
उत्तर प्रदेश के कानपुर के फीलखाना क्षेत्र में हुए चर्चित कपूर व्यापारी मनीष गुप्ता हत्याकांड ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। प्रेम प्रसंग के जाल में फंसकर एक पत्नी ने जिस बेरहमी से अपने ही पति को मौत के घाट उतारा, उसने रिश्तों को तार-तार कर दिया है। इस खौफनाक वारदात के बाद जहां आरोपी पत्नी सलाखों के पीछे है, वहीं मनीष के बुजुर्ग माता-पिता अपने छह साल के मासूम पोते विष्णु के भविष्य को लेकर खून के आंसू रो रहे हैं। पीड़ित पिता का दर्द छलक उठा है कि “बहू अगर तलाक ले लेती, तो कम से कम मेरे बेटे की जान तो बच जाती।”
6 साल के मासूम के सामने सीने और पेट पर ताबड़तोड़ वार
यह खौफनाक वारदात बीती 5 जून को बालाजी अपार्टमेंट में घटित हुई थी। मनीष की मां मीरा के मुताबिक, दोपहर के वक्त बहू निहारिका अपने कमरे में किसी पुरुष मित्र से फोन पर घंटों लंबी बात कर रही थी। मनीष ने जब इस बात का विरोध किया, तो दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। विवाद इस कदर बढ़ा कि बेड पर बैठे 6 साल के मासूम बेटे विष्णु के सामने ही निहारिका ने रसोई से धारदार चाकू उठाया और मनीष के पेट और कमर पर ताबड़तोड़ कई वार कर दिए।
एक हाथ से खून रोकते, दूसरे हाथ से बेटे को थामे थाने पहुंचा था मनीष
इस हमले के बाद लहूलुहान मनीष ने जो हिम्मत दिखाई, उसे देखकर पुलिस वाले भी कांप गए थे। मनीष एक हाथ से अपनी कमर से बहते खून को दबाए हुए था और दूसरे हाथ से अपने कलेजे के टुकड़े विष्णु की उंगली पकड़े हुए 500 मीटर दूर पैदल चलकर फीलखाना थाने पहुंचा। सीढ़ियों से लेकर थाने के गेट तक मनीष के खून की बूंदें बिखरी हुई थीं। वहां पहुंचकर मनीष और उसके मासूम बेटे ने निहारिका की हैवानियत बयां की। पुलिस ने तुरंत मनीष को अस्पताल भिजवाया, जहां 16 जून की सुबह इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
‘पति मिला न प्यार’… जम्मू के ‘अंग्रेज’ के चक्कर में चुनीं सलाखें
इस पूरी कहानी के पीछे की इनसाइड स्टोरी बेहद चौंकाने वाली है। निहारिका और मनीष ने साल 2017 में लव मैरिज की थी। करीब 10 साल पहले दोनों को एक-दूसरे से प्यार हुआ था। लेकिन शादी के कुछ साल बाद, यानी करीब तीन साल पहले निहारिका की जिंदगी में जम्मू के किसी ‘अंग्रेज’ नाम के युवक की एंट्री हुई। निहारिका इस पुरुष मित्र के प्यार में इस कदर अंधी हो गई कि उसने हंसते-खेलते परिवार को तबाह कर दिया। मनीष जब भी इसका विरोध करता, निहारिका उल्टा दहेज उत्पीड़न का झूठा आरोप लगाकर पुलिस बुला लेती थी। आज हालत यह है कि निहारिका जेल में है और मायके पक्ष से भी कोई उससे मिलने नहीं आया।
पुलिस की ढीली कस्टडी पर सवाल, आखिर कहां है कातिल का मोबाइल?
मनीष की मौत के बाद अब पुलिस पर लापरवाही के गंभीर आरोप लग रहे हैं। परिजनों का कहना है कि निहारिका को जेल भेज दिया गया, लेकिन पुलिस ने अभी तक वारदात की मुख्य कड़ी यानी निहारिका का मोबाइल फोन अपने कब्जे में नहीं लिया है। परिजनों का आरोप है कि मोबाइल बरामद न होने से उस ‘अंग्रेज’ नाम के प्रेमी का सुराग और चैट डिलीट होने का खतरा है। इधर, फीलखाना इंस्पेक्टर अभय सिंह का कहना है कि फिलहाल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगाली जा रही है और जल्द ही मोबाइल भी जब्त किया जाएगा।
अब बुजुर्ग दादा-दादी को सता रही है मासूम विष्णु की चिंता
मनीष अपने माता-पिता की इकलौती संतान था। उसके जाने के बाद अब बूढ़े मां-बाप बिल्कुल अकेले पड़ गए हैं। मनीष के पिता रामकिशोर ने रुआंसे गले से कहा, “हम पति-पत्नी की उम्र हो चुकी है। बहू ने हैवानियत दिखाकर हमसे हमारा बेटा छीन लिया और बच्चे के सिर से पिता का साया। अगर उसे मनीष के साथ नहीं रहना था, तो वह तलाक ले लेती। कम से कम बच्चा अनाथ तो नहीं होता। अब हमें यह चिंता खाए जा रही है कि हमारे बाद इस मासूम विष्णु का पालन-पोषण कौन करेगा।”



