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Champat Rai: राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच चंपत राय का बड़ा फैसला, अयोध्या में 4 महीने की चातुर्मास साधना शुरू

Champat Rai: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में इस्तीफा देने के बाद एक बड़ा आध्यात्मिक निर्णय लिया है। देवशयनी एकादशी के अवसर पर उन्होंने अयोध्या में चार महीने की चातुर्मास साधना शुरू कर दी है। यह साधना 21 नवंबर, देवोत्थान एकादशी तक चलेगी।

Champat Rai: राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच चंपत राय का बड़ा फैसला, अयोध्या में 4 महीने की चातुर्मास साधना शुरू

क्या है पूरा मामला 

बताया जा रहा है कि चंपत राय इस पूरे अवधि के दौरान अयोध्या से बाहर नहीं जाएंगे। वह रामकोट स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट भवन में रहकर राम मंत्र का जप, रामचरितमानस का पाठ और ध्यान करेंगे। इसके साथ ही वह प्रतिदिन करीब छह घंटे का मौन व्रत भी रख रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, चंपत राय 7 जून से ही ट्रस्ट भवन में एकांतवास कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने अपनी दिनचर्या को पूरी तरह आध्यात्मिक साधना के अनुरूप बना लिया है। सीमित लोगों से मुलाकात, सात्विक भोजन और नियमित पूजापाठ उनकी दिनचर्या का हिस्सा है।

हिंदू धर्म में चातुर्मास को तप, संयम, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक उन्नति का विशेष समय माना जाता है। ऐसे में चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच और एसआईटी की कार्रवाई के बीच चंपत राय के इस फैसले ने अयोध्या के धार्मिक और सामाजिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। फिलहाल लोग उनके इस कदम को अलगअलग नजरिए से देख रहे हैं। 

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चंपत राय को मिला नेताओं का समर्थन

इस बीच चंपत राय को जनप्रतिनिधियों का भी खुला समर्थन मिलता नजर आ रहा है। हाल ही में अयोध्या जिले के पांचों विधायक—वेद प्रकाश गुप्ता, रामचंद्र यादव, चंद्रभानु पासवान, डॉ. अमित सिंह चौहान और अभय सिंह—ने तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट भवन पहुंचकर उनसे मुलाकात की। इस दौरान महापौर गिरीशपति त्रिपाठी और जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि रोहित सिंह भी मौजूद रहे।

मुलाकात के दौरान जनप्रतिनिधियों ने चंपत राय का हालचाल जाना और पूरे घटनाक्रम पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि एसआईटी की जांच अंतिम चरण में है और रिपोर्ट आने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी भी तरह के निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। उधर, चंपत राय से लगातार हो रही मुलाकातों को भी खास संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। सबसे पहले अयोध्या के व्यापारियों का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिला था। इसके बाद रामनगरी के कई साधुसंतों ने भी उनसे भेंट कर सार्वजनिक रूप से अपना समर्थन जताया और उन्हें पूरे मामले में निर्दोष बताया। 

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