स रिटर्न दाखिल भी कर देता है, तब भी उसे आईटीसी का लाभ मिलने में तकनीकी अड़चनें आ जाती हैं यदि विक्रेता ने अपना रिटर्न समय पर जमा नहीं किया है। कई मामलों में किसी तीसरे कारोबारी की गलती या धोखाधड़ी का खामियाजा ईमानदार खरीदार को भुगतना पड़ता है, जिससे उनका कार्यशील पूंजी प्रवाह यानी वर्किंग कैपिटल बुरी तरह प्रभावित होता है।

व्यापारी संघों की लंबे समय से यह शिकायत रही है कि कुछेक लोगों की गड़बड़ी की सजा पूरे व्यापारिक समुदाय को नहीं मिलनी चाहिए। इसी जमीनी हकीकत को ध्यान में रखते हुए सरकार और काउंसिल के नुमाइंदे अब नियमों को अधिक व्यावहारिक बनाने पर विचार कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि नए बदलावों के लागू होने से उन ईमानदार कारोबारियों को बड़ी राहत मिलेगी जो सिर्फ तकनीकी विसंगतियों की वजह से अपने रिफंड या क्रेडिट के लिए महीनों चक्कर काटने को मजबूर होते हैं।

रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया और ई-वे बिल के नियमों का सरलीकरण

करोबारियों को नए जीएसटी पंजीकरण के दौरान आने वाली कागजी बाधाओं और तकनीकी जटिलताओं को दूर करने के लिए भी रूपरेखा तैयार की जा रही है। शुरुआती दौर में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया थोड़ी लंबी और जटिल मानी जाती है, जिससे नए स्टार्टअप्स और छोटे कारोबारियों को दिक्कतें पेश आती हैं। काउंसिल की इस बैठक में प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल, तेज और कागजी औपचारिकताओं से मुक्त करने पर मंथन होगा ताकि कोई भी नया उद्यमी बिना किसी अनावश्यक परेशानी के अपना कारोबार शुरू कर सके।

इसके साथ ही, एक राज्य से दूसरे राज्य या राज्य के भीतर ही माल की ढुलाई के लिए अनिवार्य ई-वे बिल से जुड़े प्रावधानों की भी समीक्षा की जा रही है। परिवहन के दौरान आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों को कम करने के लिए ई-वे बिल की प्रक्रिया को और अधिक लचीला और आधुनिक बनाया जा सकता है। इससे न केवल माल की आवाजाही तेज होगी बल्कि लॉजिस्टिक्स लागत में भी कमी आएगी, जिसका सीधा लाभ अंततः उपभोक्ताओं और उद्योगों दोनों को मिलेगा।

पिछले बदलावों के प्रभावों की समीक्षा और भविष्य की दिशा

यह बैठक केवल नए नियमों को बनाने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि पिछले साल जीएसटी स्लैब में किए गए ऐतिहासिक बदलावों के जमीनी नतीजों का भी लेखा-जोखा तैयार किया जाएगा। मंत्रालय यह आकलन करेगा कि दरों में कमी का जो फायदा आम जनता तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था, वह वास्तविक बाजार में कहां तक सफल रहा है। इसके साथ ही, कर चोरी रोकने के लिए उठाए जा रहे तकनीकी कदमों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ऑडिट टूर्स के परिणामों पर भी चर्चा की जाएगी।

कारोबार जगत को उम्मीद है कि यह बैठक देश की अर्थव्यवस्था को गति देने में एक मील का पत्थर साबित होगी। अनुपालन का बोझ कम होने से व्यापारिक विश्वास बढ़ेगा और देश में निवेश के अनुकूल माहौल को और अधिक मजबूती मिलेगी। आगामी 7 अक्टूबर को होने वाले इन फैसलों पर अब देश भर के लाखों व्यापारियों की निगाहें टिकी हुई हैं।

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