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चाचा से नाराज थी भतीजी, प्रेमी संग मिलकर उतरवा दिया मौत के घाट, पढ़ें हत्या की खौफनाक वारदात

Satya Report: ओडिशा के गंजाम जिले से एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने रिश्तों पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। जमीन के कारोबार से जुड़े व्यवसायी सुधीर पात्रा की हत्या किसी बाहरी दुश्मन ने नहीं, बल्कि उनके अपने ही परिवार के लोगों ने मिलकर कर दी।जानकारी के अनुसार, सुधीर पात्रा का अपहरण 15 अप्रैल की शाम करीब 8 बजे उस समय किया गया, जब वे ब्रह्मपुर के बाहरी इलाके से वॉलीबॉल खेलकर अपने घर लौट रहे थे। इसके बाद उनका कोई पता नहीं चला। परिवार ने उनकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि उनके साथ इतनी भयावह घटना हो चुकी है।

चाचा से नाराज थी भतीजी, प्रेमी संग मिलकर उतरवा दिया मौत के घाट, पढ़ें हत्या की खौफनाक वारदात
चाचा से नाराज थी भतीजी, प्रेमी संग मिलकर उतरवा दिया मौत के घाट, पढ़ें हत्या की खौफनाक वारदात

करीब एक हफ्ते बाद बुधवार को उनका सड़ा-गला शव सोरडा इलाके के पास घने जंगल से बरामद किया गया। शव की पहचान उनके कपड़ों के आधार पर की गई, जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जांच के बाद पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया। इस पूरी साजिश के पीछे खुद सुधीर पात्रा की भतीजी निवेदिता पात्रा और उसका प्रेमी कालू प्रधान निकले। दोनों ने मिलकर इस अपराध की योजना बनाई थी। इतना ही नहीं, निवेदिता का भाई तुषार पात्रा भी इस साजिश में शामिल था।

गंजाम एसपी शुभेंदु पात्रा के मुताबिक, शुरुआत में जांच के दौरान कुछ अहम सुराग मिले, जिनसे धीरे-धीरे परिवार के ही लोगों की भूमिका सामने आई। पूछताछ में पता चला कि निवेदिता के मन में अपने चाचा के प्रति गहरी नाराजगी थी। निवेदिता के पिता खुद भी एक बड़े व्यवसायी थे। हाल ही में उसके पिता की मौत के बाद परिवार में पैसों को लेकर विवाद बढ़ गया था। निवेदिता को यह भी शक था कि उसके पिता की मौत के पीछे सुधीर पात्रा और उनका परिवार किसी तरह के तंत्र-मंत्र या काला जादू में शामिल था। इसी सोच ने उसके मन में नफरत को और बढ़ा दिया। उसे लगता था कि उसके चाचा आर्थिक रूप से उसे और उसके भाई को कमजोर कर रहे हैं।

एसपी शुभेंदु पात्रा ने आगे बताया कि निवेदिता अक्सर अपने प्रेमी कालू प्रधान से इन बातों को साझा करती थी। इसी दौरान दोनों ने मिलकर सुधीर पात्रा से बड़ी रकम वसूलने की योजना बनाई। इसके लिए कालू ने सूरत से कुछ अपराधियों को भी शामिल किया, जिनमें सूर्य प्रताप सिंह उर्फ गोलू और अन्य लोग शामिल थे।

पूरी साजिश बेहद सुनियोजित तरीके से रची गई थी। आरोपियों ने पहले ही तय कर लिया था कि अपहरण कहां करना है, कहां ले जाकर मारपीट करनी है और फिरौती कैसे मांगनी है। 15 अप्रैल की शाम करीब 7 बजे  उन्होंने सुधीर पात्रा का अपहरण कर लिया और कार में बैठाकर ले गए। रास्ते में उनकी कार खराब हो गई, जिसके बाद दूसरी कार ह्युंडई वर्ना मंगवाई गई और सुधीर को उसमें शिफ्ट किया गया। इसके बाद उन्हें बालिगुडा इलाके के पास एक सुनसान जगह, एक छोटे मंदिर के पास ले जाया गया, जहां पहले से ही सब इंतजाम कर रखा गया था। वहां आरोपियों ने पहले शराब और खाना मंगवाया, फिर सभी ने मिलकर खाया-पीया और उसके बाद सुधीर पात्रा की बेरहमी से पिटाई शुरू कर दी। इसी दौरान उन्होंने उनके परिवार वालों को फोन कर फिरौती की मांग भी की।

बताया जा रहा है कि 16 अप्रैल की सुबह तक आरोपियों ने इतनी बुरी तरह से मारपीट की कि सुधीर पात्रा की वहीं मौत हो गई। इसके बाद आरोपियों को डर लगा कि सुबह होने पर कोई उन्हें देख सकता है, इसलिए उन्होंने शव को तुरंत वहां से हटाकर बालिगुडा से कोरापुट जाने वाले रास्ते के पास एक कच्चे रास्ते में फेंक दिया और फरार हो गए। भागते समय उनकी गाड़ी फिर खराब हो गई, जिसके बाद उन्होंने स्थानीय लोगों से मदद ली और कुछ समय के लिए वहीं छिपे भी रहे। बाद में वे छत्तीसगढ़ की ओर भाग निकले।

पुलिस ने इस पूरे मामले में अब तक कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनमें परिवार के सदस्य और बाहरी अपराधी दोनों शामिल हैं। सभी से पूछताछ जारी है और मामले में आगे की जांच की जा रही है। यह घटना साफ दिखाती है कि लालच और पारिवारिक विवाद किस हद तक इंसान को अंधा बना सकते हैं। एक भतीजी ने सिर्फ पैसे और गलतफहमी के चलते अपने ही चाचा की हत्या की साजिश रच दी। सुधीर पात्रा की यह दर्दनाक कहानी अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। (रिपोर्ट: शुभम कुमार) .

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