चक्रवात अर्नब ने आंध्र प्रदेश से लेकर ओडिशा तक भारी बारिश, तेज हवाओं और तबाही का असर छोड़ा है। आंध्र प्रदेश में पांच लोगों की जान चली गई, जबकि हजारों लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाना पड़ा है।
उधर ओडिशा के 17 जिलों में भारी बारिश का असर देखने को मिला है। इस बीच दिल्लीNCR में भी सुबहसुबह मौसम ने करवट ली। कहीं बूंदाबांदी हुई तो कहीं तेज बारिश देखने को मिली। मौसम विभाग ने दिल्ली के लिए येलो अलर्ट जारी किया है।
चक्रवात अर्नब ने 28 अक्टूबर 2026 की सुबह आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में दस्तक दी। भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, यह तूफान आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी के यानम क्षेत्र के तट से बेहद गंभीर चक्रवाती तूफान के रूप में गुजरा। उस वक्त इसकी रफ्तार 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटा थी। हवा के झोंकों की रफ्तार 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच रही थी।
तूफान का असर विशाखापत्तनम, काकीनाडा, कोनसीमा, पूर्वी गोदावरी, पश्चिमी गोदावरी, एलुरु और कृष्णा जिले में देखने को मिला। कई जगह पेड़ उखड़ गए, बिजली की लाइनें टूट गईं और सड़कें बंद हो गईं। विशाखापत्तनम में बीच रोड और सीताम्माधारा इलाके में पेड़ गिरने से आवाजाही प्रभावित हुई। काकीनाडा में भी कई जगह पेड़ और बिजली की लाइनें क्षतिग्रस्त हुईं।
मौसम विभाग ने पहले बापटला से विशाखापत्तनम के बीच तट से टकराने की आशंका जताई थी। काकीनाडा और यानम के निचले इलाकों में समुद्र का पानी चढ़ने से बाढ़ का खतरा भी बताया गया था। अनुमान था कि समुद्र में ज्वार के सामान्य स्तर से 1।5 से 2।5 मीटर तक ऊंची लहरें उठ सकती हैं।
अक्टूबर के आखिर में बिगड़ा मौसम का मिजाज! चक्रवात अर्नब के कारण कई जिलों में केजी से 12वीं तक स्कूल बंद
चक्रवात की वजह से आंध्र प्रदेश में पांच लोगों की मौत हुई है। मुख्यमंत्री एन। चंद्रबाबू नायडू ने बुधवार को अमरावती में इसकी जानकारी दी। उन्होंने मृतकों के परिवारों को पांचपांच लाख रुपये की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया।
मृतकों में दो लोग विशाखापत्तनम क्षेत्र के थे। इनमें एक व्यक्ति की मौत बिजली की लाइन पर पेड़ गिरने से हुई, जबकि दूसरे की जान बिजली का खंभा गिरने से चली गई। भीमावरम में एक व्यक्ति पर ताड़ का पेड़ गिर गया। अनकापल्ली जिले में एक महिला की करंट लगने से मौत हो गई। वहीं, साक्रेटिपल्ली में दीवार गिरने से एक वाहन उसकी चपेट में आ गया और उसमें सवार महिला की जान चली गई।
प्रशासन ने प्रभावित परिवारों के लिए राहत का ऐलान भी किया है। जिन घरों में पानी भर गया है, उन्हें 25 किलो चावल दिया जाएगा। मछुआरों और हथकरघा बुनकरों के परिवारों को 50 किलो चावल मिलेगा। इसके साथ दाल, प्याज, चीनी, आलू और पाम ऑयल भी दिया जाएगा।
राहत शिविरों में रहने वाले लोगों को प्रति व्यक्ति 1,000 रुपये मिलेंगे। एक परिवार को अधिकतम 3,000 रुपये दिए जाएंगे। जिन घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है, उनके मालिकों को 10,000 रुपये की मदद मिलेगी। धान, कपास, मूंगफली और गन्ने की फसल को नुकसान झेलने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर 25,000 रुपये देने की घोषणा की गई है।
80 हजार हेक्टेयर से ज्यादा फसल बर्बाद
चक्रवात ने आंध्र प्रदेश के खेतीकिसानी वाले इलाकों को भी बड़ा नुकसान पहुंचाया है। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से फोन पर बात कर राज्य की स्थिति की जानकारी दी और केंद्र से मदद मांगी। शुरुआती आकलन के मुताबिक, 70 हजार हेक्टेयर से ज्यादा कृषि भूमि पर लगी फसलें पानी में डूब गई हैं। बागवानी वाली फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। 10,500 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में बागवानी की फसलें प्रभावित हुई हैं। इस तरह दोनों श्रेणियों को मिलाकर 80 हजार हेक्टेयर से ज्यादा फसल क्षेत्र नुकसान की चपेट में है।
राज्य सरकार ने केंद्र से नुकसान का आकलन करने के लिए अंतरमंत्रालयी टीम भेजने की मांग की है। मुख्यमंत्री ने राज्य के रियलटाइम गवर्नेंस सेंटर के जरिए राहत और बहाली के कामों की समीक्षा की। अधिकारियों को बिजली, सड़क और पानी जैसी जरूरी सेवाएं जल्द बहाल करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन के मुताबिक, 28 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित जगहों और राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और राज्य आपदा मोचन बल की टीमें प्रभावित इलाकों में तैनात हैं। विशाखापत्तनम जिले में करीब 80 फीसदी बिजली आपूर्ति बहाल की जा चुकी है। कोनसीमा, काकीनाडा और गोदावरी के जिलों में बिजली के खंभों और लाइनों की मरम्मत जारी है। सड़क से गिरे हुए पेड़ हटाए जा रहे हैं और पीने के पानी की सप्लाई बहाल करने पर भी काम हो रहा है। चंद्रबाबू नायडू ने 29 अक्तूबर को कोनसीमा या पश्चिमी गोदावरी जिले का दौरा करने की बात कही थी।
आंध्र प्रदेश के बाद चक्रवात का असर ओडिशा में भी देखने को मिला। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बुधवार को बताया कि चक्रवात से जुड़ी भारी बारिश ने राज्य के 17 जिलों को प्रभावित किया है। इनमें गजपति जिला सबसे ज्यादा प्रभावित बताया गया।
रायगड़ा जिले में भी बारिश हुई, हालांकि उसकी तीव्रता पहले के मुकाबले कम रही। जिला कलेक्टर आशुतोष कुलकर्णी के मुताबिक, बुधवार सुबह 8:30 बजे खत्म हुए पिछले 24 घंटों में जिले में 40 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। इसके बाद सुबह 8:30 बजे से शाम तक करीब 26 मिलीमीटर अतिरिक्त बारिश हुई।
बारिश अनुमान से कम रही है और फिलहाल जिले में किसी बड़े खतरे की आशंका नहीं है। फिर भी प्रशासन ने सभी विभागों को हाई अलर्ट पर रखा है। इलाके में आगे भी बारिश होने की संभावना बनी हुई है।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि राज्य सरकार किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, 29 अक्टूबर की सुबह तक कई इलाकों में भारी बारिश हो सकती है। इसके बाद चक्रवाती सिस्टम के कमजोर पड़ने की संभावना है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने ओडिशा के कई जिलों के लिए भारी बारिश, आंधी, बिजली गिरने और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की है।
इन छह जिलों में बेहद भारी बारिश का खतरा है: गजपति, गंजाम, रायगड़ा, कोरापुट, नबरंगपुर और मलकानगिरी। यहां कुछ स्थानों पर बेहद भारी बारिश हो सकती है। साथ ही गरजचमक और 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की आशंका है। हवा के झोंके 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं।
इन 10 जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है: कालाहांडी, कंधमाल, नुआपाड़ा, बलांगीर, बरगढ़, पुरी, खुर्दा, सोनपुर, बौध और नयागढ़। इन इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश, गरजचमक और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। झोंकों की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
इन 14 जिलों में येलो अलर्ट है: सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, संबलपुर, देवगढ़, मयूरभंज, अंगुल, ढेंकनाल, क्योंझर, बालासोर, भद्रक, जाजपुर, केंद्रापड़ा, जगतसिंहपुर और कटक। यहां कुछ स्थानों पर भारी बारिश के साथ गरजचमक और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने का अनुमान है। झोंकों की रफ्तार 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक जा सकती है।
प्रशासन ने लोगों को मौसम सुधरने तक घरों के भीतर रहने की सलाह दी है। बिजली के खंभों, होर्डिंग और पुराने पेड़ों से दूर रहने को कहा गया है। आपातकालीन टीमें जलभराव हटाने, गिरे पेड़ों को साफ करने और बंद सड़कों को खोलने में जुटी हैं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, बुधवार शाम तक चक्रवात अर्नब की ताकत कम हो गई थी। शाम 5:30 बजे यह आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्र और पश्चिममध्य बंगाल की खाड़ी के आसपास चक्रवाती तूफान के रूप में मौजूद था। पिछले छह घंटों में यह करीब 8 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तरउत्तरपश्चिम दिशा में बढ़ा था।
उस वक्त तूफान का केंद्र नरसापुर से करीब 60 किलोमीटर उत्तर में, यानम से 60 किलोमीटर पश्चिमउत्तरपश्चिम में और काकीनाडा से करीब 60 किलोमीटर पश्चिम में था। यह तूफान तुनी से लगभग 100 किलोमीटर पश्चिमदक्षिणपश्चिम और मछलीपट्टनम से 110 किलोमीटर उत्तरउत्तरपूर्व में था।
मौसम विभाग ने अनुमान जताया कि यह अगले 24 घंटों में उत्तरउत्तरपश्चिम दिशा में आगे बढ़ेगा और बुधवार आधी रात तक गहरे दबाव वाले क्षेत्र में बदल सकता है। इसके बाद भी इसके धीरेधीरे कमजोर होने की संभावना जताई गई।
चक्रवात अर्नब का असर पश्चिम बंगाल में भी पहुंचा है। मौसम विभाग ने राज्य के कुछ हिस्सों में 31 अक्टूबर तक भारी बारिश का अनुमान जताया है। मंगलवार को तटीय और दक्षिणी जिलों के कुछ इलाकों में मध्यम से भारी बारिश दर्ज की गई थी।
मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक, शुक्रवार सुबह तक राज्य के तटीय और पश्चिमी जिलों में भारी बारिश हो सकती है। उपहिमालयी क्षेत्र में शनिवार तक बारिश का असर बने रहने की संभावना है। इससे पहले तूफान के आंध्र प्रदेश तट से टकराने के दौरान तेज हवाओं और भारी बारिश का असर आसपास के इलाकों में भी दर्ज किया गया था।
चक्रवात के चलते रेल सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। 27 अक्टूबर से 5 नवंबर 2026 के बीच कम से कम 22 एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेन सेवाएं रद्द या स्थगित की गई हैं। इनमें विशाखापत्तनमकिरंदुल और राउरकेलाजगदलपुर जैसी ट्रेनें शामिल हैं। इनकी कई सेवाएं 29 अक्टूबर से 4 नवंबर के बीच रद्द की गई हैं। हावड़ाजगदलपुर समलेश्वरी एक्सप्रेस की तारीखों में भी बदलाव किया गया है।
भुवनेश्वरजगदलपुर हीराखंड एक्सप्रेस 27 से 30 अक्टूबर के बीच रायगड़ा तक ही चलेगी। वहीं, जगदलपुरभुवनेश्वर हीराखंड एक्सप्रेस 28 से 31 अक्टूबर के बीच जगदलपुर के बजाय रायगड़ा से रवाना होगी। यात्रियों को सलाह दी गई है कि स्टेशन जाने से पहले अपनी ट्रेन की ताजा स्थिति जरूर जांच लें। चक्रवात के कारण परिचालन में बदलाव होने से यात्रा की योजना प्रभावित हो सकती है।
चक्रवात की खबरों के बीच दिल्लीएनसीआर में भी मौसम अचानक बदल गया। राष्ट्रीय राजधानी और आसपास के इलाकों में कहीं हल्की बूंदाबांदी हुई तो कहीं तेज बारिश देखने को मिली। मौसम विभाग ने दिल्ली के लिए येलो अलर्ट जारी किया है।
मौसम विभाग के मुताबिक, दिनभर मौसम में उतारचढ़ाव बना रह सकता है। अलगअलग इलाकों में बारिश की तीव्रता अलग रहने की संभावना है। ऐसे में लोगों को बाहर निकलते वक्त मौसम की ताजा जानकारी पर नजर रखने की जरूरत है। हालांकि दिल्ली की बारिश को चक्रवात अर्नब से सीधे जोड़ने की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए दोनों मौसम घटनाओं को एक ही सिस्टम का असर मानना सही नहीं होगा।
मौसम विभाग के अनुसार चक्रवात अर्नब उत्तरउत्तरपश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है और आगे चलकर यह और कमजोर होकर डीप डिप्रेशन में बदल जाएगा। प्रशासन ने लोगों से पुरानी इमारतों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की अपील की है।



