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​NSE IPO Listing: सितंबर में लोगों ने IPO से खूब छापा पैसा, क्या अब NSE भी कराएगा बंपर कमाई?

NSE IPO Listing: शेयर बाजार के निवेशकों के लिए सितंबर का महीना काफी शानदार साबित हुआ है. इस महीने मार्केट में एंट्री लेने वाले ज्यादातर आईपीओ ने बंपर कमाई कराई है. आंकड़ों के मुताबिक 70 फीसदी से ज्यादा कंपनियों ने लिस्टिंग के दिन ही निवेशकों की झोली भर दी. अब इसी मजबूत माहौल के बीच नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के बहुप्रतीक्षित आईपीओ की लिस्टिंग होने वाली है. हालांकि, बाजार का मूड अच्छा होने के बावजूद एनएसई का ग्रे मार्केट प्रीमियम निवेशकों की चिंता बढ़ा रहा है.

​NSE IPO Listing: सितंबर में लोगों ने IPO से खूब छापा पैसा, क्या अब NSE भी कराएगा बंपर कमाई?

सितंबर के आईपीओ का शानदार रिकॉर्ड

ऐस इक्विटी के डेटा पर नजर डालें तो अब तक लिस्ट हुए 16 आईपीओ में से बहुत कम ने निराश किया है. केवल पांच इश्यू ऐसे रहे जो अपने तय प्राइस से नीचे लिस्ट हुए. बाकी सभी ने लिस्टिंग के दिन ही निवेशकों को पॉजिटिव रिटर्न दिया. इनमें सबसे बड़ा नाम ईएसडीएस सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन का रहा. इस कंपनी का शेयर 429 रुपये के भाव पर आया था. इसकी लिस्टिंग 74% मुनाफे के साथ 746 रुपये पर हुई. आज ये शेयर 1,703 रुपये के स्तर पर ट्रेड कर रहा है, जो इश्यू प्राइस से 297% का भारी मुनाफा है. इसी तरह ग्लास वॉल सिस्टम्स ने 70%, करमतारा इंजीनियरिंग ने 44% के साथ बेहतरीन रिटर्न दिया है.

खराब शुरुआत के बाद भी दिखी वापसी

शेयर बाजार का ट्रेंड बताता है कि कमजोर लिस्टिंग का मतलब हमेशा नुकसान नहीं होता. प्रासोल केमिकल्स 10% डिस्काउंट पर लिस्ट हुआ था, लेकिन अब ये अपने आईपीओ प्राइस से 4% ऊपर आ चुका है. सिम्बायोटिक फार्मा लैब की शुरुआत भी सुस्त रही थी, पर आज ये 13% के मुनाफे में है. वहीं, कुछ मामलों में लिस्टिंग गेन ज्यादा दिन नहीं टिक सका. प्रणव कंस्ट्रक्शंस 31% प्रीमियम के साथ लिस्ट हुआ था, लेकिन अब ये इश्यू प्राइस से 17% नीचे गिर चुका है. ये आंकड़े बताते हैं कि बाजार ने रिटर्न जरूर दिया है, लेकिन आंख मूंदकर नहीं.

बड़े इश्यू साइज से बढ़ेगी चुनौती

एनएसई के मामले में सितंबर का ये पिछला रिकॉर्ड पूरी तरह लागू नहीं होता. इस महीने आए बाकी आईपीओ का साइज काफी छोटा था. वहीं, एनएसई का आईपीओ 22,561 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का है. इतने बड़े इश्यू को बंपर लिस्टिंग के लिए बहुत ज्यादा संस्थागत मांग की जरूरत होती है. बाजार में शेयरों की संख्या ज्यादा होने की वजह से सप्लाई का भारी दबाव बना रहता है. एनएसई आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल है, जिससे कंपनी को कोई नया फंड नहीं मिलेगा. हालांकि इसे निवेशकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला है, क्यूआईबी और रिटेल निवेशकों के दम पर ये ओवरऑल 5.71 गुना सब्सक्राइब हुआ है.

क्या है एक्सपर्ट्स की राय

एनएसई के लिए सबसे बड़ी चिंता इसका गिरता हुआ जीएमपी है. प्राइस बैंड के ऐलान के वक्त प्रीमियम काफी ऊपर था, जो अब घटकर महज 2% के आसपास रह गया है. 1,785 रुपये के अपर प्राइस बैंड पर 2% का प्रीमियम एक बेहद सामान्य लिस्टिंग का इशारा कर रहा है. अविनाश मेंटर रिसर्च सर्विसेज के फाउंडर अविनाश गोरक्षकर के मुताबिक निवेशकों को उम्मीदें सीमित रखनी चाहिए. बड़े साइज के कारण एकदम से भारी उछाल मुश्किल है. वहीं, मास्टर कैपिटल सर्विसेज के डॉ. रवि सिंह ने इसके वैल्यूएशन पर ध्यान दिलाया है. उनका कहना है कि एनएसई एक मजबूत बिजनेस है, लेकिन ये अपनी कमाई के मुकाबले 43 गुना वैल्यूएशन पर आ रहा है. साथ ही कंपनी की कमाई का बड़ा हिस्सा ऑप्शंस ट्रेडिंग की फीस से आता है. ऐसे में भविष्य में होने वाले रेगुलेटरी बदलाव इसके लिए काफी अहम होंगे.

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.

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