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20​​​​​ दिनों में एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत, जांच में सामने आया थैलियम जहर का खौफनाक रहस्य

20​​​​​ दिनों में एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत, जांच में सामने आया थैलियम जहर का खौफनाक रहस्य

महागांव, महाराष्ट्र: एक परिवार में अचानक ऐसी घटनाएं होने लगीं, जिनकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। पहले बुजुर्ग पति-पत्नी की तबीयत बिगड़ी और कुछ ही दिनों बाद परिवार के दूसरे सदस्य भी अजीब लक्षणों के साथ बीमार पड़ने लगे। एक के बाद एक पांच लोगों की मौत हो गई। शुरुआत में इन मौतों को बीमारी समझा गया, लेकिन जब सभी के लक्षण एक जैसे सामने आए तो पुलिस को शक हुआ कि इसके पीछे कोई गहरी साजिश हो सकती है।

यह मामला महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के अहेरी तालुका स्थित महागांव का है। सितंबर और अक्टूबर 2023 के दौरान एक ही परिवार के पांच सदस्यों की करीब 20 दिनों के भीतर मौत हो गई। जांच आगे बढ़ी तो थैलियम नाम के बेहद जहरीले पदार्थ के इस्तेमाल की आशंका सामने आई। पुलिस ने इस मामले में परिवार की दो महिलाओं समेत अन्य लोगों की भूमिका की जांच की।

एक के बाद एक पांच लोगों की मौत

इस मामले में जान गंवाने वालों में शंकर कुंभारे, उनकी पत्नी विजया कुंभारे, उनके बेटे रोशन कुंभारे, परिवार की सदस्य कोमल दहागांवकर और विजया की बहन आनंदा उर्फ वर्षा उराडे शामिल थीं।

घटनाओं की शुरुआत 20 सितंबर 2023 को हुई, जब शंकर और विजया की तबीयत अचानक खराब होने लगी। दोनों को हाथ-पैरों में झनझनाहट, कमर में तेज दर्द और सिरदर्द जैसी परेशानियां होने लगीं। उनके होंठों का रंग भी गहरा पड़ने लगा और जीभ भारी महसूस होने लगी।

पहले उन्हें अहेरी के अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत बिगड़ने पर चंद्रपुर और नागपुर के अस्पतालों में ले जाया गया। हालांकि, इलाज के दौरान 26 सितंबर को शंकर की मौत हो गई और अगले दिन विजया ने भी दम तोड़ दिया।

परिवार अभी इन दो मौतों के सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि दूसरी घटनाएं शुरू हो गईं। 8 अक्टूबर को कोमल दहागांवकर की मौत हुई। इसके बाद 14 अक्टूबर को आनंदा उर्फ वर्षा उराडे और 15 अक्टूबर को रोशन कुंभारे की भी जान चली गई।

बीमारी नहीं, जहरीले पदार्थ का शक

एक ही परिवार के पांच लोगों में लगभग समान लक्षण सामने आने के बाद जांचकर्ताओं को किसी जहरीले पदार्थ के इस्तेमाल का संदेह हुआ। जांच के दौरान थैलियम नाम के जहरीले भारी धातु की आशंका सामने आई।

थैलियम एक बेहद खतरनाक विषैला पदार्थ है, जिसका संपर्क शरीर के तंत्रिका तंत्र सहित कई अंगों को प्रभावित कर सकता है। इसके संपर्क में आने पर हाथ-पैरों में झनझनाहट, दर्द और अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

पुलिस को संदेह था कि पीड़ितों को भोजन और पानी के माध्यम से धीरे-धीरे जहर दिया गया था। शुरुआती इलाज के दौरान इस पदार्थ की पहचान नहीं हो पाने के कारण मामला और उलझता चला गया।

जांच में दो महिलाओं के नाम आए सामने

जैसे-जैसे पुलिस ने परिवार के रिश्तों और आपसी विवादों की पड़ताल की, शक रोशन की पत्नी संगमित्रा कुंभारे और परिवार की रिश्तेदार रोजा रामटेके पर गया।

संगमित्रा की शादी दिसंबर 2022 में रोशन से हुई थी। पुलिस के अनुसार, शादी के बाद उसके और ससुराल वालों के बीच रिश्ते अच्छे नहीं चल रहे थे। पारिवारिक विवाद और प्रताड़ना से जुड़े आरोप भी जांच का हिस्सा बने।

दूसरी ओर, रोजा रामटेके का परिवार में पैतृक संपत्ति को लेकर विवाद बताया गया। पुलिस को आशंका थी कि इन्हीं व्यक्तिगत और पारिवारिक विवादों के चलते दोनों महिलाएं कथित तौर पर एक-दूसरे के संपर्क में आईं।

जहर हासिल करने के लिए बनाई गई कथित योजना

पुलिस की जांच में दावा किया गया कि दोनों महिलाओं ने अलग-अलग जहरीले पदार्थों के बारे में जानकारी जुटाई और बाद में थैलियम का इस्तेमाल करने की योजना बनाई।

जांचकर्ताओं के मुताबिक, संगमित्रा ने इंटरनेट पर जहरीले पदार्थों और उनके प्रभावों के बारे में जानकारी खोजी थी। इसके बाद उसने कथित तौर पर मुंबई की एक फार्मास्युटिकल कंपनी से रिसर्च के नाम पर संपर्क किया और थैलियम हासिल करने की कोशिश की।

इस प्रक्रिया में संगमित्रा के पुराने स्कूल मित्र अविनाश ताजने का नाम भी सामने आया। पुलिस का आरोप था कि उसने करीब 12 हजार रुपये का ऑनलाइन भुगतान करके पदार्थ हासिल करने में मदद की। जांचकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि उसे इसके कथित इस्तेमाल की जानकारी थी।

खाने-पीने की चीजों में मिलाने का आरोप

पुलिस की जांच के अनुसार, संगमित्रा पर शंकर, विजया और कोमल को भोजन के जरिए जहरीला पदार्थ देने का आरोप लगा। वहीं, रोशन को दाल के माध्यम से जहर देने की बात सामने आई।

दूसरी ओर, रोजा रामटेके पर वर्षा उराडे को जहरीला पदार्थ देने का आरोप लगाया गया। जांचकर्ताओं का दावा था कि दोनों महिलाओं ने कथित तौर पर अपनी-अपनी भूमिका तय कर रखी थी।

इस मामले में परिवार के अन्य लोगों और एक चालक की तबीयत भी खराब होने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि, समय पर इलाज मिलने के कारण उनकी जान बच गई।

एक महिला की तबीयत खराब नहीं हुई तो बढ़ा शक

जांच के दौरान पुलिस ने परिवार के सदस्यों की गतिविधियों और अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान उनके व्यवहार की भी पड़ताल की। इसी बीच संगमित्रा को लेकर पुलिस का ध्यान गया, क्योंकि परिवार के दूसरे सदस्य बीमार पड़ रहे थे, लेकिन वह खुद उन लक्षणों से प्रभावित नहीं हुई थी।

पुलिस ने पूछताछ के दौरान संगमित्रा से कई सवाल किए। जांचकर्ताओं के मुताबिक, पूछताछ में कथित जहर देने और रोजा की भूमिका से जुड़ी जानकारियां सामने आईं। इसके बाद रोजा से भी पूछताछ की गई।

जांच आगे बढ़ने पर अविनाश ताजने को भी गिरफ्तार किया गया। उस पर जहरीले पदार्थ की खरीद और भुगतान में मदद करने का आरोप लगाया गया।

72 घंटे की तलाश के बाद मिला संदिग्ध डिब्बा

पुलिस ने कथित जहर से जुड़े भौतिक सबूत जुटाने के लिए आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान चलाया। 30 अक्टूबर 2023 की एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 72 घंटे तक तलाश करने के बाद गढ़चिरौली पुलिस ने पीड़ित परिवार के घर के पास एक खेत से ऐसा डिब्बा बरामद किया, जिसमें थैलियम रखे जाने का संदेह था।

इस बरामदगी को जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना गया, क्योंकि इससे कथित जहरीले पदार्थ और घटनास्थल के बीच संबंध की पड़ताल में मदद मिल सकती थी।

जॉली जोसेफ हत्याकांड से क्यों हुई तुलना?

महाराष्ट्र के इस मामले की तुलना केरल के चर्चित जॉली जोसेफ हत्याकांड से भी की गई। केरल में जॉली जोसेफ पर कई वर्षों के दौरान अपने परिवार के छह सदस्यों को जहर देकर मारने का आरोप लगा था।

वहीं, महागांव मामले में करीब 20 दिनों के भीतर एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हुई थी। दोनों मामलों में परिवार के सदस्यों को कथित तौर पर जहर देने की बात सामने आने के कारण इनकी तुलना की गई।

महागांव का मामला इस बात की याद दिलाता है कि कभी-कभी एक के बाद एक होने वाली संदिग्ध मौतों के पीछे ऐसी साजिश छिपी हो सकती है, जिसका पता शुरुआती जांच में लगाना बेहद मुश्किल होता है।

Satya Report Disclaimer: यह लेख वर्ष 2023 में प्रकाशित पुलिस से जुड़ी जानकारियों और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। आरोपियों की कथित भूमिका और साजिश से जुड़े विवरण जांच के दौरान सामने आए दावों पर आधारित हैं। इन्हें अदालत के अंतिम फैसले के रूप में नहीं माना जाना चाहि

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