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सिर्फ एक परंपरा या कोई गहरा रहस्य? जानिए पूजा-पाठ में पत्नी को क्यों दिया जाता है पति के बाईं ओर स्थान..

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चाहे शादी-ब्याह का माहौल हो या घर में सत्यनारायण भगवान की पूजा, आपने हमेशा देखा होगा कि पूजा में बैठते वक्त पत्नी हमेशा पति के बाएं तरफ ही बैठती है.

कई बार मन में ख्याल आता है कि आखिर ऐसा क्यों है? क्या यह सिर्फ एक पुरानी रस्म है जिसे सब निभाते आ रहे हैं, या इसके पीछे कोई असली वजह भी है, इस खबर में इन्हीं सवालों के जवाबों को डिटेल से जानेंगे.

वामांगी का असली मतलब क्या है?

शास्त्रों में पत्नी के लिए वामांगी शब्द का इस्तेमाल हुआ है. इसका सीधा सा मतलब होता है पति का बायां अंग. माना जाता है कि शादी के बाद पत्नी पति के बाएं हिस्से की हकदार बन जाती है.

इसी वजह से किसी भी पूजा, हवन या शुभ काम में उसे बाईं तरफ ही बैठाया जाता है. ये बात हमें बताती है कि घर-परिवार में पति और पत्नी दोनों का दर्जा बिल्कुल बराबर है. बिना पत्नी के कोई भी बड़ी पूजा पूरी मानी ही नहीं जाती.

भगवान शिव और माता पार्वती का संदेश

अगर आपने भगवान शिव के अर्धनारीश्वर रूप की फोटो या मूर्ति देखी होगी, तो ध्यान दिया होगा कि उसमें आधा शरीर शिव जी का है और आधा माता पार्वती का है.माता पार्वती हमेशा शिव जी के बाएं हिस्से में ही दिखती हैं.

ये रूप हमें यही सिखाता है कि स्त्री और पुरुष एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं. जब भी कोई जोड़ा पूजा में इस तरह बैठता है, तो वह शिव और शक्ति के इसी रिश्ते को दिखाता है, जिससे घर में शांति और खुशहाली आती है.

दिल के करीब रखने की सोच

हमारे शरीर की बनावट भी बड़ी कमाल की है. हमारा दिल शरीर के बाएं तरफ ही होता है. पुराने बुजुर्ग और जानकार कहते हैं कि पत्नी को बाईं तरफ बैठाने का मतलब है उसे अपने दिल के सबसे करीब रखना.

माना जाता है कि पुरुष का दायां हिस्सा ताकत और कड़ापन दिखाता है, जबकि बायां हिस्सा दया, प्रेम और कोमलता से जुड़ा है. पत्नी को बाईं तरफ जगह देने से दोनों के बीच प्यार और आपसी समझ बनी रहती है.

शरीर की ऊर्जा और तालमेल

हमारी योग परंपरा में माना गया है कि इंसान के शरीर में दो तरह की ऊर्जा काम करती है. पुरुष का दाहिना हिस्सा थोड़ा गर्म और तेज ऊर्जा देता है, जबकि महिला का बायां हिस्सा शांति और ठंडक देता है.

जब पूजा के दौरान पति और पत्नी इस तरह आमने-सामने या साथ बैठते हैं, तो दोनों की ऊर्जाएं आपस में मिलकर एक बहुत अच्छा संतुलन बनाती हैं. इससे पूजा का माहौल और घर का वातावरण दोनों बहुत शांत और पॉजिटिव हो जाते हैं.

किन-किन मौकों पर बाईं तरफ बैठना जरूरी है?

शास्त्रों और पुरानी मान्यताओं के मुताबिक कुछ खास मौकों पर पत्नी का बाईं तरफ होना बहुत जरूरी माना गया है. जैसे शादी के फेरे लेते समय, सिंदूर लगाने की रस्म में, किसी भी पूजा या हवन के वक्त, कन्यादान के समय और सोते वक्त.

ऐसा माना जाता है कि सही तरीके और सही दिशा में बैठकर पूजा करने से उसका पूरा फल मिलता है और घर पर भगवान का आशीर्वाद बना रहता है.

इस बात से हमें क्या सीख मिलती है?

देखा जाए तो पूजा में पत्नी को बाईं तरफ बैठाना सिर्फ एक रस्म निभाना नहीं है. इसके पीछे बहुत सोच-समझकर बनाई गई एक व्यवस्था है.

ये हमें याद दिलाती है कि रिश्ते में कोई छोटा या बड़ा नहीं होता, दोनों की अहमियत बराबर है. जब पति-पत्नी एक साथ मिलकर सही मन से ईश्वर को याद करते हैं, तो घर में खुशहाली अपने आप आ जाती है.

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