
दिवाली से पहले लगभग हर घर में साफ-सफाई का काम तेज हो जाता है। महीनों से बंद पड़े स्टोर रूम, अलमारियों, पर्दों, पुराने गद्दों और कोनों में जमा धूल-मिट्टी हटाई जाती है। लेकिन सफाई के बाद कुछ लोगों को लगातार छींक आने, नाक बहने, आंखों में खुजली और खांसी जैसी परेशानियां होने लगती हैं।
अक्सर लोग इन लक्षणों को मौसम बदलने या सामान्य सर्दी-जुकाम का असर समझ लेते हैं। जबकि कई बार इसकी वजह घर में जमा धूल, फफूंद, डस्ट माइट्स और सफाई में इस्तेमाल होने वाले केमिकल हो सकते हैं। ये चीजें एलर्जी को बढ़ा सकती हैं और अस्थमा से पीड़ित लोगों की परेशानी भी बढ़ा सकती हैं। आइए जानते हैं दिवाली की सफाई के दौरान एलर्जी क्यों होती है और इससे बचने के लिए क्या सावधानियां जरूरी हैं।
दिवाली की सफाई के दौरान धूल-मिट्टी एलर्जी क्यों बढ़ाती है?
घर में लंबे समय से जमा धूल में कई तरह के सूक्ष्म कण और एलर्जेन मौजूद हो सकते हैं। जब अलमारी, पुराने बिस्तर, पर्दे, कालीन या स्टोर रूम की सफाई की जाती है, तो ये कण हवा में फैल जाते हैं।
सांस लेते समय ये कण नाक और श्वसन तंत्र में पहुंच सकते हैं। संवेदनशील लोगों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली इन पदार्थों पर प्रतिक्रिया करती है, जिससे छींक, नाक बहना और आंखों में खुजली जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
सफाई के दौरान परेशानी बढ़ाने वाले कुछ प्रमुख कारण हैं:
- घर की धूल: इसमें अलग-अलग तरह के सूक्ष्म कण, त्वचा की मृत कोशिकाएं और अन्य एलर्जेन हो सकते हैं।
- डस्ट माइट्स: ये बेहद छोटे जीव होते हैं, जो बिस्तर, गद्दों, तकियों और कालीनों में पाए जा सकते हैं। इनके अवशेष कुछ लोगों में एलर्जी पैदा कर सकते हैं।
- फफूंद: नमी वाली दीवारों, पुराने सामान और बंद जगहों पर फफूंद पनप सकती है। इसके बीजाणु हवा में फैलकर एलर्जी के लक्षण बढ़ा सकते हैं।
- सफाई के केमिकल: तेज खुशबू वाले क्लीनर, स्प्रे और अन्य रसायन नाक, गले और आंखों में जलन पैदा कर सकते हैं।
क्या पुरानी धूल और फफूंद से अस्थमा बढ़ सकता है?
हां, धूल के कण, डस्ट माइट्स और फफूंद के संपर्क में आने से कुछ लोगों में अस्थमा के लक्षण बढ़ सकते हैं। खासकर उन लोगों को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए जिन्हें पहले से अस्थमा या एलर्जी की समस्या है।
ऐसे लोगों को सफाई के दौरान खांसी, सीने में जकड़न, सांस लेने में परेशानी या घरघराहट महसूस हो सकती है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि हर व्यक्ति को धूल से अस्थमा नहीं होता। लेकिन जिन लोगों को पहले से यह बीमारी है, उनमें एलर्जेन और तेज गंध वाले केमिकल लक्षणों को बढ़ा सकते हैं।
छींक, आंखों में खुजली और नाक बहना एलर्जी के संकेत हो सकते हैं
सफाई के बाद कुछ खास लक्षण दिखाई दें, तो एलर्जी की आशंका हो सकती है। इनमें शामिल हैं:
- बार-बार छींक आना।
- नाक में खुजली होना या लगातार पानी बहना।
- आंखों में खुजली, लालिमा और पानी आना।
- नाक बंद होना।
- गले में खुजली या बार-बार खांसी आना।
- धूल के संपर्क में आने के बाद लक्षण बढ़ना और उस जगह से दूर होने पर राहत महसूस होना।
अगर इन लक्षणों के साथ सांस लेने में परेशानी, सीने में जकड़न या घरघराहट भी हो, तो इसे सामान्य एलर्जी समझकर नजरअंदाज न करें।
सफाई के दौरान मास्क और दस्ताने कितने जरूरी हैं?
धूल भरी जगहों की सफाई करते समय सही सुरक्षा उपाय अपनाने से एलर्जेन और केमिकल के संपर्क को कम किया जा सकता है।
1. अच्छी फिटिंग वाला मास्क पहनें
पुराने गद्दों, स्टोर रूम और धूल भरे कोनों की सफाई करते समय अच्छी तरह फिट होने वाला उपयुक्त रेस्पिरेटर, जैसे N95, हवा में मौजूद कई सूक्ष्म कणों को सांस के साथ अंदर जाने से कम कर सकता है। ढीला या साधारण कपड़े वाला मास्क सीमित सुरक्षा देता है।
2. दस्ताने और सुरक्षात्मक चश्मे का इस्तेमाल करें
सफाई के केमिकल इस्तेमाल करते समय उत्पाद की पैकेजिंग पर दिए गए निर्देशों के अनुसार दस्ताने पहनें। छींटों या धूल से आंखों को बचाने के लिए जरूरत पड़ने पर सुरक्षात्मक चश्मा भी लगाएं।
3. सफाई के केमिकल आपस में न मिलाएं
ब्लीच को अमोनिया या दूसरे क्लीनर के साथ मिलाना बेहद खतरनाक हो सकता है। इससे जहरीली गैस निकल सकती है, जो आंखों और श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकती है। हर उत्पाद का इस्तेमाल उसके निर्देशों के अनुसार ही करें।
4. सूखी झाड़ू के बजाय गीले कपड़े से सफाई करें
तेजी से सूखी झाड़ू लगाने पर धूल हवा में फैल सकती है। इसके बजाय नम कपड़े से सतह साफ करें और फर्श पर गीला पोछा लगाएं। वैक्यूम क्लीनर उपलब्ध हो तो HEPA फिल्टर वाला विकल्प धूल के सूक्ष्म कणों को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।
5. कमरे में हवा आने-जाने का इंतजाम रखें
सफाई के दौरान उचित वेंटिलेशन जरूरी है। खिड़कियां और दरवाजे खोलकर हवा का आवागमन बनाए रखें, बशर्ते बाहर की हवा में धूल या प्रदूषण अधिक न हो। तेज गंध वाले क्लीनर का इस्तेमाल बंद कमरे में न करें।
एलर्जी या अस्थमा के मरीज इन बातों का रखें ध्यान
जिन लोगों को पहले से एलर्जी या अस्थमा है, उन्हें सफाई के दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। संभव हो तो किसी दूसरे व्यक्ति से धूल भरे हिस्सों की सफाई करवाएं और उस दौरान खुद कमरे से दूर रहें।
सफाई के बाद कमरे को अच्छी तरह साफ होने दें और धूल बैठने के बाद ही वहां वापस जाएं। अस्थमा की दवाएं या डॉक्टर द्वारा दिया गया इनहेलर नियमित निर्देशों के अनुसार इस्तेमाल करें। अपनी मर्जी से दवा बंद न करें।
अगर सफाई के बाद सांस फूलने लगे, सीने में जकड़न हो या घरघराहट बढ़ जाए, तो काम तुरंत रोककर धूल वाली जगह से बाहर निकलें। सांस लेने में गंभीर परेशानी होने पर तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?
अगर छींक, नाक बहना और आंखों में खुजली बार-बार हो रही है या कई दिनों तक बनी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लें। डॉक्टर जरूरत के अनुसार एलर्जी की जांच और उचित उपचार बता सकते हैं।
सांस लेने में परेशानी, सीने में जकड़न या अस्थमा के लक्षण बढ़ने पर जांच में देरी न करें। समय पर सावधानी बरतने से दिवाली की सफाई के दौरान होने वाली कई परेशानियों से बचा जा सकता है।
Satya Report डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। एलर्जी और अस्थमा के लक्षण व्यक्ति के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। गंभीर या लगातार परेशानी होने पर डॉक्टर से सलाह लें।



