Satya Report: एम्स गोरखपुर में CBRN आपदाओं पर CME एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन एम्स गोरखपुर के डिजास्टर सेल एवं ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के तत्वावधान में किया गया. आपदा जागरूकता पहल के अंतर्गत केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल एवं न्यूक्लियर खतरों पर एक दिवसीय कंटीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन एवं जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया.

कार्यक्रम में संस्थान की कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ मेजर जनरल विभा दत्ता, एसएम , चिकित्सा अधीक्षक प्रो अजय भारती, विभिन्न डीन, संकाय सदस्य, रेजिडेंट्स, एमबीबीएस एवं नर्सिंग छात्रछात्राएं उपस्थित रहे.
कार्यक्रम के आयोजन अध्यक्ष, नोडल अधिकारी एवं ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के फैकल्टी इंचार्ज डॉ अरुण पांडेय ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान परिदृश्य में CBRN खतरों के प्रति सजगता अत्यंत आवश्यक है तथा ऐसी आपदाओं से बचाव के लिए तैयारी ही सबसे महत्वपूर्ण उपाय है.
‘क्या करें और क्या न करें’… पर सत्र का आयोजन
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वक्ता के रूप में विंग कमांडर विवेक रंजन सिंह, जॉइंट डायरेक्टर मेडिकल सर्विसेज, ऑफिस ऑफ डायरेक्टर जनरल मेडिकल सर्विसेज , एयर मुख्यालय, नई दिल्ली ने CBRN आपदाओं की रोकथाम एवं प्रबंधन पर विस्तृत व्याख्यान दिया.
AIIMS Gorakhpur conducts successfully CBRN Training & Demonstration on 24th April 2026 under the aegis of DGAFMS .
With this it becomes the first among all AIIMS and first pic.twitter.com/ddaLSuPzFu
— AIIMS Gorakhpur April 24, 2026
कार्यक्रम के दौरान CBRN आपात स्थितियों में अपनाए जाने वाले क्या करें और क्या न करें विषय पर व्यावहारिक प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किया गया. यह कार्यक्रम सार्वजनिक अस्पतालों में CBRN विषय पर आयोजित होने वाले प्रारंभिक प्रयासों में से एक है तथा एम्स संस्थानों के अंतर्गत भी अपने प्रकार की अग्रणी पहल है.
अपने संबोधन में मेजर जनरल विभा दत्ता ने कहा कि CBRN खतरों के प्रति जागरूकता एवं तैयारी न केवल संस्थानों बल्कि पेशेवर संगठनों और समाज के लिए भी अत्यंत आवश्यक है.
पहली बार किसी भी एम्स में हुए इस तरह के आयोजन
इस अवसर पर दीन दयान उपाध्याय यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो पूनम टंडन भी उपस्थित रहीं. उन्होंने अपने संबोधन में CBRN परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने में विज्ञान एवं शिक्षा की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए बेहतर तैयारी की आवश्यकता पर बल दिया.
कार्यक्रम के दौरान CBRN खतरों पर आधारित एक हैंडबुक का विमोचन भी किया गया, जो एक उपयोगी रेडी रेकनर के रूप में तैयार की गई है. इस पुस्तिका का लेखन एवं संपादन डॉ अरुण पांडेय द्वारा किया गया है तथा सहसंपादन विंग कमांडर विवेक रंजन सिंह द्वारा किया गया है.
पहली बार भारत के किसी भी एम्स में इस तरह के डिजास्टर से बचने के लिए मेडिकल और गैर मेडिकल लोगो को बचाव का तरीका बताया गया है और खास बात ये है कि इस तरह की ट्रेनिंग केवल रक्षा विभाग के अस्पताल मे ही होते रहे है. केवल सैनिकों एवं उनके जोन में एम्स गोरखपुर का ये पहला प्रयास है इस तरह की ट्रेनिंग देने की जो गैर सैनिक अस्पताल है और आम जनता के लिए के लिए है.



