ब्रिक्स समिट 2026 के गाला डिनर में भारत की कई अलगअलग डिशेज मेहमानों को परोसी गई हैं. इसमें गुच्छी मशरूम भी शामिल है, जो जम्मूकश्मीर से लेकर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में पाया जाता है. हालांकि खासकर ये हिमालय के शंकुधारी जंगलों में बर्फ पिघलने के बाद मार्च से जून के बीच उगता है. ये दुनिया के सबसे महंगे मशरूमों में से एक है. दरअसल इसकी न्यूट्रिशनल वैल्यू हाई है और इसकी खेती नहीं की जाती है. ये मशरूम पहाड़ों में दुर्गम जगहों पर प्राकृतिक रूप से पाया जाता है और इसी वजह से इसके मिलने का समय भी सीमित ही होता है.

ब्रिक्स में परोसे गए गुच्छी मशरूम को केसर, किशमिश, मामरा बादाम के साथ बनाया गया था, जिससे न सिर्फ इसका जायका बढ़ा होगा, बल्कि पोषण भी भरपूर है. ये मशरूम क्वालिटी के हिसाब से 50 हजार रुपये किलो तक बिकता है. चलिए जान लेते हैं गुच्छी मशरूम के पोषक तत्वों और इसके फायदों के बारे में.
बनावट और स्वाद भी है खास
गुच्छी मशरूम को मोरल मशरूम के नाम से भी जाना जाता है. इसका साइंटफिक नाम मोर्चेला है जो मोरचेलेसी फैमिली से आता है. इसकी बनावट स्पंजी, मधुमक्खी के छत्ते जैसी होती है. अंदर के खोखले हिस्से और स्पंजी बनावट के कारण, ये मशरूम “मांसल” स्वाद जैसा होता है. वहीं नेचुरली उगने की वजह से इसका अरोमा भी बेहद यूनिक होता है.
पोषक तत्वों का भंडार गुच्छी मशरूम
में दी गई जानकारी के मुताबिक, मोरल्स मशरूम या गुच्छी मशरूम का पोषण मूल्य बहुत अधिक है. मुख्य रूप से इसलिए क्योंकि ये प्रोटीन, फाइबर, आवश्यक विटामिन और खनिजों से भरपूर होते हैं और इनमें कैलोरी और वसा कम होती है. मोरल्स मशरूम में प्रोटीन, हेल्दी कार्बोहाइड्रेट, कच्चा फाइबर काफी अच्छी मात्रा में होता है. हालांकि प्रजातियों, विकास क्षेत्र, और अन्य पर्यावरणीय परिस्थितियों के मुताबिक न्यूट्रिएंट्स की मात्रा अलगअलग हो सकती है. इन मशरूम में कई फैटी एसिड्स से लेकर विटामिन भी पाए जाते हैं और बायोएक्टिव कंपाउंड भी होते हैं.
गुच्छी मशरूम के फायदे
के मुताबिक, मोरल मशरूम अपनी न्यूट्रिशनल वेल्यू की वजह से आपके दिल औरप पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद होते हैं. ये डायबिटिक लोगों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि ग्लूकोज कम होता है. ये आपके शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने में भी मदद करता है, क्योंकि आयरन से भरपूर है. इसी के साथ ये विटामिन डी का भी सोर्स होता है, क्योंकि इसमें विटामिन डी पाया जाता है.
सावधानियां बरतना है जरूरी
गुच्छी मशरूम पहाड़ों पर बर्फीली जगहों और जंगलों में उगता है. ऐसे में जरूरी है कि आपको इसकी सही पहचान हो. इससे मिलतेजुलते दूसरे कवक सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं. अगर ये तुरंत उपलब्ध हैं तो कोशिश करें कि ये ताजे ही बनाकर खाएं. मशरूम को लाने के बाद बहते पानी में धोएं ताकि सारी अशुद्धियां निकल जाएं. इसके बाद साफ तौलिये से पोंछने के बाद ही पकाएं.



