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EVM नहीं, बैलेट पेपर से हुआ चुनाव, फिर भी किसका बजा डंका? 4 राज्यों के MLC नतीजों ने बढ़ाई सियासी हलचल

EVM नहीं, बैलेट पेपर से हुआ चुनाव, फिर भी किसका बजा डंका? 4 राज्यों के MLC नतीजों ने बढ़ाई सियासी हलचल

नई दिल्ली: देश के चार राज्यों में विधान परिषद की 28 सीटों पर हुए चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर चुनावी प्रक्रिया और राजनीतिक दलों के प्रदर्शन को लेकर बहस तेज कर दी है। उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और महाराष्ट्र में ये चुनाव ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से कराए गए। शुरुआती नतीजों में भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने कई सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस को चारों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा।

इन नतीजों के बाद सवाल उठ रहा है कि बैलेट पेपर से हुए चुनाव में किस दल का प्रदर्शन कैसा रहा और क्या इन परिणामों का आगामी विधानसभा चुनावों पर भी असर पड़ सकता है? हालांकि, विधान परिषद चुनावों का मतदाता वर्ग विधानसभा चुनावों से अलग होता है, इसलिए इनके नतीजों को सीधे विधानसभा चुनाव का संकेत मानना सही नहीं होगा।

उत्तर प्रदेश में भाजपा और सपा के बीच मुकाबला

उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के चुनाव पर खास नजर रही। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, भाजपा ने बरेली-मुरादाबाद सीट पर हरि सिंह ढिल्लों के जरिए अपनी स्थिति बरकरार रखी। मेरठ क्षेत्र में दिनेश कुमार गोयल और श्रीचंद शर्मा ने शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में जीत दर्ज की। भाजपा लखनऊ शिक्षक सीट पर भी अपनी पकड़ बनाए रखने में सफल रही।

वहीं, समाजवादी पार्टी ने वाराणसी शिक्षक और आगरा-अलीगढ़ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल की। कुछ अन्य सीटों पर मतगणना जारी होने की जानकारी भी सामने आई थी। ऐसे में सभी सीटों के अंतिम परिणामों के बाद ही राज्य में दलों के प्रदर्शन की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।

2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले इन नतीजों को भाजपा और सपा के लिए संगठनात्मक ताकत परखने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजे पूरे प्रदेश के मतदाताओं की पसंद का सीधा प्रतिनिधित्व नहीं करते।

बिहार में जन सुराज, भाजपा और राजद को मिली जीत

बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के चुनाव में शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, यहां कई सीटों पर अलग-अलग दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की।

दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार सुरेश प्रसाद राय ने कांग्रेस के मौजूदा एमएलसी मदन मोहन झा को 324 मतों से हराया। इस जीत के साथ जन सुराज ने विधान परिषद में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

कोसी स्नातक सीट पर भाजपा के एनके यादव ने जीत हासिल की। रिपोर्ट के अनुसार, राजद के नितेश यादव दूसरे और जन सुराज के उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहे।

पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भी मुकाबला चर्चा में रहा। यहां राजद उम्मीदवार डॉ. संजीव कुमार सिंह ने भाजपा के नवल किशोर यादव को हराया। इसे लंबे समय से भाजपा के प्रभाव वाली सीट पर राजद की महत्वपूर्ण सफलता के तौर पर देखा गया।

सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के बागी निर्दलीय उम्मीदवार राहुल राज ने 1,815 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। वहीं, तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार नरेंद्र प्रसाद सिंह ने सफलता हासिल की।

बिहार के परिणामों से संकेत मिलता है कि मुकाबला केवल प्रमुख दलों के बीच सीमित नहीं रहा। कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में निर्दलीय उम्मीदवारों और नए राजनीतिक विकल्पों ने भी अपनी जगह बनाई।

कर्नाटक में कांग्रेस को चारों सीटों पर हार

कर्नाटक में विधान परिषद की चार सीटों के नतीजे कांग्रेस के लिए झटका साबित हुए। राज्य में सत्ता में होने के बावजूद पार्टी किसी भी सीट पर जीत दर्ज नहीं कर सकी। भाजपा ने तीन सीटें जीतीं, जबकि उसकी सहयोगी जनता दल (सेक्युलर) यानी जेडीएस ने एक सीट अपने नाम की।

उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के शशील जी. नमोशी ने कांग्रेस उम्मीदवार शरणप्पा मत्तूर को हराया। रिपोर्ट के मुताबिक, इस सीट पर यह उनकी पांचवीं जीत थी।

दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के केएम सुरेश ने कांग्रेस के शशि हुलिकुंटे मुट्ट को मात दी। पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के एसवी संकानूर ने कांग्रेस के मोहन लिम्बिकाई को हराया।

बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जेडीएस के एपी रंगनाथ ने कांग्रेस के मौजूदा एमएलसी पुट्टन्ना को 908 मतों से पराजित किया।

इन नतीजों ने कर्नाटक की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने राज्य में जीत हासिल की थी, लेकिन विधान परिषद के इन चुनावों में पार्टी चारों सीटों पर पिछड़ गई। हालांकि, शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के सीमित वर्ग के मतदान के आधार पर पूरे राज्य के राजनीतिक रुझान का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

महाराष्ट्र में पांच सीटों पर नजर

महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों के चुनाव में भी भाजपा और महायुति गठबंधन के प्रदर्शन पर नजर रही। उपलब्ध रिपोर्ट में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की एक सीट पर महायुति की जीत का उल्लेख किया गया था, जबकि अन्य सीटों की मतगणना जारी होने की जानकारी दी गई थी।

इन सीटों के अंतिम परिणाम सामने आने के बाद ही राज्य में भाजपा, उसके सहयोगियों और विपक्षी दलों के प्रदर्शन का पूरा आकलन किया जा सकता है।

बैलेट पेपर के नतीजों से फिर क्यों तेज हुई EVM पर बहस?

विपक्षी गठबंधन INDIA के कई नेता पहले भी ईवीएम से मतदान कराने पर सवाल उठाते रहे हैं और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करते रहे हैं। इन विधान परिषद चुनावों में बैलेट पेपर का इस्तेमाल होने के बाद भाजपा और एनडीए के प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई।

भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बैलेट पेपर से हुए चुनावों में भी कांग्रेस को सफलता नहीं मिली। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव जीतने के लिए जनता का भरोसा हासिल करना जरूरी है।

दूसरी ओर, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग का समर्थन किया और कहा कि उनकी पार्टी नई कार्ययोजना के साथ आगे आएगी। कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर भाजपा पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि इससे सत्तारूढ़ दल को फायदा पहुंच सकता है।

ये बयान राजनीतिक दलों के अपने-अपने पक्ष को दर्शाते हैं। केवल इन चुनाव परिणामों के आधार पर ईवीएम या बैलेट पेपर की विश्वसनीयता के बारे में निर्णायक निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए चुनाव प्रक्रिया, मतगणना और किसी भी कथित अनियमितता से जुड़े ठोस साक्ष्यों का अलग से मूल्यांकन जरूरी है।

2027 के विधानसभा चुनाव पर क्या होगा असर?

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विधान परिषद के परिणाम भाजपा और समाजवादी पार्टी के लिए संगठनात्मक प्रदर्शन का एक संकेत हो सकते हैं। बिहार में अलग-अलग दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत राज्य की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को दर्शाती है, जबकि कर्नाटक में कांग्रेस की हार ने पार्टी के सामने आत्ममंथन का सवाल खड़ा किया है।

फिर भी, विधान परिषद चुनावों में मतदाता सीमित निर्वाचन क्षेत्रों से आते हैं और उनका सामाजिक एवं राजनीतिक आधार आम विधानसभा चुनावों से अलग होता है। इसलिए इन नतीजों से आगामी विधानसभा चुनावों की जीत-हार का सीधा अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी।

सत्य रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध चुनावी रिपोर्टों और राजनीतिक नेताओं के बयानों पर आधारित है। जहां मतगणना या परिणामों की स्थिति स्पष्ट नहीं थी, वहां उसे अंतिम नतीजे के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।

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