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लंदन​​​ से हर महीने आता था मकान का किराया, अब 19 महीने से बंद पड़ा है सौरभ राजपूत का घर; चाबी गायब होने से बढ़ी मुश्किल

लंदन​​​ से हर महीने आता था मकान का किराया, अब 19 महीने से बंद पड़ा है सौरभ राजपूत का घर; चाबी गायब होने से बढ़ी मुश्किल

मेरठ, उत्तर प्रदेश: सौरभ राजपूत हत्याकांड के बाद मेरठ के ब्रह्मपुरी क्षेत्र स्थित इंदिरा नगर का वह किराये का मकान करीब 19 महीने से बंद पड़ा है, जहां उनकी हत्या कर शव को नीले ड्रम में छिपा दिया गया था। अब मकान को खाली कराने की प्रक्रिया में एक नई परेशानी सामने आई है। मकान पर पुलिस की ओर से लगाए गए तालों की चाबियां नहीं मिल रही हैं। दूसरी ओर, सौरभ के परिजन भी कानूनी प्रक्रिया पूरी किए बिना घर के अंदर रखा सामान लेने को तैयार नहीं हैं।

इस स्थिति से मकान मालिक ओमपाल सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनका मकान लंबे समय से बंद है, किराया भी नहीं मिल रहा और वह उसका इस्तेमाल भी नहीं कर पा रहे हैं। मकान खाली कराने के लिए वह पुलिस अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं।

साढ़े तीन साल पहले किराये पर दिया था मकान

मकान मालिक ओमपाल सिंह के मुताबिक, उन्होंने करीब साढ़े तीन साल पहले सौरभ राजपूत और मुस्कान को यह मकान किराये पर दिया था। शुरुआत में किराया 3,500 रुपये प्रतिमाह था, जो मार्च 2025 तक बढ़कर करीब 8,000 रुपये हो गया था।

बताया गया है कि सौरभ लंदन से हर महीने ऑनलाइन माध्यम से मकान का किराया ओमपाल के बैंक खाते में भेजते थे। लेकिन हत्याकांड के बाद से मकान बंद होने के कारण मकान मालिक को किराया नहीं मिल रहा है। लंबे समय तक बंद रहने से मकान की हालत भी खराब होने की चिंता बनी हुई है।

3 मार्च को हुई थी हत्या, 17 मार्च से मकान सील

जानकारी के मुताबिक, सौरभ, मुस्कान और उनकी बेटी पीहू मकान के एक हिस्से में रहते थे। 3 मार्च 2025 को इसी घर में सौरभ की हत्या की गई थी। इसके बाद 17 मार्च 2025 से मकान सील कर दिया गया।

मामले ने उस समय व्यापक चर्चा बटोरी थी, जब सौरभ का शव नीले ड्रम में छिपाए जाने की जानकारी सामने आई। अब घटना के काफी समय बाद भी मकान बंद है और उसे खाली कराने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है।

पुलिस को नहीं मिल रहीं तालों की चाबियां

मकान मालिक चाहते हैं कि घर खाली कराकर उन्हें वापस सौंप दिया जाए। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने मकान पर दो ताले लगाए थे, लेकिन अब उनकी चाबियां तलाशने में परेशानी हो रही है। अधिकारियों के निर्देश पर चाबियां खोजने का प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली।

ब्रह्मपुरी थाना प्रभारी राजेश कांबोज के मुताबिक, चाबियों की तलाश की जा रही है। पुलिस के सामने यह सवाल भी है कि यदि ताले तोड़कर घर खोला जाता है, तो अंदर मौजूद सामान किसे सौंपा जाए और उसकी सूची कैसे तैयार की जाए।

परिजनों ने सामान लेने के लिए रखी शर्त

सौरभ की मां रेनू और भाई राहुल ने घर के अंदर रखा सामान लेने को लेकर अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि वे पुलिस और मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामान लेंगे। इसके लिए घर खोलते समय रिकॉर्डिंग कराने और अंदर मौजूद सभी वस्तुओं की विधिवत सूची तैयार करने की मांग की गई है।

परिजनों को आशंका है कि सामान को लेकर बाद में कोई आरोप-प्रत्यारोप न हो। इसलिए वे चाहते हैं कि हर वस्तु का विवरण दर्ज किया जाए और पूरी प्रक्रिया पुलिस की निगरानी में हो।

मकान मालिक की बढ़ती परेशानी

ओमपाल सिंह का कहना है कि उन्हें अतिरिक्त रकम नहीं चाहिए, बल्कि वह चाहते हैं कि उनका मकान खाली कराकर उन्हें सौंप दिया जाए। लंबे समय से मकान बंद रहने के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान और संपत्ति के रखरखाव की चिंता है।

फिलहाल चाबियों की तलाश, घर के अंदर रखे सामान की जिम्मेदारी और कानूनी प्रक्रिया को लेकर मामला अटका हुआ है। अब देखना होगा कि पुलिस किस तरह इन अड़चनों को दूर कर मकान खाली कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाती है।

Satya Report नोट: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। मकान खोलने और सामान सौंपने की प्रक्रिया से जुड़ी आगे की जानकारी संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई के बाद स्पष्ट होगी।

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