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​लखनऊ से इंदौर तक 2 लाख नौकरियों का मौका, जानें किन सेक्टर्स में खुलेंगे रोजगार के दरवाजे

​लखनऊ से इंदौर तक 2 लाख नौकरियों का मौका, जानें किन सेक्टर्स में खुलेंगे रोजगार के दरवाजे

मुंबई। भारत में जुलाई से दिसंबर 2026 के दौरान दो से 2.5 लाख मौसमी और ‘गिग’ नौकरियां पैदा होने की संभावना है और त्योहारों के दौरान नियुक्तियों में 1520 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। वैश्विक प्रौद्योगिकी एवं डिजिटल टैलेंट समाधान प्रदाता एनएलबी सर्विसेज की एक रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है। ईकॉमर्स जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले अस्थायी कर्मियों को ‘गिग’ कहा जाता है। 

डिलीवरी और वेयरहाउसिंग में बढ़ते रोजगार के नए अवसर

रिपोर्ट के अनुसार, देश में त्योहारी सत्र शुरू होने के साथ ईकॉमर्स, क्विक कॉमर्स, खुदरा, लॉजिस्टिक्स, आतिथ्य, यात्रा और उपभोक्ता सेवाओं से जुड़े कारोबार साल के सबसे व्यस्त मांग वाले दौर के लिए तैयारी कर रहे हैं। 

लखनऊ, इंदौर समेत इन शहरों में बढ़ रही मांग

ईकॉमर्स और क्विक कॉमर्स के विस्तार ने रोजगार का दायरा महानगरों से बाहर पहुंचा दिया है। रिपोर्ट में जयपुर, लखनऊ, इंदौर, सूरत, नागपुर, भुवनेश्वर, कोयंबटूर, चंडीगढ़ और कोच्चि जैसे शहरों को बढ़ती भर्ती मांग वाले बाजारों में शामिल किया गया है। क्षेत्रीय फुलफिलमेंट सेंटर, डिलीवरी नेटवर्क, वेयरहाउस और डार्क स्टोर के बढ़ने से इन शहरों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बन रहे हैं। 

डिलीवरी से लेकर वेयरहाउस तक मिलेंगे मौके

त्योहारी सीजन में ऑनलाइन ऑर्डर और ऑफलाइन बिक्री बढ़ने के साथ कंपनियां अपनी सप्लाई चेन को मजबूत कर रही हैं। ऐसे में लास्टमाइल डिलीवरी, वेयरहाउसिंग, फुलफिलमेंट, रिटेल सेल्स, इन्वेंट्री मैनेजमेंट, कस्टमर एक्सपीरियंस और फील्ड ऑपरेशन जैसे क्षेत्रों में मांग बनी रहने की संभावना है। 

इसके अलावा कुछ नए तरह के ऑपरेशनल रोल भी तेजी से उभर रहे हैं। इनमें डार्कस्टोर इन्वेंट्री कंट्रोलर, रिटर्न और रिफंड स्पेशलिस्ट, कस्टमररिजॉल्यूशन एग्जीक्यूटिव, मार्केटप्लेस ऑपरेशन प्रोफेशनल, कैटलॉग मैनेजमेंट और ऑर्डर मैनेजमेंट जैसे पद शामिल हैं।

त्योहारी सीजन में बढ़ता काम का दबाव

एनएलबी सर्विसेज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं एपीएसी प्रमुख वरुण सचदेवा ने कहा, ”त्योहारों का दौर भारत के कार्यबल के लिए एक तरह की परीक्षा का समय बनता जा रहा है। नियोक्ता पहले से भर्ती शुरू कर रहे हैं और पारंपरिक रोजगार केंद्रों से आगे बढ़कर तकनीक आधारित, मजबूत और तुरंत काम पर लगाए जा सकने वाले कर्मचारियों पर अधिक निर्भर हो रहे हैं।” 

कंपनियां पहले से कर रही हायरिंग की तैयारी

पहले से टैलेंट पूल तैयार करना और पीक सीजन में अचानक बढ़ने वाली मांग के दबाव को कम करना है।  त्योहारी मांग अचानक बढ़ने से कंपनियों पर कम समय में ज्यादा कर्मचारियों की व्यवस्था करने का दबाव रहता है। इसी वजह से भर्ती रणनीति में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। एनएलबी सर्विसेज के मुताबिक, नियोक्ता त्योहारी सीजन के पीक से करीब 1214 सप्ताह पहले ही वर्कफोर्स प्लानिंग शुरू कर रहे हैं।  

पहली बार नौकरी करने वालों के लिए भी अवसर

लचीली शिफ्ट, घर के नजदीक उपलब्ध नौकरियां और सीमित अवधि के लिए संरचित रोजगार ऐसे लोगों के लिए अवसर बढ़ा रहे हैं, जो पहली बार वर्कफोर्स का हिस्सा बनना चाहते हैं। त्योहारी हायरिंग की एक खास बात यह है कि कंपनियां नए टैलेंट पूल पर भी भरोसा कर रही हैं। फ्रेशर्स, पहली बार काम करने वाले युवा और महिलाएं महत्वपूर्ण प्रतिभा समूह के रूप में उभर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ श्रेणियों में गैरमेट्रो क्षेत्रों से आने वाली महिलाएं नई महिला नियुक्तियों में 3035 प्रतिशत तक हिस्सेदारी रख सकती हैं। 

भारत के कार्यबल की बढ़ी चुनौती

त्योहारों के दौरान भर्ती का दायरा भौगोलिक रूप से भी बढ़ रहा है। कुल त्योहारी भर्ती मांग में से करीब 45 प्रतिशत हिस्सेदारी दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों से रहने की उम्मीद है, जबकि इन बाजारों में भर्ती 2530 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है।

उन्होंने कहा, ”त्योहारों के दौरान मांग को पूरा करने के लिए होने वाली भर्ती अब केवल अल्पकालिक जरूरत नहीं रह गई है, बल्कि नए प्रतिभा समूहों तक पहुंचने, बड़े स्तर पर उनकी क्षमता परखने और दीर्घकालिक रोजगार के अवसर तैयार करने का जरिया भी बन रही है।” 

रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियां त्योहारों के दौरान बढ़ती मांग से करीब 1214 सप्ताह पहले ही कार्यबल की अपनी जरूरत की योजना बनाना शुरू कर देती हैं। इससे उन्हें पहले से प्रतिभा समूह तैयार करने और कम समय में होने वाली भर्ती का दबाव घटाने में मदद मिलती है।

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