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PMIS: PM इंटर्नशिप स्कीम में युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी, अब हर महीने मिलेंगे 9 हजार रुपये

Satya Report: सरकार ने प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) में बड़ा बदलाव करते हुए युवाओं के लिए इसे और आकर्षक बना दिया है. अब इस योजना के तहत इंटर्नशिप करने वाले उम्मीदवारों को हर महीने 9,000 रुपये की वित्तीय सहायता मिलेगी, जो पहले 5,000 रुपये थी. साथ ही पात्रता मानदंडों में भी ढील दी गई है, जिससे अब अंतिम वर्ष के स्नातक और स्नातकोत्तर छात्र भी आवेदन कर सकेंगे. उम्र सीमा को बढ़ाकर 18 से 25 वर्ष कर दिया गया है. सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक युवा पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव हासिल कर सकें और रोजगार के लिए बेहतर तरीके से तैयार हों.

PMIS: PM इंटर्नशिप स्कीम में युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी, अब हर महीने मिलेंगे 9 हजार रुपये
PMIS: PM इंटर्नशिप स्कीम में युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी, अब हर महीने मिलेंगे 9 हजार रुपये

कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) में महत्वपूर्ण बदलावों की घोषणा की है, जिससे युवाओं को रोजगार से पहले व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने के बेहतर अवसर मिलेंगे. योजना के तहत अब इंटर्न को प्रति माह 9,000 रुपये का वजीफा मिलेगा, जिसमें से 90% राशि सरकार द्वारा वहन की जाएगी. पहले यह राशि 5,000 रुपये प्रति माह थी. इसके अलावा इंटर्न को 6,000 रुपये की अतिरिक्त वित्तीय सहायता दो किस्तों में दी जाएगी. .

उम्र सीमा में हुआ बदलाव

सबसे अहम बदलाव पात्रता मानदंडों में किया गया है. अब 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के उम्मीदवार इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं, जबकि पहले यह सीमा 21 से 24 वर्ष थी. इसके साथ ही, अंतिम वर्ष के स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों को भी योजना में शामिल किया गया है. हालांकि, ऐसे छात्रों को अपने संस्थान से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) देना अनिवार्य होगा, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि इंटर्नशिप उनकी पढ़ाई में बाधा नहीं बनेगी.

यह योजना छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही उद्योगों में काम करने का अवसर देती है, जिससे वे अपनी सैद्धांतिक पढ़ाई को वास्तविक अनुभव से जोड़ सकें. सरकार का मानना है कि इससे युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ेगी और उन्हें नौकरी के लिए बेहतर तरीके से तैयार किया जा सकेगा. योजना को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के लक्ष्यों के अनुरूप तैयार किया गया है, जिसमें अनुभव आधारित शिक्षा और इंडस्ट्री एक्सपोजर पर जोर दिया गया है. इसके तहत ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs), नवीकरणीय ऊर्जा और सेमीकंडक्टर जैसे उभरते क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है.

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