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जबलपुर​​​​​ के रेस्टोरेंट में टाॅयलेट के पानी से बन रहा था खाना रेलवे यात्रियों तक भी पहुंच रहे थे भोजन के पैकेट

जबलपुर​​​​​ के रेस्टोरेंट में टाॅयलेट के पानी से बन रहा था खाना रेलवे यात्रियों तक भी पहुंच रहे थे भोजन के पैकेट

जबलपुर, मध्य प्रदेश: बाहर से खाना मंगाने और ट्रेन में मिलने वाले भोजन पर भरोसा करने वाले यात्रियों के लिए जबलपुर से एक चिंताजनक मामला सामने आया है। सिविल लाइंस स्थित सिद्धि विनायक रेस्टोरेंट में खाद्य प्रशासन विभाग की जांच के दौरान रसोई में गंभीर गंदगी और स्वच्छता संबंधी खामियां मिलीं। जांच में सामने आया कि वहां बाथरूम के पानी से सब्जियां धोकर भोजन तैयार किया जा रहा था। इतना ही नहीं, इस रेस्टोरेंट से तैयार भोजन के पैकेट रेल यात्रियों तक पहुंचाए जाने की जानकारी भी मिली है।

छापेमारी में सामने आईं गंभीर खामियां

खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने 30 अक्टूबर को दक्षिण सिविल लाइंस स्थित सिद्धि विनायक रेस्टोरेंट में छापेमारी की थी। खाद्य सुरक्षा अधिकारी अमित गुप्ता की टीम को रसोई में साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन नहीं होता मिला। जांच के दौरान बाथरूम के पानी से सब्जियां धोकर खाना तैयार किए जाने की बात सामने आई।

खाद्य सुरक्षा मानकों और लाइसेंस की शर्तों के उल्लंघन को देखते हुए विभाग ने रेस्टोरेंट का लाइसेंस निलंबित कर दिया और प्रतिष्ठान को सील कर दिया।

रेल यात्रियों तक कैसे पहुंच रहे थे भोजन के पैकेट?

इस कार्रवाई में एक और गंभीर पहलू सामने आया। बताया गया कि रेस्टोरेंट से तैयार भोजन के पैकेट रेल यात्रियों तक पहुंचाए जा रहे थे, जबकि यह प्रतिष्ठान रेलवे या IRCTC की अधिकृत सूची में शामिल नहीं था। उसे रेल यात्रियों के लिए भोजन तैयार करने या उसकी आपूर्ति करने की अनुमति भी नहीं मिली थी।

इससे रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में सक्रिय अवैध वेंडरों के नेटवर्क पर सवाल खड़े हो गए हैं। आशंका है कि कुछ वेंडर छोटे रेस्टोरेंट और बेस किचन से भोजन के पैकेट लेकर ट्रेनों में यात्रियों को बेचते हैं।

बेस और क्लाउड किचन की निगरानी पर सवाल

जबलपुर और कटनी रेलवे स्टेशन के आसपास छोटे बेस किचन और क्लाउड किचन के जरिए भोजन की आपूर्ति किए जाने की बात भी सामने आई है। ऐसे ठिकानों से जुड़े प्रतिष्ठानों की स्वच्छता, खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और भंडारण व्यवस्था की नियमित जांच नहीं होने पर यात्रियों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

बताया गया है कि इससे पहले भी जांच के दौरान सिविल लाइंस क्षेत्र में रेल यात्रियों तक अवैध रूप से भोजन पहुंचाने वाला एक बेस किचन सामने आया था। ऐसे नेटवर्क में भोजन तैयार करने वाले प्रतिष्ठान, पैकेट पहुंचाने वाले वेंडर और ट्रेनों में उन्हें बेचने वाले लोग शामिल हो सकते हैं।

दूषित भोजन से यात्रियों की सेहत को खतरा

अस्वच्छ रसोई, दूषित पानी और खराब खाद्य सामग्री से तैयार भोजन खाने पर उल्टी-दस्त और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबी दूरी की ट्रेन यात्रा के दौरान तबीयत बिगड़ने पर यात्रियों को तत्काल चिकित्सा सहायता मिलने में भी परेशानी हो सकती है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से अस्वस्थ यात्रियों के लिए ऐसा भोजन अधिक जोखिम पैदा कर सकता है।

जबलपुर स्टेशन पर खानपान की बड़ी व्यवस्था

जबलपुर जंक्शन से प्रतिदिन 130 से अधिक यात्री ट्रेनें गुजरती हैं। स्टेशन पर छह खाद्य प्रतिष्ठान और 25 से अधिक फूड स्टॉल संचालित हैं। इसके अलावा खाद्य सामग्री बेचने के लिए रेलवे से करीब 270 वेंडरों को लाइसेंस प्राप्त है।

वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक शशांक गुप्ता के अनुसार, यात्रियों को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने के लिए अधिकृत फूड स्टॉल और प्लाजा की समय-समय पर जांच की जाती है। अवैध वेंडरों के खिलाफ रेलवे सुरक्षा बल के साथ मिलकर कार्रवाई भी की जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि खाद्य विभाग की कार्रवाई में सामने आया सिद्धि विनायक रेस्टोरेंट रेलवे को भोजन की आपूर्ति करने के लिए अधिकृत नहीं था।

रेलवे और IRCTC ने भी अधिकृत इकाई होने से किया इनकार

सिद्धि विनायक रेस्टोरेंट से जुड़े मामले के संदर्भ में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह प्रतिष्ठान रेलवे या IRCTC की लाइसेंस प्राप्त इकाई नहीं है। रेलवे की ओर से इसे यात्रियों के लिए भोजन तैयार करने या आपूर्ति करने का कोई लाइसेंस नहीं दिया गया था। इसके साथ ही रेस्टोरेंट संचालक की ओर से रेलवे के साथ किसी आधिकारिक कैटरिंग अनुबंध का दावा भी निराधार बताया गया है।

इस मामले ने ट्रेनों में बिकने वाले भोजन की गुणवत्ता और अवैध वेंडरों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यात्रियों को भोजन खरीदते समय अधिकृत विक्रेताओं से ही खाद्य सामग्री लेने की सावधानी बरतनी चाहिए।

Satya Report: यह खबर उपलब्ध जानकारी और संबंधित अधिकारियों के बयानों के आधार पर तैयार की गई है। खाद्य सुरक्षा और आपूर्ति व्यवस्था से जुड़े मामले में संबंधित विभागों की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

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