Bihar

बिहार के इस थाने में हो गई चोरी! गायब हो गए गहने, कैश और कागज

बिहार के पूर्णिया जिले से पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाला एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. जिले के जानकीनगर थाना के मालखाना से लाखों रुपये मूल्य के जब्त जेवरात और नकदी रहस्यमय तरीके से गायब हो गए हैं. जिस मालखाना में पुलिस जब्त सामान को सुरक्षित रखने का दावा करती है, वहीं से चोरी के मामले में बरामद किए गए जेवरात और पैसे गायब होने के बाद पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है. अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर थाना के सुरक्षित मालखाना से इतने कीमती सामान कैसे गायब हो गए और इसके पीछे लापरवाही है या फिर कोई बड़ा खेल.

बिहार के इस थाने में हो गई चोरी! गायब हो गए गहने, कैश और कागज
बिहार के इस थाने में हो गई चोरी! गायब हो गए गहने, कैश और कागज

जानकारी के अनुसार, जानकीनगर थाना क्षेत्र के एक किराना व्यवसायी के घर और दुकान में बीते दिनों भीषण चोरी की घटना हुई थी. चोरों ने घर और दुकान से लाखों रुपये के जेवरात, नकदी और अन्य कीमती सामान पर हाथ साफ कर दिया था. पीड़ित व्यवसायी की शिकायत पर जानकीनगर थाना में कांड संख्या 343/24 दर्ज किया गया था.

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने वैज्ञानिक अनुसंधान शुरू किया और कुछ दिनों बाद चोरी की घटना में शामिल आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने करीब दो लाख रुपये मूल्य के जेवरात और 24 हजार 500 रुपये नकद बरामद किए थे. बरामद सामान को थाना के मालखाना में जमा कराया गया था और पीड़ित व्यवसायी को कोर्ट से रिलीज ऑर्डर लेकर सामान प्राप्त करने के लिए कहा गया था.

बताया जा रहा है कि करीब एक महीने पहले पीड़ित व्यवसायी कोर्ट से आदेश लेकर जानकीनगर थाना पहुंचा और जब्त किए गए जेवरात तथा नकदी वापस मांगी. लेकिन जब मालखाना प्रभारी ने रिकॉर्ड के आधार पर जब्त सामान खोजने की कोशिश की तो सभी के होश उड़ गए. मालखाना में न तो बरामद जेवरात मिले और न ही नकदी का कोई पता चला. काफी देर तक मालखाना के रजिस्टर, पोटली और अन्य जगहों पर तलाश की गई, लेकिन जब्त सामान का कोई सुराग नहीं मिला. इसके बाद थाना परिसर में अफरातफरी का माहौल बन गया.

मामले के सामने आने के बाद पुलिस विभाग में खलबली मच गई है. जानकीनगर थानाध्यक्ष परीक्षित पासवान ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि थाना स्तर पर जांच टीम गठित कर दी गई है और मालखाना में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है. उन्होंने कहा कि यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर जब्त जेवरात और नकदी कहां गायब हो गए. थानाध्यक्ष ने बताया कि वर्तमान और पूर्व मालखाना प्रभारी दोनों से पूछताछ की जा रही है. साथ ही पूरे मामले की सूचना वरीय अधिकारियों को भी दे दी गई है.

थानाध्यक्ष ने यह भी बताया कि कुछ समय पहले थाना पुराने भवन से नए आदर्श थाना भवन में शिफ्ट किया गया था. इसी दौरान मालखाना का भी स्थानांतरण हुआ था. संभावना जताई जा रही है कि सामान किसी पोटली या अन्य पैकेट में रखा गया हो और शिफ्टिंग के दौरान कहीं इधरउधर हो गया हो. हालांकि सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर मामला सिर्फ लापरवाही का है, तो इतने दिनों तक किसी को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई.

इधर, इस मामले में तत्कालीन केस आईओ अशोक मंडल का बयान भी कई नए सवाल खड़े कर रहा है. उन्होंने बताया कि 1 जुलाई 2025 को उनका तबादला सहरसा हो गया था और 29 जुलाई 2025 को उन्होंने वहां योगदान दे दिया था. अशोक मंडल ने दावा किया कि उनके सहरसा जाने के बाद एक दूसरे पीड़ित परिवार को बरामद जेवरात वापस किए गए थे. इसके बाद पुराने थाना भवन से मालखाना को नए भवन में शिफ्ट किया गया था.

अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही बन गया है कि अगर बरामद जेवरात किसी दूसरे परिवार को वापस कर दिए गए, तो फिर उस दूसरे परिवार का असली जब्त सामान कहां गया. क्या गलती से दूसरे केस का सामान किसी और को दे दिया गया, या फिर मालखाना में रिकॉर्ड और जब्त सामान के रखरखाव में भारी गड़बड़ी हुई है. वहीं, कुछ लोग इसे संगठित हेराफेरी और अंदरखाने के खेल से भी जोड़कर देख रहे हैं.

इस घटना ने एक बार फिर बिहार पुलिस के मालखाना प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इससे पहले भी बिहार के कई जिलों से मालखाना में रखे सामान के गायब होने या नष्ट होने की खबरें सामने आती रही हैं. कभी जब्त शराब चूहों द्वारा पी जाने की बात कही जाती है, तो कभी शराब चूहों द्वारा खा जाने का दावा किया जाता है. लेकिन इस बार मामला सीधे तौर पर लाखों रुपये के जेवरात और नकदी से जुड़ा है, इसलिए मामला और भी गंभीर हो गया है.

फिलहाल पुलिस जांच में जुटी हुई है, लेकिन जब तक गायब जेवरात और नकदी बरामद नहीं हो जाते, तब तक यह मामला पुलिस विभाग के लिए बड़ी किरकिरी बना रहेगा. अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि जानकीनगर थाना के मालखाना से गायब हुए लाखों के जेवरात और पैसे आखिर कहां गए. क्या यह सिर्फ लापरवाही का मामला है, या फिर थाना के अंदर बैठे किसी दो पैरों वाले चूहे ने पूरा खेल कर दिया.

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