
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक तनाव लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बनता जा रहा है। ऑफिस का काम, पारिवारिक जिम्मेदारियां, आर्थिक चिंताएं और लगातार मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन के सामने रहने से शरीर और दिमाग दोनों थकने लगते हैं। कई बार व्यक्ति को बिना ज्यादा शारीरिक मेहनत किए भी बेचैनी, थकान और मानसिक दबाव महसूस होने लगता है।
ऐसी स्थिति में योग के कुछ सरल अभ्यास मददगार हो सकते हैं। इन्हीं में एक है मकरासन। यह पेट के बल लेटकर किया जाने वाला विश्राम का आसन है, जिसमें शरीर को ढीला छोड़कर सामान्य और सहज सांस लेने पर ध्यान दिया जाता है। माना जाता है कि नियमित अभ्यास से शरीर को आराम देने और मानसिक तनाव संभालने में मदद मिल सकती है।
क्या है मकरासन और क्यों माना जाता है खास?
मकरासन को अंग्रेजी में क्रोकोडाइल पोज कहा जाता है। संस्कृत में मकर का अर्थ मगरमच्छ होता है। इस आसन में व्यक्ति पेट के बल लेटकर अपने सिर और गर्दन को हाथों का सहारा देता है। इस दौरान शरीर को पूरी तरह आराम की स्थिति में रखा जाता है।
इस आसन की खासियत यह है कि इसे करने के लिए किसी विशेष उपकरण या अधिक शारीरिक लचीलेपन की जरूरत नहीं होती। कुछ मिनट शांत वातावरण में इसका अभ्यास करके शरीर को आराम दिया जा सकता है।
मकरासन करने का सही तरीका
मकरासन का अभ्यास करना काफी आसान है। इसे सही तरीके से करने के लिए इन बातों का ध्यान रखें।
- सबसे पहले जमीन पर योग मैट या दरी बिछाकर पेट के बल लेट जाएं।
- दोनों पैरों को आरामदायक दूरी पर रखें और शरीर को ढीला छोड़ दें।
- अब दोनों हाथों की कोहनियों को मोड़कर जमीन पर टिकाएं।
- दोनों हथेलियों को आपस में मिलाकर उनका सहारा बनाएं और ठोड़ी को हथेलियों पर टिकाएं।
- आंखें बंद करके गर्दन, कंधों और पीठ को आराम दें।
- अब बिना सांस रोके धीरे-धीरे सामान्य सांस लेते रहें।
- शुरुआत में लगभग 1 से 2 मिनट तक इस स्थिति में रहें। शरीर सहज महसूस करे तो समय धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है।
ध्यान रखें कि इस दौरान गर्दन या कमर पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ना चाहिए।
मकरासन करने से शरीर को मिल सकते हैं ये 5 फायदे
1. मानसिक तनाव कम करने में मदद
मकरासन में शरीर को आराम देने और सांसों पर ध्यान केंद्रित करने से मन शांत करने में मदद मिल सकती है। नियमित अभ्यास तनाव से निपटने की क्षमता को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।
2. पीठ और कमर को मिलता है आराम
लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों की पीठ और कमर की मांसपेशियों में जकड़न हो सकती है। मकरासन में शरीर को सहारा मिलने से कुछ लोगों को आराम महसूस हो सकता है।
3. सांस लेने की प्रक्रिया पर ध्यान बढ़ता है
इस आसन में व्यक्ति अपनी सांसों को सहज रूप से महसूस कर सकता है। धीमी और आरामदायक सांस लेने का अभ्यास मानसिक शांति और रिलैक्सेशन में सहायक हो सकता है।
4. शारीरिक थकान से राहत
दिनभर की भागदौड़ और काम के बाद कुछ समय विश्राम करने से शरीर को आराम मिलता है। मकरासन इसी तरह का एक सरल विश्राम अभ्यास है।
5. एकाग्रता बढ़ाने में सहायक
आंखें बंद करके शांत अवस्था में रहने और सांसों पर ध्यान देने से मन को कुछ समय के लिए बाहरी गतिविधियों से दूर रखने में मदद मिल सकती है।
कब करना चाहिए मकरासन?
मकरासन का अभ्यास सुबह योग करने के दौरान, दिनभर के काम के बाद या अन्य योगासनों के बीच विश्राम के लिए किया जा सकता है। ऑफिस में लंबे समय तक बैठने के बाद भी इसे अपनी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।
हालांकि, केवल मकरासन करने से लंबे समय का तनाव या नींद से जुड़ी समस्याएं पूरी तरह ठीक होने की गारंटी नहीं है। इसके साथ नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और संतुलित दिनचर्या भी जरूरी है।
इन लोगों को मकरासन करते समय रखनी चाहिए सावधानी
मकरासन सामान्य रूप से सरल विश्राम आसन है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में विशेष सावधानी जरूरी है।
- गर्दन या रीढ़ की हड्डी में गंभीर दर्द या चोट होने पर बिना विशेषज्ञ की सलाह अभ्यास न करें।
- स्लिप डिस्क या साइटिका की समस्या में अपनी स्थिति के अनुसार योग विशेषज्ञ से सही विधि समझें।
- गर्भावस्था में पेट के बल लेटने से बचें।
- हर्निया या हाल ही में पेट की सर्जरी होने पर चिकित्सकीय सलाह के बिना इसका अभ्यास न करें।
- आसन करते समय दर्द, चक्कर या असहजता महसूस हो तो तुरंत अभ्यास रोक दें।
रोजाना कुछ मिनट अपने शरीर के लिए भी निकालें
आज के समय में स्वस्थ रहने के लिए केवल खानपान पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। शरीर को आराम देना और मानसिक शांति के लिए समय निकालना भी जरूरी है। मकरासन ऐसा ही एक सरल योग अभ्यास है, जिसे नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य और योग जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। मकरासन किसी बीमारी का अचूक इलाज नहीं है। गंभीर स्वास्थ्य समस्या या लगातार दर्द होने पर चिकित्सक अथवा प्रमाणित योग विशेषज्ञ की सलाह लें।
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