Satya Report: मार्च तिमाही में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार से भारी निकासी की, लेकिन इसके बावजूद कुछ खास शेयरों में उन्होंने निवेश बढ़ाया. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, FIIs ने कम से कम 10 कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी 2% से ज्यादा बढ़ाई है. इससे साफ है कि निवेशक पूरी तरह बाहर नहीं हुए, बल्कि अब चुनिंदा कंपनियों पर फोकस कर रहे हैं.

किन वजहों से हुई बड़ी बिकवाली?
ग्लोबल स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और जियो-पॉलिटिकल तनाव ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है. Brent Crude की कीमतें $100 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं, वहीं अमेरिका में बॉन्ड यील्ड करीब 4.5% तक पहुंच गई है. इसके अलावा रुपये की कमजोरी ने भी डॉलर में निवेश करने वाले निवेशकों के रिटर्न को प्रभावित किया है. इन्हीं कारणों से FIIs ने भारतीय बाजार से ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा की निकासी की.
रिटेल और फाइनेंस सेक्टर में दिखा भरोसा
हालांकि बाजार में दबाव है, लेकिन कुछ सेक्टर्स में FIIs का भरोसा कायम है. विशाल मेगा मार्ट में विदेशी हिस्सेदारी 6.48% बढ़कर 22% हो गई. होम फर्स्ट फाइनेंस कंपनी इंडिया में 4.9% की बढ़त के साथ 45.72%, मैक्स फाइनेंशियल सर्विसेज में हिस्सेदारी 2.75% बढ़कर 47.88%., यह संकेत देता है कि रिटेल और हाउसिंग जैसे सेक्टर्स में लंबी अवधि की ग्रोथ की उम्मीद बनी हुई है.
मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल कंपनियों पर नजर
इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी निवेश बढ़ा है. APL अपोलो ट्यूब्स में 4.4% की बढ़ोतरी, क्लीन साइंस एंड टेक्नोलॉजी में 3.37% की बढ़त, UPL लिमिटेड में भी हिस्सेदारी बढ़ी. इसके अलावा द ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी, इंडियन एनर्जी एक्सचेंज और टाटा एलेक्सी जैसे शेयरों में भी विदेशी निवेशकों ने दिलचस्पी दिखाई है.
क्या बदल रहा है निवेश का तरीका?
विशेषज्ञों का मानना है कि अब FIIs पूरे बाजार में पैसा लगाने के बजाय स्टॉक पिकिंग की रणनीति अपना रहे हैं. यानी वे उन कंपनियों को चुन रहे हैं जिनकी कमाई मजबूत है और जिनमें भविष्य में ग्रोथ की संभावना ज्यादा है. भारत की तुलना में साउथ कोरिया और ताइवान जैसे बाजार फिलहाल ज्यादा आकर्षक लग रहे हैं, इसलिए निवेश का रुख थोड़ा बदला है.
आगे क्या रहेगा असर?
आने वाले समय में FIIs का रुख काफी हद तक वेस्ट एशिया की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगा. अगर हालात सामान्य होते हैं, तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है. कुल मिलाकर, भले ही FIIs ने बड़े पैमाने पर पैसा निकाला हो, लेकिन मजबूत कंपनियों में उनका भरोसा बना हुआ है. यह संकेत देता है कि बाजार में चुनिंदा निवेश के मौके अभी भी मौजूद हैं. .



