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​सिर्फ कोयला नहीं, अब इन सेक्टर्स में 50 हजार करोड़ रुपये का बड़ा दांव लगाएगी कोल इंडिया

कोल इंडिया अब अपनी पुरानी पहचान को पूरी तरह से बदलने जा रही है. दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी अब सिर्फ कोयले की खुदाई तक सीमित नहीं रहेगी. कंपनी के चेयरमैन बी साईराम ने बताया कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए एक नई रणनीति तैयार की गई है. इसके तहत कंपनी लगभग 50,000 करोड़ रुपये का भारीभरकम निवेश करने जा रही है. ये पैसा कोलगैसिफिकेशन प्रोजेक्ट्स, विदेशों में अहम खनिजों की खोज व रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में लगाया जाएगा ताकि नए ग्रोथ इंजनों पर कब्जा जमाया जा सके.

सिर्फ कोयले पर नहीं रहेगी निर्भरता

कोल इंडिया का मानना है कि भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए नए रास्तों पर चलना होगा. कंपनी मुख्य रूप से कोल गैसिफिकेशन पर अपना फोकस बढ़ा रही है. चेयरमैन साईराम के मुताबिक सरकार भी इस तकनीक को तेजी से बढ़ावा दे रही है. इस तकनीक की मदद से रसायनों व प्राकृतिक गैस के आयात पर निर्भरता कम होगी. इससे न सिर्फ देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि घरेलू कोयले का सही इस्तेमाल भी हो सकेगा. इन प्रोजेक्ट्स के लिए कंपनी तकनीक मुहैया कराने वालों से लेकर कई नई कंपनियों के साथ साझेदारी की संभावनाएं भी तलाश रही है.

ओडिशा में शुरू हुआ बड़ा गैस प्रोजेक्ट

कोल इंडिया का पहला कमर्शियल कोल गैसिफिकेशन प्रोजेक्ट जमीन पर उतर चुका है. भारत कोल गैसिफिकेशन एंड केमिकल्स ने ओडिशा के लखनपुर में अपना मैकेनिकल काम शुरू कर दिया है. ये प्रोजेक्ट कोल इंडिया व भेल का एक जॉइंट वेंचर है जिसमें 25,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश हो रहा है. यहां हर साल 6,60,000 टन अमोनियम नाइट्रेट का उत्पादन किया जाएगा. इसके अलावा पश्चिम बंगाल में गेल के साथ व महाराष्ट्र में बीपीसीएल के साथ मिलकर दो और बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है जो अभी टेंडर स्टेज में हैं.

विदेशों में लिथियम खदान की तलाश

कंपनी अब क्रिटिकल मिनरल्स के बाजार में भी अपनी मजबूत जगह बना रही है. कोल इंडिया ने देश में ग्रेफाइट व दुर्लभ धातुओं के पांच ब्लॉक पहले ही हासिल कर लिए हैं. इसके अलावा कंपनी विदेशों में भी बेहतरीन मौके तलाश रही है. चिली, अर्जेंटीना व ऑस्ट्रेलिया में खदानों को लेकर बातचीत चल रही है. खास तौर पर चिली में लिथियम खदान खरीदने के लिए कंपनी ने कई विदेशी पार्टनर्स के साथ नॉनडिस्क्लोजर समझौते भी किए हैं. विदेशी प्रोजेक्ट्स को आसानी से चलाने के लिए कंपनी ने सिंगापुर में ‘सीआईएल ग्लोबल’ नाम से अपनी नई ब्रांच भी खोल ली है.

ग्रीन एनर्जी सेक्टर में भी रखा कदम

कोल इंडिया की योजनाएं सिर्फ गैस व खनिजों तक नहीं रुक रही हैं. कंपनी रिन्यूएबल एनर्जी को भी अपनी ग्रोथ का एक बड़ा जरिया मान रही है. वित्तीय वर्ष 2030 तक कंपनी ने 9.5 गीगावाट रिन्यूएबल ऊर्जा क्षमता हासिल करने का एक बड़ा लक्ष्य रखा है. इसके लिए कई नए सोलर प्रोजेक्ट्स लगाए जाएंगे. इन सोलर प्रोजेक्ट्स को बैटरी स्टोरेज सिस्टम के साथ भी जोड़ा जाएगा ताकि ऊर्जा की सप्लाई में कोई रुकावट न आए.

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