नई दिल्ली : खुद के आशियाने का सपना देखने वाले सैकड़ों घर खरीदारों की गाढ़ी कमाई लूटकर प्रमोटर ने न सिर्फ विदेश में ऐशगाह बना ली, बल्कि सेंट किट्स की नागरिकता लेने की जुगत भी भिड़ा दी। अब प्रवर्तन निदेशालय ने 386 करोड़ रुपये की इस महाठगी के मामले में रियल एस्टेट कंपनी ‘ताशी ग्रुप’ और उसके कर्ताधर्ताओं के ठिकानों पर दिल्लीएनसीआर में ताबड़तोड़ छापेमारी की है। दिल्ली और हरियाणा पुलिस की एफआईआर के आधार पर शुरू हुई ईडी की इस बड़ी कार्रवाई से रियल एस्टेट सेक्टर में हड़कंप मच गया है।

15 साल से पजेशन का इंतजार, 120 करोड़ का गबन
ईडी के गुरुग्राम जोनल ऑफिस द्वारा 19 और 20 अगस्त को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत की गई इस छापेमारी में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया है कि ताशी ग्रुप ने गुरुग्राम के सेक्टर 111 में ‘ताशी कैपिटल गेटवे प्रोजेक्ट’ और सेक्टर 68 में ‘ओरियन गैलेक्सी प्रोजेक्ट’ के नाम पर 600 से ज्यादा लोगों को ठगा। निवेशकों से 386 करोड़ रुपये तो वसूल लिए गए, लेकिन 10 से 15 साल बीत जाने के बाद भी उन्हें घरों का पजेशन नहीं दिया गया। जांच एजेंसी का आरोप है कि निवेशकों के पैसे में से करीब 120 करोड़ रुपये का सीधे तौर पर गबन कर लिया गया और उस फंड को प्रमोटर के कंट्रोल वाली दूसरी संस्थाओं में डायवर्ट किया गया।
संपत्तियां बेचकर विदेश भागा परिवार, इंग्लैंड में खोला ओल्डएज होम
इस पूरे फर्जीवाड़े का मुख्य मास्टरमाइंड प्रमोटर काशी नाथ शुक्ला को बताया जा रहा है। जांच में पता चला है कि शुक्ला के परिवार के सदस्य पिछले 5 से 10 सालों में भारत में मौजूद अपनी तमाम बड़ी संपत्तियों को बेचकर या कैश में बदलकर गुपचुप तरीके से विदेश में बस गए हैं। ठगी की इस रकम से विदेशी कंपनियों में भारी निवेश किया गया, जिसमें इंग्लैंड में एक बुजुर्ग देखभाल केंद्र भी खोला गया है। हद तो तब हो गई जब परिवार के एक सदस्य ने इस काले धन के निवेश के जरिए सेंट किट्स की नागरिकता के लिए भी आवेदन कर दिया।
लग्जरी कार और लाखों के बैंक अकाउंट सीज, मनी ट्रेल खंगाल रही एजेंसी
ईडी ने ताशी ग्रुप से जुड़ी मेसर्स ताशी लैंड डेवलपर्स, केएनएस इन्फ्राकॉन और सोनी इन्फ्राटेक जैसी कंपनियों के 7 ठिकानों पर तलाशी ली। इस दौरान अहम डिजिटल डेटा, विदेशी निवेश के कागजात और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं। इसके साथ ही एजेंसी ने 22 लाख रुपये के बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट और एक लग्जरी कार को भी सीज कर दिया है। ईडी अब इन कंपनियों के बीच हुए फंड ट्रांसफर की पूरी मनी ट्रेल खंगाल रही है ताकि अपराध से कमाई गई पूरी रकम का पता लगाया जा सके और अवैध रूप से बनाई गई संपत्तियों की पहचान कर उन पर शिकंजा कसा जा सके। मामले में आगे की जांच अभी जारी है।



