नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE का IPO 17 सितंबर 2026 से सब्सक्रिप्शन के लिए खुलने जा रहा है. निवेशक इसमें 21 सितंबर तक बोली लगा सकेंगे. IPO का प्राइस बैंड 1,700 से 1,785 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है. यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल यानी OFS है और इसके जरिए कुल 22,562 करोड़ रुपये के शेयर ऑफर किए जा रहे हैं.

अगर ऊपरी प्राइस बैंड 1,785 रुपये के हिसाब से देखें तो NSE का अनुमानित मार्केट कैप करीब 4.42 लाख करोड़ रुपये बैठता है. एक शेयर की फेस वैल्यू 1 रुपये है, जबकि एक लॉट में 8 शेयर होंगे. योग्य कर्मचारियों को प्रति शेयर 170 रुपये की छूट मिलेगी.
IPO को मिली ‘न्यूट्रल’ रेटिंग
NSE IPO को लेकर ब्रोकरेज फर्म रेलिगेयर ब्रोकिंग ने ‘न्यूट्रल’ रेटिंग दी है. ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक NSE की बाजार में मजबूत स्थिति और लंबे समय में ग्रोथ की संभावनाएं हैं. हालांकि, वैल्यूएशन और रेगुलेटरी बदलावों को लेकर कुछ जोखिम भी हैं. रेलिगेयर के अनुसार, भारत के कैपिटल मार्केट में आगे बढ़ने की काफी गुंजाइश है. इसकी वजह निवेशकों की बढ़ती संख्या, शेयर बाजार के बढ़ते मार्केट कैप, म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के विस्तार और पैसिव इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स का बढ़ता इस्तेमाल है.
6 साल में NSE के निवेशक 4 गुना से ज्यादा बढ़े
रेलिगेयर के मुताबिक NSE पर रजिस्टर्ड निवेशकों की संख्या मार्च 2020 में 3.087 करोड़ थी. जून 2026 तक यह बढ़कर 13.237 करोड़ हो गई. यानी इस अवधि में NSE के निवेशक आधार में काफी बड़ा विस्तार हुआ है. इसी तरह जून 2026 तक भारत में म्यूचुअल फंड्स का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट यानी AUM 82.22 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया. पैसिव फंड और इंडेक्स फंड का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है. ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि इससे NSE को ट्रेडिंग, इंडेक्स सर्विस, मार्केट डेटा और क्लियरिंग जैसे कारोबार में आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है. देश के अलगअलग हिस्सों से निवेशकों की बढ़ती भागीदारी भी एक्सचेंज के लिए लंबी अवधि में अहम हो सकती है.
NSE का प्रदर्शन कैसा रहा?
NSE की वित्तीय स्थिति को देखें तो वित्त वर्ष 202526 में कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 16,601.31 करोड़ रुपये रहा. वित्त वर्ष 202425 में यह 17,140.68 करोड़ रुपये और 202324 में 14,780.01 करोड़ रुपये था. वित्त वर्ष 202526 में कंपनी का टैक्स के बाद मुनाफा यानी PAT घटकर 10,302.06 करोड़ रुपये रह गया. एक साल पहले यह 12,187.69 करोड़ रुपये था. इसी तरह ऑपरेटिंग EBITDA वित्त वर्ष 202526 में 11,097.90 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 12,646.88 करोड़ रुपये था. कंपनी का ऑपरेटिंग EBITDA मार्जिन भी 73.78% से घटकर 66.85% रह गया. PAT मार्जिन 55.30% से घटकर 50.98% हो गया.
42.9 गुना P/E पर NSE का वैल्यूएशन
फर्म के मुताबिक NSE का IPO 42.9 गुना P/E यानी PricetoEarnings मल्टीपल पर वैल्यू हो रहा है. ब्रोकरेज का कहना है कि यह वैल्यूएशन NSE की मजबूत बाजार स्थिति और भविष्य की ग्रोथ को दिखाता है, लेकिन इसमें कमाई उम्मीद से कम रहने की स्थिति के लिए ज्यादा गुंजाइश नहीं है. ब्रोकरेज ने रेगुलेटरी बदलावों को भी एक अहम जोखिम बताया है. खासकर ऑप्शंस ट्रेडिंग से जुड़े SEBI के नियमों का असर ट्रेडिंग वॉल्यूम और ट्रांजैक्शन से होने वाली कमाई पर पड़ सकता है. NSE की कमाई का एक बड़ा हिस्सा ट्रांजैक्शन आधारित है. ऐसे में अगर ट्रेडिंग की मात्रा या कारोबार का मूल्य घटता है तो कंपनी की कमाई पर सीधा असर पड़ सकता है. ऑप्शंस कारोबार पर ज्यादा निर्भरता के कारण यह जोखिम और महत्वपूर्ण हो जाता है.
GMP करीब 9%, लेकिन इसका मतलब क्या?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, NSE IPO का मौजूदा GMP यानी Grey Market Premium करीब 9% है. GMP का इस्तेमाल अनलिस्टेड बाजार में IPO शेयरों को लेकर बने अनुमान को समझने के लिए किया जाता है. हालांकि, GMP आधिकारिक कीमत या लिस्टिंग प्राइस की गारंटी नहीं होता और इसमें तेजी से बदलाव हो सकता है.
निवेशकों को किन बातों पर ध्यान देना चाहिए?
NSE का बड़ा और जानापहचाना नाम होने के बावजूद IPO में निवेश का फैसला केवल GMP या बाजार की चर्चा के आधार पर नहीं करना चाहिए. निवेशकों को IPO का प्राइस बैंड, वैल्यूएशन, कंपनी की कमाई, मुनाफा और भविष्य की ग्रोथ को समझना जरूरी है. इसके साथ ही ट्रेडिंग वॉल्यूम पर निर्भरता और रेगुलेटरी बदलावों से जुड़े जोखिमों को भी देखना होगा. GMP केवल बाजार की धारणा बताता है, यह भविष्य की लिस्टिंग या रिटर्न की गारंटी नहीं है.



