HealthIndiaTrending

नींद पूरी न होने पर शरीर देता है ये 5 संकेत, दिनभर थकान से लेकर मीठा खाने की क्रेविंग तक हो सकती है परेशानी की वजह.​​​​​​

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में देर रात तक मोबाइल चलाना, काम का तनाव, अनियमित दिनचर्या और सुबह जल्दी उठने की मजबूरी लोगों की नींद को प्रभावित कर रही है। कई लोग रोजाना बिस्तर पर पर्याप्त समय बिताने के बावजूद सुबह उठकर फ्रेश महसूस नहीं करते। दिनभर थकान, चिड़चिड़ापन, ध्यान लगाने में परेशानी या बार-बार चाय-कॉफी पीने की जरूरत को अक्सर सामान्य कमजोरी समझ लिया जाता है।

लेकिन कई बार ये संकेत शरीर की ओर से इस बात का इशारा हो सकते हैं कि उसे पर्याप्त और अच्छी गुणवत्ता वाली नींद नहीं मिल रही है। नींद केवल आराम करने का समय नहीं है, बल्कि इस दौरान शरीर और दिमाग कई जरूरी रिकवरी प्रक्रियाओं से गुजरते हैं। लंबे समय तक नींद की कमी रहने पर मूड, याददाश्त, भूख, इम्यून सिस्टम और रोजमर्रा की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।

डॉक्टर कुणाल सूद ने सोशल मीडिया पर नींद से जुड़े कुछ ऐसे संकेतों के बारे में बताया है, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वहीं, फिजिशियन डॉ. पल्लेटी शिवा कार्तिक रेड्डी के मुताबिक, अगर कई लक्षण एक साथ और लगातार दिखाई दे रहे हैं तो नींद की गुणवत्ता और इसके पीछे के कारणों पर ध्यान देना जरूरी है।

आइए जानते हैं वे 5 संकेत कौन से हैं, जो बता सकते हैं कि आपकी नींद शरीर की जरूरत के मुताबिक पूरी नहीं हो रही।

1. सुबह उठते ही चाय-कॉफी की जरूरत महसूस होना

अगर सुबह आंख खुलते ही आपका पहला ख्याल चाय या कॉफी का आता है और कैफीन के बिना आपको दिन शुरू करना मुश्किल लगता है, तो यह नींद की कमी का एक संकेत हो सकता है।

कैफीन कुछ समय के लिए जागने और सतर्क रहने में मदद करता है, लेकिन यह नींद से मिलने वाली वास्तविक शारीरिक और मानसिक रिकवरी की भरपाई नहीं कर सकता। लगातार कम सोने पर व्यक्ति दिन में खुद को एक्टिव रखने के लिए ज्यादा कैफीन लेने लगता है।

समस्या तब और बढ़ सकती है जब शाम या रात में अधिक चाय-कॉफी पीने से अगली रात की नींद प्रभावित हो जाए। इस तरह कम नींद और ज्यादा कैफीन का एक चक्र बन सकता है।

अगर आपको दिनभर खुद को जागता रखने के लिए लगातार कैफीन की जरूरत पड़ रही है, तो अपनी नींद की अवधि और गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए।

2. बार-बार मीठा या हाई-कार्ब फूड खाने का मन होना

क्या आपको सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा मिठाई, चॉकलेट, बिस्कुट, केक, ब्रेड या फास्ट फूड खाने की इच्छा होने लगी है?

नींद की कमी इसका एक कारण हो सकती है। पर्याप्त नींद न मिलने पर शरीर में भूख और तृप्ति से जुड़े हार्मोन के संतुलन में बदलाव हो सकता है। इससे भूख ज्यादा महसूस हो सकती है और हाई-कैलोरी खाने की इच्छा बढ़ सकती है।

कम नींद के कारण व्यक्ति थकान महसूस करता है और ऐसे में शरीर जल्दी ऊर्जा देने वाले खाद्य पदार्थों की ओर आकर्षित हो सकता है। अगर यह आदत लंबे समय तक बनी रहे तो वजन बढ़ने और मेटाबॉलिक हेल्थ पर भी असर पड़ सकता है।

हालांकि, हर व्यक्ति में मीठा खाने की इच्छा का कारण नींद की कमी ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है। खानपान, तनाव और ब्लड शुगर से जुड़ी स्थितियां भी इसकी वजह हो सकती हैं।

3. छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन और गुस्सा

अगर पहले की तुलना में आपका मूड जल्दी खराब होने लगा है, छोटी-सी बात पर गुस्सा आता है या धैर्य कम हो गया है, तो इसके पीछे नींद की कमी भी हो सकती है।

नींद मस्तिष्क को भावनाओं और तनाव को नियंत्रित करने में मदद करती है। जब शरीर को लगातार पर्याप्त आराम नहीं मिलता, तो व्यक्ति भावनात्मक रूप से ज्यादा संवेदनशील हो सकता है।

इसका असर परिवार, दोस्तों और ऑफिस के रिश्तों पर भी पड़ सकता है। व्यक्ति सामान्य परिस्थितियों में भी ज्यादा तनावग्रस्त या परेशान महसूस कर सकता है।

अगर चिड़चिड़ापन कई दिनों से बना हुआ है और इसके साथ थकान या ध्यान लगाने में परेशानी भी हो रही है, तो अपनी नींद के पैटर्न पर गौर करना जरूरी है।

4. दिमाग सुस्त लगना और काम पर फोकस न कर पाना

नींद की कमी का सबसे स्पष्ट असर दिमाग की कार्यक्षमता पर नजर आ सकता है। अगर आपको काम करते समय ध्यान लगाने में परेशानी होती है, छोटी-छोटी बातें भूलने लगे हैं या फैसला लेने में पहले से ज्यादा समय लग रहा है, तो इसे केवल व्यस्तता या तनाव मानकर नजरअंदाज न करें।

कम नींद के कारण एकाग्रता, प्रतिक्रिया देने की क्षमता, याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसी स्थिति को आम भाषा में ‘ब्रेन फॉग’ कहा जाता है।

कई बार व्यक्ति को लगता है कि वह काम तो कर रहा है, लेकिन उसकी उत्पादकता पहले जैसी नहीं रही। बार-बार गलती होना, एक ही चीज को दोबारा पढ़ना या बातचीत के दौरान ध्यान भटकना भी इसी तरह के संकेत हो सकते हैं।

अगर पर्याप्त नींद लेने के बाद भी ब्रेन फॉग बना रहता है तो इसके दूसरे कारणों की जांच भी जरूरी हो सकती है।

5. बार-बार बीमार पड़ना

क्या आपको मौसम बदलते ही सर्दी-जुकाम हो जाता है या छोटी-छोटी इंफेक्शन बार-बार परेशान करती हैं?

नींद शरीर की सामान्य इम्यून प्रतिक्रिया को सपोर्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लगातार कम या खराब नींद रहने पर शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

हालांकि, बार-बार बीमार पड़ने के पीछे केवल नींद की कमी जिम्मेदार नहीं होती। पोषण की कमी, तनाव, एलर्जी, दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं या कमजोर इम्यून सिस्टम भी इसकी वजह हो सकते हैं।

इसलिए अगर संक्रमण बार-बार हो रहा है या लंबे समय तक ठीक नहीं हो रहा है तो डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है।

सिर्फ कम नींद या किसी बीमारी का संकेत?

फिजिशियन डॉ. पल्लेटी शिवा कार्तिक रेड्डी के अनुसार, कैफीन पर अत्यधिक निर्भरता, मीठा खाने की इच्छा, चिड़चिड़ापन और ब्रेन फॉग जैसे लक्षण नींद की कमी में दिखाई दे सकते हैं, खासकर जब कई लक्षण एक साथ मौजूद हों।

लेकिन इन लक्षणों को देखकर खुद से यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं है कि समस्या सिर्फ नींद की है। तनाव, चिंता, डिप्रेशन, थायराइड संबंधी समस्या, पोषण की कमी, डायबिटीज और कुछ दवाओं के प्रभाव से भी थकान, मूड में बदलाव और ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है।

इसलिए अगर लक्षण लंबे समय तक बने रहते हैं तो मूल कारण की पहचान करना जरूरी है।

7-8 घंटे सोने के बाद भी थकान क्यों?

अगर आप रोजाना पर्याप्त समय बिस्तर पर बिताते हैं लेकिन सुबह उठने के बाद भी थके हुए रहते हैं, तो केवल नींद की अवधि को देखना पर्याप्त नहीं है। नींद की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण होती है।

तेज खर्राटे, रात में बार-बार नींद खुलना, सोते समय सांस रुकना या हांफते हुए उठना स्लीप एपनिया जैसी समस्या की ओर इशारा कर सकता है।

इसी तरह बार-बार पैर हिलाने की जरूरत, रात में बेचैनी, देर तक नींद न आना या बार-बार जागना भी नींद की गुणवत्ता को खराब कर सकता है।

ऐसी स्थिति में डॉक्टर या स्लीप स्पेशलिस्ट से सलाह लेना जरूरी है।

नींद बेहतर करने के लिए किन बातों का रखें ध्यान?

अपनी नींद को बेहतर बनाने के लिए कुछ आसान आदतें मददगार हो सकती हैं।

  • रोजाना लगभग एक ही समय पर सोने और जागने की कोशिश करें।
  • सोने से पहले मोबाइल और दूसरे स्क्रीन डिवाइस का इस्तेमाल कम करें।
  • शाम के बाद चाय, कॉफी और दूसरे कैफीन वाले पेय सीमित करें।
  • दिन में नियमित शारीरिक गतिविधि करें।
  • सोने से ठीक पहले बहुत भारी भोजन करने से बचें।
  • बेडरूम को शांत, आरामदायक और पर्याप्त अंधेरा रखें।
  • दिन में बहुत लंबी झपकी लेने से बचें।
  • तनाव कम करने के लिए सोने से पहले हल्की रिलैक्सेशन तकनीक या गहरी सांस लेने का अभ्यास किया जा सकता है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

अगर कई हफ्तों से लगातार नींद खराब है, दिन में अत्यधिक नींद आती है, काम करने में परेशानी होती है, तेज खर्राटे आते हैं या सोते समय सांस रुकने जैसा महसूस होता है, तो इसे नजरअंदाज न करें।

इसी तरह अगर पर्याप्त नींद लेने के बावजूद लगातार थकान, चिड़चिड़ापन या ध्यान केंद्रित करने में परेशानी बनी हुई है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर दूसरी संभावित वजहों की जांच कराना बेहतर है।

निष्कर्ष

नींद की कमी का असर केवल सुबह की थकान तक सीमित नहीं रहता। लंबे समय तक खराब नींद रहने पर मूड, एकाग्रता, भूख और शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। इसलिए दिनभर की थकान को सिर्फ काम का दबाव मानकर नजरअंदाज करने के बजाय अपनी नींद की अवधि और गुणवत्ता दोनों पर ध्यान देना जरूरी है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी बीमारी का निदान या इलाज नहीं है। यदि आपको लंबे समय से नींद की समस्या, अत्यधिक दिन में नींद, लगातार थकान, तेज खर्राटे या सोते समय सांस रुकने जैसी परेशानी है, तो योग्य डॉक्टर या स्लीप विशेषज्ञ से सलाह लें।

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply