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माचू​​​ पिच्चू का​​​​​ इतिहास और रहस्य, पहाड़ों के बीच कैसे बसाया गया था 600 साल पुराना यह शहर? जानिए 15 रोचक तथ्य

माचू​​​ पिच्चू का​​​​​ इतिहास और रहस्य, पहाड़ों के बीच कैसे बसाया गया था 600 साल पुराना यह शहर? जानिए 15 रोचक तथ्य

माचू पिच्चू का निर्माण किसने करवाया था?

इतिहासकारों के अनुसार, माचू पिच्चू का निर्माण 15वीं शताब्दी के मध्य में इंका साम्राज्य के शासक पचाकुटी (Pachacuti) के शासनकाल में कराया गया था। माना जाता है कि इसका इस्तेमाल शाही निवास, धार्मिक अनुष्ठानों और प्रशासनिक गतिविधियों के लिए किया जाता था।

इंका सभ्यता दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी हिस्से में फैला एक शक्तिशाली साम्राज्य था। इसकी राजधानी कुस्को (Cusco) थी, जो वर्तमान में पेरू का एक प्रमुख ऐतिहासिक शहर है।

माचू पिच्चू को इस तरह बनाया गया था कि पहाड़ की प्राकृतिक बनावट और इमारतों का निर्माण एक-दूसरे के साथ मेल खाते थे। यहां की दीवारें, सीढ़ियां और पत्थरों से बने रास्ते आज भी इंका लोगों की इंजीनियरिंग क्षमता की गवाही देते हैं।

पहाड़ की चोटी पर कैसे बनाया गया इतना शानदार शहर?

माचू पिच्चू की सबसे बड़ी खासियत इसका निर्माण है। यह शहर एक ऊंची पहाड़ी की संकरी चोटी पर बनाया गया था। इसके आसपास गहरी घाटियां और खड़ी पहाड़ियां हैं।

यहां की इमारतों को बनाने में बड़े-बड़े पत्थरों का इस्तेमाल किया गया था। खास बात यह है कि कई पत्थरों को बिना सीमेंट या गारे के एक-दूसरे के साथ इस तरह जोड़ा गया है कि उनके बीच बहुत कम जगह बचती है।

पत्थरों को काटकर और तराशकर एक-दूसरे के आकार के अनुसार फिट किया गया था। इस तकनीक के कारण दीवारें आज भी काफी हद तक सुरक्षित हैं।

माना जाता है कि इंका निर्माणकर्ताओं ने भूकंप के खतरे को ध्यान में रखकर भी अपनी वास्तुकला विकसित की थी। पत्थरों के बीच गारे का इस्तेमाल न होने के कारण हल्के झटकों के दौरान वे कुछ हद तक हिल सकते हैं और फिर अपनी जगह पर बैठ जाते हैं।

माचू पिच्चू में बनी थी पानी और खेती की शानदार व्यवस्था

यहां सिर्फ इमारतें ही नहीं बनाई गई थीं, बल्कि लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पानी और खेती की भी व्यवस्थित योजना तैयार की गई थी।

पहाड़ी की ढलानों पर सीढ़ियों जैसी संरचनाएं बनाई गई थीं, जिन्हें कृषि छतें (Agricultural Terraces) कहा जाता है। इनका इस्तेमाल खेती करने और पहाड़ी की मिट्टी को बहने से बचाने के लिए किया जाता था।

इसके अलावा प्राकृतिक जलस्रोतों से पानी लाने के लिए नहरों और जल निकासी की व्यवस्था बनाई गई थी। इस तरह ऊंचाई पर बसे होने के बावजूद यहां रहने वाले लोगों के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता था।

1911 में दुनिया के सामने कैसे आया माचू पिच्चू?

माचू पिच्चू को लंबे समय तक बाहरी दुनिया में बहुत कम लोग जानते थे। हालांकि, आसपास रहने वाले स्थानीय लोगों को इस प्राचीन स्थल की जानकारी थी।

साल 1911 में अमेरिकी इतिहासकार और खोजकर्ता हीरम बिंघम (Hiram Bingham) यहां पहुंचे। स्थानीय लोगों की मदद से उन्होंने इन प्राचीन खंडहरों तक पहुंच बनाई और इस स्थल का अध्ययन किया।

24 जुलाई 1911 को उनके अभियान के दौरान माचू पिच्चू अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया। इसके बाद यहां पुरातात्विक अध्ययन और खुदाई का काम शुरू हुआ।

इसलिए यह कहना अधिक सही होगा कि हीरम बिंघम ने इसे दुनिया के सामने प्रसिद्ध किया, न कि स्थानीय लोगों से पहले इसकी खोज की।

माचू पिच्चू को क्यों छोड़कर चले गए थे लोग?

माचू पिच्चू से जुड़ा एक बड़ा सवाल यह है कि यहां रहने वाले लोग अचानक इसे छोड़कर क्यों चले गए?

इतिहासकारों के अनुसार, 16वीं शताब्दी में स्पेनिश आक्रमण के बाद इंका साम्राज्य का पतन शुरू हुआ। साल 1533 में स्पेनियों ने इंका राजधानी कुस्को पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद साम्राज्य की राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई।

माचू पिच्चू भी धीरे-धीरे वीरान हो गया। हालांकि, इसके खाली होने का सटीक कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। साम्राज्य के पतन, आबादी के स्थानांतरण और पुराने प्रशासनिक ढांचे के टूटने जैसी परिस्थितियों को इसके पीछे संभावित वजह माना जाता है।

एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि स्पेनिश विजेताओं को माचू पिच्चू का पता नहीं चला था। इसी वजह से यहां की कई प्राचीन इमारतें और संरचनाएं लंबे समय तक सुरक्षित रहीं।

माचू पिच्चू की रहस्यमयी जगहें

माचू पिच्चू में लगभग 200 संरचनाएं मौजूद हैं। इनमें आवासीय इमारतें, धार्मिक स्थल, समारोहों के स्थान और कृषि क्षेत्र शामिल हैं।

1. सूर्य मंदिर (Temple of the Sun): यह माचू पिच्चू की प्रमुख धार्मिक संरचनाओं में से एक है। इसकी बनावट और खिड़कियों की दिशा से पता चलता है कि इंका लोग सूर्य की स्थिति और खगोलीय घटनाओं को महत्व देते थे।

2. इंटीहुआताना पत्थर (Intihuatana): यह एक विशेष रूप से तराशा गया पत्थर है। इसका नाम आमतौर पर सूर्य को बांधने वाले स्तंभ के अर्थ में समझाया जाता है। माना जाता है कि इसका संबंध सूर्य की स्थिति और समय की गणना से रहा होगा।

3. कृषि छतें: पहाड़ों की ढलानों पर बनी ये सीढ़ीनुमा संरचनाएं खेती के साथ-साथ मिट्टी के कटाव को रोकने में भी मदद करती थीं।

4. मुख्य चौक: माचू पिच्चू का केंद्रीय खुला क्षेत्र शहर के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ता था। इसके आसपास धार्मिक और आवासीय संरचनाएं मौजूद हैं।

5. हुआयना पिच्चू पर्वत: माचू पिच्चू के पीछे दिखाई देने वाली यह ऊंची पहाड़ी इस पूरे क्षेत्र की पहचान बन चुकी है। इसकी चोटी से आसपास की घाटियों और प्राचीन नगर का शानदार दृश्य दिखाई देता है।

माचू पिच्चू से जुड़े 15 रोचक तथ्य

1. पेरू में स्थित है: माचू पिच्चू दक्षिण अमेरिका के पेरू देश के कुस्को क्षेत्र में स्थित है।

2. 2,430 मीटर की ऊंचाई: यह समुद्र तल से लगभग 2,430 मीटर ऊपर एक पहाड़ी क्षेत्र में बसा हुआ है।

3. 15वीं शताब्दी में निर्माण: इसका निर्माण इंका साम्राज्य के उत्कर्ष के समय हुआ था। इसकी प्रमुख संरचनाएं लगभग 1450 ईस्वी के आसपास की मानी जाती हैं।

4. इंका शासक से संबंध: इतिहासकार इसे इंका शासक पचाकुटी के शासनकाल से जोड़ते हैं। इसे शाही निवास या विशेष समारोहों के केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा होगा।

5. लगभग 200 संरचनाएं: इस प्राचीन नगर में घरों, मंदिरों, समारोह स्थलों और अन्य उपयोगी इमारतों सहित करीब 200 संरचनाएं मौजूद हैं।

6. बिना गारे की दीवारें: यहां कई दीवारें विशाल पत्थरों को आपस में जोड़कर बनाई गई हैं। इनके निर्माण में आधुनिक सीमेंट या गारे का इस्तेमाल नहीं किया गया था।

7. सीढ़ीनुमा खेती: पहाड़ों पर बनी कृषि छतें इंका लोगों की खेती और जल प्रबंधन की समझ को दिखाती हैं।

8. पानी पहुंचाने की व्यवस्था: प्राकृतिक जलस्रोतों से पानी लाने के लिए यहां नहरों और जल निकासी की व्यवस्था बनाई गई थी।

9. स्थानीय लोगों को पहले से जानकारी थी: 1911 से पहले भी आसपास रहने वाले लोग इस प्राचीन स्थल को जानते थे। हीरम बिंघम ने इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।

10. स्पेनियों को नहीं मिला था इसका पता: इंका साम्राज्य पर स्पेनिश विजय के बावजूद माचू पिच्चू का स्थान लंबे समय तक उनके सामने नहीं आया।

11. 1983 में यूनेस्को की विश्व धरोहर: माचू पिच्चू को साल 1983 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था।

12. 2007 में दुनिया के नए सात अजूबों में शामिल: इसे साल 2007 में आयोजित वैश्विक जनमत अभियान के तहत दुनिया के नए सात अजूबों में शामिल किया गया था। यह सम्मान यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची से अलग है।

13. माचू पिच्चू का अर्थ: स्थानीय क्वेचुआ भाषा में माचू पिच्चू का अर्थ लगभग ‘पुराना पर्वत’ या ‘पुरानी चोटी’ होता है।

14. धार्मिक और खगोलीय महत्व: यहां मौजूद इंटीहुआताना पत्थर और सूर्य मंदिर बताते हैं कि इंका सभ्यता में सूर्य और खगोलीय घटनाओं का विशेष महत्व था।

15. प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर: माचू पिच्चू केवल एक पुरातात्विक स्थल नहीं है। इसके आसपास का पहाड़ी जंगल, वनस्पतियां और जीव-जंतु भी इसे खास बनाते हैं।

माचू पिच्चू आज भी क्यों है दुनिया के लिए खास?

माचू पिच्चू को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि सदियों पहले इंका सभ्यता के लोग निर्माण, खेती, पानी के प्रबंधन और प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुसार शहर बसाने में कितने कुशल थे।

आज भी इसके निर्माण से जुड़े कई सवालों पर शोध किया जा रहा है। हालांकि, इसे पूरी तरह अनसुलझा शहर कहना सही नहीं होगा। इसके निर्माण का समय, इंका सभ्यता से संबंध और कई प्रमुख संरचनाओं का उद्देश्य इतिहासकारों को काफी हद तक समझ में आ चुका है।

साल 1983 में इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। आज यह पेरू की पहचान और दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है।

डिस्क्लेमर: माचू पिच्चू के निर्माण और उपयोग से जुड़ी जानकारी पुरातात्विक अध्ययनों पर आधारित है। इसके कुछ उद्देश्यों और वीरान होने के कारणों को लेकर इतिहासकारों के बीच अभी भी अलग-अलग मत हैं।

— Satya Report

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