
भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारियों के इस्तीफे और उनकी दोबारा सेवा में वापसी को लेकर प्रशासनिक गलियारों में नियम काफी स्पष्ट लेकिन पेचीदे हैं। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन के अनुसार, यदि कोई आईएएस अधिकारी अपने पद से इस्तीफा देता है, तो उस इस्तीफे को मंजूर किए जाने की प्रक्रिया काफी लंबी होती है। इस पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया के दौरान यदि अधिकारी का मन बदल जाता है, तो वह वापसी के लिए आवेदन कर सकता है। हालांकि, एक बार सरकार द्वारा इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिए जाने के बाद अधिकारी के लिए दोबारा सेवा में लौटना कानूनी और प्रशासनिक तौर पर असंभव हो जाता है।
चर्चा में क्यों आया दिव्या मित्तल का मामला? हाल ही में यूपी कैडर की चर्चित आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के इस्तीफे से जुड़े घटनाक्रम ने इस बहस को फिर से हवा दे दी है कि क्या नौकरशाह प्रशासनिक सेवा छोड़कर दोबारा लौट सकते हैं। हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब किसी आईएएस के इस्तीफे और वापसी का मामला सुर्खियों में आया हो। इससे पहले भी कई ऐसे हाई-प्रोफाइल मामले सामने आ चुके हैं जहां अधिकारियों ने अपने पदों से त्यागपत्र दिया, लेकिन अलग-अलग कारणों से उनके मामले लंबे समय तक लंबित रहे या उन्होंने यू-टर्न ले लिया।
अनीश शेखर और शाह फैसल के चर्चित उदाहरण तमिलनाडु कैडर के 2011 बैच के आईएएस अधिकारी अनीश शेखर ने निजी कारणों का हवाला देते हुए 29 फरवरी 2024 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन इस्तीफा स्वीकार होने से पहले ही स्थिति बदली और उसी साल मई के महीने में वे वापस आईएएस सेवा में लौट आए। इसी प्रकार, यूपीएससी के टॉपर रह चुके शाह फैसल ने सिविल सेवा से इस्तीफा देकर राजनीति में कदम रखा था और अपनी पार्टी भी बनाई थी। चूंकि उनका इस्तीफा समय पर स्वीकार नहीं हुआ था, इसलिए उन्होंने बाद में राजनीति से किनारा कर लिया और तीन साल के अंतराल के बाद दोबारा आईएएस सेवा में अपनी सेवाएं देनी शुरू कर दीं।
पेंडिंग इस्तीफों पर सियासत और अजीब स्थिति अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 के तहत सरकारी कर्मचारी सक्रिय राजनीति में हिस्सा नहीं ले सकते और न ही किसी राजनीतिक दल से जुड़ सकते हैं। यही वजह है कि चुनावी राजनीति में जाने के लिए अधिकारियों को इस्तीफा देना पड़ता है। कन्नन गोपीनाथन ने साल 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के विरोध में इस्तीफा दिया था और हाल ही में कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए, लेकिन केंद्र सरकार ने आज तक उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है। यही स्थिति शशिकांत सेंथिल और दौलत देसाई जैसे अधिकारियों के साथ भी रही, जिनके इस्तीफे मंजूर होने में वर्षों लग गए और इस बीच शशिकांत सेंथिल कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीतकर संसद तक पहुंच गए।



