
सहरसा, बिहार: सहरसा नगर निगम में विकास कार्यों के टेंडर और निर्माण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के मामले में बिहार सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई नगर विकास एवं आवास विभाग की पांच सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर की गई है। बताया जा रहा है कि एक समाचार रिपोर्ट प्रसारित होने के करीब 24 घंटे के भीतर सरकार ने यह कदम उठाया।
पूरा मामला नगर निगम की चार बड़ी परियोजनाओं से जुड़ा है, जिनकी कुल अनुमानित लागत करीब 8.44 करोड़ रुपये बताई गई है। आरोप है कि इन परियोजनाओं को एक साथ कराने के बजाय 68 छोटी-छोटी योजनाओं में बांट दिया गया। जांच समिति को आशंका है कि प्रत्येक योजना की लागत 15 लाख रुपये से कम रखने के पीछे टेंडर की निर्धारित प्रक्रिया से बचने का उद्देश्य हो सकता है।
चार परियोजनाओं को 68 योजनाओं में बांटने का आरोप
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, पहली परियोजना वार्ड नंबर 13 की न्यू कॉलोनी में पोखर निर्माण से संबंधित है। इसकी लागत करीब 1.80 करोड़ रुपये बताई गई है। आरोप है कि इसे 14 छोटी योजनाओं में बांटकर कराया गया। जांच टीम को मौके पर योजनाओं की जानकारी देने वाले जरूरी शिलापट्ट नहीं मिले। स्थानीय लोगों ने बताया कि पोखर में पहले से सीढ़ियां बनी हुई थीं और मौके पर कुछ ईंट, टाइल्स तथा ग्रिल लगाने का काम दिखाई दिया। समिति ने भुगतान और मौके पर हुए निर्माण के बीच अंतर की आशंका जताते हुए अधिक भुगतान की राशि वसूलने की सिफारिश की।
दूसरी परियोजना वार्ड नंबर 7 के शाहपुर इलाके में पोखर और पार्क निर्माण की थी। इस पर करीब 2.90 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का उल्लेख है। जांच समिति के अनुसार, इस काम को 24 छोटी योजनाओं में बांटा गया। निरीक्षण के दौरान यहां भी योजनाओं से संबंधित शिलापट्ट नहीं मिले। इससे निर्माण कार्यों की लागत और दूसरी जरूरी जानकारियों की मौके पर पुष्टि करने में परेशानी हुई।
तीसरी परियोजना पटेल मैदान के हवाई अड्डा परिसर में पार्क निर्माण की थी। इसकी लागत करीब 2.31 करोड़ रुपये बताई गई है। इसे 19 छोटी योजनाओं में बांटकर कराया गया। जांच में यहां भी शिलापट्ट नहीं मिले। इसके अलावा, पार्क निर्माण के लिए पथ निर्माण विभाग से जरूरी अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) लेने का रिकॉर्ड भी समिति को उपलब्ध नहीं हुआ।
इस परियोजना में पाइप बिछाने के काम को लेकर भी सवाल उठे। रिपोर्ट के मुताबिक, दस्तावेजों में पाइप छह फीट की गहराई में लगाने का उल्लेख था, जबकि मौके पर कई जगह पाइप करीब तीन फीट की गहराई पर मिले। समिति ने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, काम की वास्तविक माप और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाए हैं।
चौथी परियोजना व्यवहार न्यायालय परिसर में निर्माण कार्य से जुड़ी थी। इसकी लागत करीब 1.42 करोड़ रुपये बताई गई है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना को भी 11 छोटी योजनाओं में बांट दिया गया। यहां भी जांच टीम को योजनाओं की जानकारी देने वाले शिलापट्ट नहीं मिले।
421 विभागीय कार्यों के आवंटन पर भी सवाल
जांच समिति ने केवल चार परियोजनाओं ही नहीं, बल्कि नगर निगम में काम आवंटित करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रभात कुमार झा ने 21 जून 2025 को नगर आयुक्त का पद संभाला था। इसके बाद जुलाई 2025 से फरवरी 2026 के बीच करीब आठ महीनों में 421 विभागीय कार्य कराए गए। इन कार्यों के लिए नगर निगम के पांच कर्मचारियों को अभिकर्ता बनाया गया था।
इन कर्मचारियों में टैक्स दरोगा रंजन कुमार रजक, सिटी मैनेजर अभिसार कश्यप, नाजिर संतोष कुमार, संविदा पर कार्यरत कनीय अभियंता दिलीप कुमार और कनीय अभियंता अजय कुमार रमण शामिल हैं। रिपोर्ट में अनुमान के तौर पर बताया गया है कि रंजन कुमार रजक और अभिसार कश्यप को 150 से 200 तक योजनाओं की जिम्मेदारी दी गई। संतोष कुमार को 50 से 60, दिलीप कुमार को करीब 50 और अजय कुमार रमण को लगभग 15 योजनाएं सौंपी गईं।
समिति ने इतने बड़े पैमाने पर काम कुछ ही कर्मचारियों को सौंपे जाने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। सिटी मैनेजर अभिसार कश्यप के संविदा विस्तार से जुड़े दस्तावेजों को लेकर भी रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है। समिति के मुताबिक, उनके संविदा विस्तार के संबंधित रिकॉर्ड 30 अक्टूबर 2025 के बाद उपलब्ध नहीं मिले।
शिकायत के बाद शुरू हुई थी जांच
इस मामले की जांच पूर्व मंत्री और बीजेपी नेता आलोक रंजन की शिकायत के बाद शुरू हुई थी। उनकी शिकायत पर नगर विकास एवं आवास विभाग ने पांच सदस्यीय समिति गठित कर जांच के आदेश दिए थे। समिति ने 20 से 22 अगस्त 2026 के बीच सहरसा पहुंचकर निर्माण स्थलों का निरीक्षण किया और संबंधित दस्तावेजों का मौके पर हुए कार्यों से मिलान किया।
जांच पूरी करने के बाद समिति ने 21 सितंबर 2026 को अपनी रिपोर्ट विभाग को सौंप दी थी। इसमें टेंडर प्रक्रिया, काम के आवंटन और निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा सहित संबंधित लोगों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। जहां अधिक भुगतान की आशंका जताई गई, वहां संबंधित राशि की वसूली की सिफारिश भी की गई।
खबर प्रसारित होने के बाद 24 घंटे में कार्रवाई
मंगलवार रात एक समाचार चैनल के कार्यक्रम में सहरसा नगर निगम की परियोजनाओं और जांच रिपोर्ट में सामने आई कथित गड़बड़ियों पर विशेष रिपोर्ट प्रसारित की गई थी। इसमें यह सवाल भी उठाया गया था कि जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद कार्रवाई में देरी क्यों हुई। इसके करीब 24 घंटे के भीतर बिहार सरकार ने नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा को निलंबित कर दिया।
निलंबन के बाद अब मामले में आगे की विभागीय जांच और अन्य संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका पर नजर रहेगी। जांच समिति की सिफारिशों के आधार पर यह भी तय होना बाकी है कि किन लोगों की जिम्मेदारी बनती है और कथित अधिक भुगतान की कितनी राशि वसूल की जाएगी।
Satya Report Disclaimer: यह रिपोर्ट उपलब्ध जांच रिपोर्ट और समाचार जानकारी पर आधारित है। इसमें उल्लिखित अनियमितताएं जांच में उठाए गए सवाल और आरोप हैं। अंतिम जिम्मेदारी संबंधित विभागीय और कानूनी जांच के निष्कर्षों के आधार पर तय होगी।


