Bihar

बेटी-रोटी के रिश्ते पर ‘कागज’ की दीवार, नेपाल बॉर्डर पर सख्ती; ID नहीं तो एंट्री बंद

भारतनेपाल सीमा पर इन दिनों अचानक बढ़ी सुरक्षा जांच और नेपाल सरकार की नई सख्ती ने सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. नेपाल में नई सरकार के गठन के बाद भारतीय नागरिकों के प्रवेश को लेकर नियम काफी कड़े कर दिए गए हैं. अब नेपाल जाने वाले हर व्यक्ति के लिए पहचान पत्र अनिवार्य कर दिया गया है. बिना आधार कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट या अन्य वैध परिचय पत्र के लोगों को नेपाल सीमा से ही वापस लौटाया जा रहा है.

बेटी-रोटी के रिश्ते पर ‘कागज’ की दीवार, नेपाल बॉर्डर पर सख्ती; ID नहीं तो एंट्री बंद
बेटी-रोटी के रिश्ते पर ‘कागज’ की दीवार, नेपाल बॉर्डर पर सख्ती; ID नहीं तो एंट्री बंद

नेपाल पुलिस और एपीएफ द्वारा सीमा पर लगातार जांच अभियान चलाया जा रहा है. जोगबनी, फारबिसगंज, सुपौल और अन्य सीमावर्ती इलाकों में भारत से नेपाल जाने वाले लोगों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं. अचानक बढ़ी सख्ती से खासकर मजदूर, मरीज और रोजाना सीमा पार कर काम करने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

नेपाल में बिना आईडी एंट्री नहीं

जानकारी के अनुसार, नेपाल सरकार ने होटल, लॉज और होमस्टे में ठहरने वाले सभी लोगों के लिए भी पहचान पत्र अनिवार्य कर दिया है. होटल संचालकों को निर्देश दिया गया है कि बिना वैध पहचान पत्र के किसी भी व्यक्ति को कमरा नहीं दिया जाए. नेपाल प्रशासन का कहना है कि यह कदम सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है. सीमांचल और कोसी क्षेत्र के हजारों लोग प्रतिदिन नेपाल आतेजाते हैं.

अररिया, सुपौल, किशनगंज और पूर्णिया जिले के लोगों का नेपाल से वर्षों पुराना सामाजिक और पारिवारिक संबंध रहा है. भारत और नेपाल के बीच बेटीरोटी का रिश्ता माना जाता है. सीमावर्ती इलाकों में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं जिनके रिश्तेदार दोनों देशों में रहते हैं. यही वजह है कि पहले लोग बिना किसी विशेष जांच के आसानी से सीमा पार कर लेते थे, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल गई है. नेपाल के बिराटनगर और धरान में बड़े अस्पताल और आंखों के इलाज के प्रसिद्ध केंद्र होने के कारण बिहार के सीमावर्ती जिलों से रोजाना सैकड़ों मरीज इलाज कराने नेपाल जाते हैं.

नए नियम से लोगों हो रही परेशानी

कोलकाता से जोगबनी पहुंचने वाली ट्रेनों में भी बड़ी संख्या में नेपाल जाने वाले मरीज सफर करते हैं, लेकिन अब पहचान पत्र की अनिवार्यता के कारण कई मरीजों को नेपाल में प्रवेश नहीं मिल पा रहा है. इससे गरीब और ग्रामीण परिवारों की चिंता बढ़ गई है. नेपाल सरकार ने 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए भी नियम लागू कर दिया है. अब बच्चों के लिए जन्म प्रमाण पत्र या स्कूल का पहचान पत्र दिखाना जरूरी कर दिया गया है. जिन लोगों के पास कोई दस्तावेज नहीं मिल रहा है, उन्हें सीमा से ही लौटा दिया जा रहा है.

मजदूरछोटे व्यापारियों की बढ़ी मुश्किलें

सीमा पर बढ़ी जांच के कारण भारत से नेपाल जाने वाली बाइक और अन्य वाहनों की लंबी लाइन लग रही है. नेपाल पुलिस वाहनों की भी गहन जांच कर रही है. दैनिक मजदूरी करने वाले मजदूर, छोटे व्यापारी और स्थानीय लोग अचानक लागू हुई व्यवस्था से परेशान दिखाई दे रहे हैं. कई मजदूरों ने बताया कि वे रोजाना काम के लिए नेपाल जाते हैं, लेकिन अब पहचान पत्र नहीं रहने के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ रहा है, जिससे उनकी रोजीरोटी पर संकट खड़ा हो गया है.

अधिकारियों ने क्या कहा?

नेपाल पुलिस एपीएफ के अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान सुरक्षा के दृष्टिकोण से चलाया जा रहा है. भारत ही नहीं बल्कि सभी देशों से आने वाले लोगों के लिए पहचान सत्यापन अनिवार्य किया गया है. नेपाल प्रशासन द्वारा सीमा पर अतिरिक्त पुलिस बल की भी तैनाती की गई है.

हालांकि दूसरी तरफ नेपाल से भारत आने वाले लोगों के लिए अभी भी कोई विशेष जांच व्यवस्था लागू नहीं है. नेपाली वाहन बिना किसी सख्ती के भारतीय सीमा में प्रवेश कर रहे हैं. वहीं नेपाल में भारतीय वाहनों पर भंसार, रोड टैक्स और नगर पालिका टैक्स समेत कई प्रकार के शुल्क वसूले जा रहे हैं. इसे लेकर सीमावर्ती इलाकों के लोगों में नाराजगी भी देखी जा रही है.

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