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करेंसी बाजार में मचा कोहराम, डॉलर के सामने में रुपए में रिकॉर्ड गिरावट

बीते करीब 3 हफ्तों में डॉलर के सामने रुपए में करीब 3 रुपए की गिरावट देखे को मिल चुकी है. करेंसी मार्केट में बीते कुछ सालों में इतने कम समय में इतनी बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिली. आंकड़ों को देखें तो 17 अप्रैल को आरबीआई के प्रयासों से रुपए 92 के लेवल पर देखने को मिला था, जो बढ़कर 95.50 के लेवल के करीब पहुंचकर लाइफ टाइम लोअर लेवल पर आ गया है.

करेंसी बाजार में मचा कोहराम, डॉलर के सामने में रुपए में रिकॉर्ड गिरावट
करेंसी बाजार में मचा कोहराम, डॉलर के सामने में रुपए में रिकॉर्ड गिरावट

जानकारों की मानें तो विदेशी निवेशकों की बेरुखी, डॉलर इंडेक्स में तेजी, कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा और जियो पॉलिटिकल टेंशन की वजह​ से डॉलर के मुकाबले में रुपए में रिकॉर्ड गिरावट आई है. जानकारों की मानें तो जब तक जियो पॉलिटिकल टेंशन कम नहीं होगा और कच्चे तेल की कीमतों में कमी नहीं आएगी, तब तक डॉलर के मुकाबले में रुपए में गिरावट देखने को मिलती रहेगी.

वो बात अलग है कि अगर आरबीआई करेंसी मार्केट में दखल दे तो रुपए को कुछ राहत मिल सकती है. लेकिन उसके बाद फिर वही स्थिति आना तय है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर करेंसी मार्केट में किस तरह के आंकड़े देखने को मिल रहे हैं.

लाइफटाइम लो पर रुपया

मंगलवार को शुरुआती कारोबार में, खाड़ी क्षेत्र में US और ईरानी सेनाओं के बीच फिर से सैन्य टकराव होने के बाद बाजार का माहौल कमजोर बना रहा, जिसके चलते रुपया 20 पैसे गिरकर US डॉलर के मुकाबले 95.43 पर पहुंच गया. फॉरेक्स ट्रेडर्स ने बताया कि खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता के कारण निवेशकों में घबराहट है, जिससे वे बड़े पैमाने पर अपना पैसा सुरक्षित जगहों पर लगा रहे हैं. इस स्थिति का सबसे ज्यादा फ़ायदा US डॉलर को मिल रहा है. इसके अलावा, ब्रेंट तेल की कीमतें 113 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जिससे भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बना हुआ है.

इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया 95.30 पर खुला, लेकिन शुरुआती कारोबार में ही यह कमज़ोर होकर US डॉलर के मुकाबले 95.43 पर पहुंच गया. इस तरह, पिछले बंद भाव के मुकाबले इसमें 20 पैसे की गिरावट दर्ज की गई. सोमवार को रुपया 39 पैसे गिरकर US डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 95.23 पर बंद हुआ था. इसका मतलब है कि दो दिनों में डॉलर के मुकाबले रुपए में 59 पैसे की गिरावट देखने को मिल चुकी है और रिकॉर्ड लेवल पर नीचे आ गया है. जानकारों की मानें तो आने वाले दिनों में रुपए में और गिरावट देखने को मिल सकती है.

20 दिनों में 3 रुपए की गिरावट

खास बात तो ये है कि डॉलर के मुकाबले में रुपए में 3 रुपए की गिरावट देखने को मिल चुकी है. आंकड़ों को देखें तो 17 अप्रैल को डॉलर के मुकाबले में रुपए 92.60 के लेवल पर आ गया था. जिसमें तब से अब तक करीब 3 रुपए की गिरावट देखने को मिल चुकी है और आंकड़ा 95.43 के लेवल पर आ गया है. हाल के कुछ दिनों में मात्र 20 दिनों में रुपए में डॉलर के मुकाबले में सबसे बड़ी गिरावट मानी जा सकती है. जानकारों की मानें तो आने वाले दिनों में आंकड़ा 96 से 97 के लेवल के बीच भी जा सकता है.

क्यों आई रुपए में गिरावट?

Finrex Treasury Advisors LLP के ट्रेजरी हेड और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनिल कुमार भंसाली ने कहा कि तेल की कीमतों में भारी उछाल के चलते सोमवार को रुपया गिरकर 95.0875 के निचले स्तर पर बंद हुआ था. आज सुबह भी यह और नीचे खुला, क्योंकि जब सुरक्षित जगहों पर निवेश के कारण डॉलर इंडेक्स बढ़ता है और खाड़ी क्षेत्र में लगातार चल रही लड़ाई के कारण तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो रुपया और भी ज़्यादा कमज़ोर हो जाता है. भंसाली ने आगे कहा कि तेल की कीमतें ज़्यादा रहने से डॉलर के मुकाबले रुपये पर बिकवाली का दबाव बना रहेगा, क्योंकि तेल कंपनियाँ और FPIs डॉलर की खरीदारी तेज़ कर देंगे.

शेयर बाजार में गिरावट

इस बीच, डॉलर इंडेक्स—जो छह अलगअलग मुद्राओं की तुलना में US डॉलर की मज़बूती को मापता है—0.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ 98.51 पर ट्रेड कर रहा था. वैश्विक तेल बेंचमार्क माने जाने वाले ब्रेंट क्रूड की कीमतें वायदा कारोबार में 1.07 प्रतिशत की गिरावट के साथ 113.22 US डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रही थीं. घरेलू शेयर बाज़ार की बात करें तो, शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 361.62 अंक गिरकर 76,907.78 पर आ गया, जबकि निफ्टी 134.90 अंक गिरकर 23,980.60 पर पहुंच गया.

एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सोमवार को 2,835.62 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे. भंसाली ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में US और ईरानी सेनाओं के बीच फिर से सैन्य टकराव होने के बाद बाजार का माहौल कमजोर बना रहा. यह टकराव तब शुरू हुआ जब ईरानी सेनाओं ने खाड़ी में नए सिरे से हमले किए, क्योंकि दोनों ही पक्ष इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपना नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रहे थे.

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