
Satya Report: मुंबई सेंट्रल में कंसल्टेंट एंडोक्रिनोलॉजिस्ट और डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. प्रणव घोडी ने बताया आदर्श रूप से फास्टिंग ब्लड शुगर 100 mg/dL से कम होना चाहिए। Quora पर एक शख्स ने सवाल किया कि मेरा फास्टिंग ब्लड शुगर 111 है और HbA1c 5.5 है तो क्या ये नॉर्मल है? इस सवाल के जवाब में डॉ. प्रणव घोडी ने कहा कि 111 mg/dL का फास्टिंग ब्लड शुगर सामान्य सीमा से थोड़ा अधिक है और इसे आमतौर पर इंपेयर्ड फास्टिंग ग्लूकोज कहा जाता है, जिसे प्रीडायबिटीज भी कहा जाता है। हालांकि, HbA1c का स्तर 5.5 प्रतिशत पूरी तरह सामान्य है। क्योंकि नॉर्मल ब्लड शुगर का स्तर 5.7 प्रतिशत से कम होता है। इसका मतलब है कि पिछले 2 से 3 महीनों में आपका औसत ब्लड शुगर कंट्रोल में रहा है।
डॉक्टर ने बताया ये स्थिति थोड़ा परेशान करने वाली हो सकती है लेकिन ये असामान्य नहीं है। एक बार की फास्टिंग रेटिंग कई कारणों से प्रभावित हो सकती है जैसे तनाव, नींद की कमी, देर रात खाना खाना या हल्की बीमारी। वहीं HbA1c रिपोर्ट एक व्यापक तस्वीर पेश करती है जो बताती है कि आपका शुगर कंट्रोल में है। एक्सपर्ट ने बताया चिंता करने की बजाय इसे एक शुरुआती संकेत और सुधार का अवसर समझना चाहिए। इसका मतलब है कि आप डायबिटिक नहीं हैं, लेकिन आपके शरीर में हल्का इंसुलिन रेजिस्टेंस शुरू हो सकता है।
इस स्थिति में क्या करें?
डॉक्टर ने बताया ऐसी स्थिति में आप दवाओं पर ध्यान नहीं दें बल्कि अपने लाइफस्टाइल में बदलाव करें। नियमित शारीरिक गतिविधि जैसे रोजाना 30 से 45 मिनट तेज चलना या दूसरी एक्सरसाइज करें। बॉडी एक्टिविटी इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाती है। इस स्थिति में आपकी डाइट भी बहुत महत्वपूर्ण है। डाइट में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट का सेवन कम करें, खाने की मात्रा कंट्रोल करें। खाने में सब्जियों, साबुत अनाज और दालों का सेवन करें। खाने में फाइबर का सेवन बढ़ाएं। फाइबर रिच फूड्स का सेवन करने से ब्लड में शुगर का स्तर नॉर्मल रखने में मदद मिलती है। साथ ही अपने वजन को कंट्रोल करें। बढ़ता वजन हाई ब्लड शुगर का कारण होता है। आप अपनी नींद का ध्यान रखें। अच्छी नींद लेना और तनाव को कंट्रोल करना भी बेहद जरूरी है, जिन्हें अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। .
डॉ. घोडी सलाह देते हैं कि आप कुछ हफ्तों तक अपनी डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव करें और फिर उसके बाद फास्टिंग शुगर चेक कराएं। याद रखें कि फास्टिंग शुगर अच्छी नींद लेकर ही चेक कराएं। अगर ये सब काम के बाद भी ब्लड शुगर हाई आता है तो आप तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। जरूरत पड़ने पर पोस्ट-मील शुगर टेस्ट या ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट भी कराया जा सकता है। एक्सपर्ट ने बताया हालांकि फिलहाल चिंता की कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन यह सतर्क होने का सही समय है। अभी किए गए छोटे-छोटे लाइफस्टाइल बदलाव भविष्य में डायबिटीज से बचाव में मदद कर सकते हैं।
डिस्क्लेमर:
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। लेख में दिए गए आंकड़े फास्टिंग शुगर और HbA1c एक सामान्य मानक दर्शाते हैं, लेकिन हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति, उम्र और मेडिकल हिस्ट्री अलग हो सकती है। जनसत्ता इसकी सटीकता या इसके आधार पर किए गए किसी भी Self-treatment की जिम्मेदारी नहीं लेता है। अपनी रिपोर्ट के सटीक विश्लेषण और इलाज के लिए हमेशा किसी योग्य डॉक्टर या डायबिटीज विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें



