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श्रावस्ती में दीवार पर ‘त्रिशूल’ जैसी आकृति और जमीन पर ‘शिवलिंग’ दिखने का दावा, गांव में उमड़ी भीड़

श्रावस्ती में दीवार पर ‘त्रिशूल’ जैसी आकृति और जमीन पर ‘शिवलिंग’ दिखने का दावा, गांव में उमड़ी भीड़

बदला चौराहा : उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में सोमवार को एक कथित धार्मिक आकृति को लेकर गांव में लोगों की भीड़ जुट गई। हरदत्तनगर गिरंट थाना क्षेत्र के भवानी पुरवा गांव में ग्रामीणों ने एक मकान की दीवार पर दीमक से बनी आकृति को भगवान शिव के त्रिशूल जैसी बताया। शाम तक इसी स्थान के आसपास जमीन से शिवलिंग जैसा स्वरूप दिखाई देने का दावा भी सामने आया। इसके बाद गांव में लोगों की आवाजाही बढ़ गई।

भवानी पुरवा गांव ग्राम पंचायत इमलिया करनपुर का हिस्सा है। ग्रामीणों के मुताबिक सोमवार सुबह सबसे पहले राम कुंवारे यादव के मकान की दीवार पर बनी आकृति लोगों की नजर में आई। कुछ ग्रामीणों ने इसे त्रिशूल जैसा बताया। देखते ही देखते इसकी चर्चा गांव से निकलकर आसपास के इलाकों तक पहुंच गई और दिनभर लोग मौके पर पहुंचकर आकृति को देखने लगे।

जमीन से ‘शिवलिंग’ जैसा स्वरूप दिखने के दावे के बाद बढ़ी भीड़

ग्रामीणों के अनुसार सोमवार शाम कुछ लोगों ने उसी स्थान के पास जमीन से शिवलिंग जैसा स्वरूप दिखाई देने की बात कही। यह चर्चा फैलते ही मौके पर लोगों की संख्या तेजी से बढ़ गई।

महिलाओं, पुरुषों और बच्चों समेत बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंचे। कई लोगों ने फूल, बेलपत्र, धूप और अगरबत्ती चढ़ाकर पूजाअर्चना की। इस दौरान मौके पर ‘हरहर महादेव’ के जयकारे भी सुनाई दिए।

किसी ने आस्था माना तो किसी ने प्राकृतिक घटना से जोड़ा

मौके पर पहुंचे कई लोगों ने इसे अपनी आस्था से जुड़ा विषय बताया। कुछ श्रद्धालुओं ने इसे भगवान शिव का आशीर्वाद और शुभ संकेत माना। वहीं, कुछ लोग केवल कौतूहल के चलते मौके पर पहुंचे और वहां दिखाई देने वाले स्वरूप को देखने लगे।

देर शाम तक भवानी पुरवा में मेले जैसा माहौल नजर आया। आसपास के गांवों से भी लोग मौके पर पहुंचते रहे। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यहां लोगों का आना इसी तरह जारी रहा तो भविष्य में नियमित पूजा की व्यवस्था भी की जा सकती है।

घटना की अभी नहीं हुई वैज्ञानिक या प्रशासनिक पुष्टि

हालांकि, दीवार पर बनी आकृति और जमीन से दिखाई देने वाले कथित स्वरूप की वास्तविक प्रकृति को लेकर अभी तक किसी वैज्ञानिक, पुरातात्विक या प्रशासनिक एजेंसी की पुष्टि सामने नहीं आई है।

फिलहाल घटना से संबंधित जानकारी स्थानीय ग्रामीणों के दावों और मौके पर मौजूद लोगों के प्रत्यक्ष विवरण पर आधारित है। जहां कुछ लोग इसे आस्था का विषय मान रहे हैं, वहीं कुछ इसे प्राकृतिक कारणों से जोड़कर देख रहे हैं। ऐसे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित विशेषज्ञ या सक्षम एजेंसी की पुष्टि का इंतजार किया जाना जरूरी है।

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